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डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता आदित्य इंसान के साथ एक बातचीत

स्नेहा वखारिया | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST

वो एक भगवान, पैगंबर और भगवान के दूत हैं. उन्होंने आदिवासियों को काला जादू सिखाया है. उन्होंने हाथियों से लड़ाई लड़ी है. वो दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में से एक हैं जिन्होंने कारें और कपड़ों को डिजाइन किया है. उन्होंने फिल्म का निर्देशन, पटकथा लेखन और अभिनय भी किया है और वो ढाई लाख से ज्यादा दर्शकों के बीच गाना भी गा चुके हैं. और हां! वह अपने स्टंट सीन भी खुद करते हैं.

हां, बिल्कुल सही सुना आपने लेकिन महामानव सरीखी उपलब्धियों वाले गुरू कभी-कभी इतने अस्वस्थ भी हो जाते हैं कि अदालत की सुनवाई तक में नहीं जा पाते. लेकिन वो इतने ज्यादा ईमानदार हैं कि अपनी फिल्म में कलाबाजी के लिए किसी डुप्लीकेट का इस्तेमाल नहीं करते.

तो जब कॉमेडी नाइट्स विद कपिल के हास्य अभिनेता कीकू शारदा, गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान की नकल करते हैं और उन पर कथित अपमानजनक चुटकुले गढ़ते हैं, तब वह खुद को भगवान का दूत साबित करते हुए पूरा क्रोध जाहिर करते हैं. वास्तव में ऐसा करके गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान वापस भगवान को खुद के बारे में संदेश भेजते हैं. 

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अब एपीसोड के प्रसारण के तीन सप्ताह बाद न्यायिक हिरासत में जाने वाले कीकू शारदा खुद को बहुत ज्यादा आरामदायक स्थिति में पा रहे होंगे. हम सभी इस बात से सहमत हैं कि कीकू को काफी प्रचार मिल गया.

आदित्य इंसान के साथ बातचीत


ज़ाहिर है कीकू शारदा के खिलाफ गुरूजी ने खुद से मामला दर्ज नहीं किया बल्कि उनके अनुयायियों ने किया है. इससे उन्हें संदेह का लाभ दिया जा सकता है. जिन कार्यों का उन पर आरोप लगाया जा रहा है, शायद उसके लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता. 

तो हमने तय किया कि इसके लिए गुरुजी के दाहिने हाथ, साथी इंसान और प्रवक्ता आदित्य इंसान से बात की जाय, ताकि पता चले कि क्या वो इस शिकायत से खुद को अलग करना चाहते हैं. 

हालांकि उन्होंने शिकायत नहीं की थी. वास्तव में उन्होंने शिकायतकर्ताओं के लिए "हम" शब्द का इस्तेमाल भी किया. 

उन्होंने कहा, "क्या हम इस देश में बराबर के नागरिक नहीं हैं? क्या हमें न्याय पाने का अधिकार नहीं है? हमने किसी भी प्रकार का कोई उग्रवाद या मनमानी नहीं दिखाई और हम बस हमारे अपमान के खिलाफ कानून से न्याय की मांग कर रहे हैं."

यहां "हम" गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान के सभी अनुयायियों का प्रतिनिधित्व करता है. उनके अपमान का मामला धारा 295-ए के तहत दर्ज कराया गया है. जो धर्म और आस्था का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से अपमान करने के कार्य से संबंधित है.

अब, भले ही गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान भगवान से सीधे बातचीत करने वाले संत हों लेकिन, कानून के दायरे के भीतर उनकी शिक्षाएं किसी स्वतंत्र धर्म का गठन नहीं करती हैं. उनके अनुयायी भी एक धार्मिक समुदाय नहीं हैं. बल्कि वे विभिन्न समूदायों से हैं. इसलिए मैंने आदित्य इंसान से पूूछा कि क्या ऐसे में यह शिकायत वैध है.

उन्होंने कहा, "देखिए, हम कोई एक धर्म या एक संप्रदाय नहीं हैं. हम कई धर्मों का संगम हैं."

यह एक दिली भावना है. लेकिन यह हमारे सवाल का जवाब नहीं था.

मैंने इसके बाद उनसे पूछा गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान को भी आठ साल पहले इसी कानून के तहत एक मामले का सामना करना पड़ा था. वह शायद आखिरी घटना थी जब 'गुरुजी' को लोगों ने एक रैपर की तरह पैरोडी करने वाली विशेष वेशभूषा से अलग एक अन्य ड्रेस में देखा था. तब उन्होंने सिख समुदाय को निराश करने वाली वेशभूषा धारण कर रखी थी, वे गुरु गोविंद सिंह जैसे दिख रहे थे.

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इस घटना ने उन्हें संकट में डाल दिया था. सिखों और गुरमीत राम रहीम सिंह इंसान के अनुयायियों के बीच हिंसक संघर्ष शुरू हो गया था. एक सिख प्रदर्शनकारी की मौत हो गई. आखिरकार सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान की निंदा कर उन्हें माफी देने का एक फतवा जारी कर दिया था.

लेकिन इससे यह मामला खत्म नहीं हुआ. इसके तुरंत बाद, ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन, दमदमी टकसाल, अकाली दल (दिल्ली) और यूनाइटेड अकाली दल के प्रतिनिधियों ने अमृतसर में मुलाकात की और गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान को क्षमा करने संबंधी अकाल तख्त के फैसले के विरोध में पंजाब बंद का आह्वान किया. मजबूरन अकाल तख्त सिख समुदाय के भारी दबाव में अपनी माफी से मुकर गया.

बेशक माफ़ी दी गई या कुछ और हुआ लेकिन न्यायपालिका ने इसमें कुछ भी ठोस न पाकर गुरुजी को बरी कर दिया. तो मैंने आदित्य इंसान से पूछा कि क्या कीकू शारदा के लिए भी न्यायपालिका द्वारा ऐसा ही किए जाने की संभावना है?

उन्होंने कहा, "मैं आपको भटिंडा के सत्र न्यायालय का फैसला दिखा सकता हूं, गुरुजी को बरी कर दिया गया था."

कीकू शारदा इससे ज्यादा रियायत की तुम्हें उम्मीद ही नहीं करनी चाहिए और यह तुम्हें अदालत से जरूर मिलेगा (तुमने न तो दुर्भावनावश और न ही जानबूझकर किसी का अपमान किया है. कानूनी तौर पर जिसे एक धर्म न माना गया हो उस पर हम हमले का संदेह ही क्यों कर रहे हैं).

First published: 14 January 2016, 10:46 IST
 
स्नेहा वखारिया @catchnews

संवाददाता, कैच न्यूज़. लिट्रेचर और लाइफस्टाइल पर लिखती हैं.

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