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10 सालों का सबसे खराब बजट सत्र समाप्त, जनता के 190 करोड़ रुपए पानी में बहे

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 April 2018, 16:10 IST

इस साल का बजट सत्र समाप्त हो गया है. यह दशक का सबसे ज्यादा हंगामेदार बजट सत्र माना जा रहा है. दो चरणों के इस बजट सत्र में 68 दिनों में कुल 31 बैठकें निर्धारित थीं. 5 मार्च से शुरू हुए दूसरे चरण के सत्र में कुल 23 बैठकें निर्धारित की गईं थीं. वहीं बजट सत्र का पहला हिस्सा 29 जनवरी से शुरू होकर 9 फरवरी तक चला, जिसमें कुल 8 बैठकें हुई थीं.

दो चरणों के सत्र में लोकसभा में करीब 28 विधेयक पेश किए जाने थे वहीं राज्यसभा में 39 विधेयक पेश किया जाना था. लेकिन लोकसभा में सिर्फ 5 विधेयक ही पारित किए जा सके. इसमें वित्त विधेयक भी शामिल है. वहीं राज्यसभा से सिर्फ एक ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक 2017 ही पारित हो सका.

इस सत्र को चलाने में अब तक 190 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हुए हैं. इसमें सांसदों के वेतन-भत्तों, अन्य सुविधाओं और कार्यवाही से संबंधित इंतजाम पर खर्च शामिल है. लेकिन इतनी भारी-भरकम राशि खर्च होने के बावजूद संसद को सुचारू रूप से नहीं चलाया जा सका.

लोकसभा की कुल 28 बैठकों में करीब 23 फीसदी कामकाज हुआ जबकि राज्यसभा में इस दौरान 28 फीसदी ही कामकाज हो सका. कामकाज के मामले में बीते साल दोनों सदनों ने रिकॉर्ड बनाया था जब बजट सत्र के दौरान लोकसभा में 108 फीसदी और राज्यसभा में 86 फीसदी कामकाज हुआ था.

माना जा रहा है कि कामकाज के लिहाज से यह सत्र बीते 10 साल का सबसे हंगामेदार सत्र था. सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में लगातार गतिरोध की स्थिति बनी रही और कार्यवाही को एक दिन में कई-कई बार स्थगित करना पड़ा.

लोकसभा की कार्यवाही बीते 15 दिनों से औसतन 10-15 मिनट ही चल पाई है. सदन में जब से अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया तब से एक भी दिन सदन ऑर्डर में नहीं रहा. इसके चलते पूरे सत्र के दौरान विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को सदन में नहीं रखा जा सका.

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राज्यसभा की कार्यवाही भी 10 से ज्यादा दिन तो सिर्फ 2 मिनट तक ही चल सकी है. बुधवार को राज्यसभा की सदन की कार्यवाही को हंगामे की वजह से 10 बार स्थगित करना पड़ा था. सांसदों ने विदाई भाषण के दिन जरूर सदन की कार्यवाही साढ़े तीन घंटे तक चली थी.

First published: 6 April 2018, 16:09 IST
 
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