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राजद्रोह के आरोप जिनकी पुष्टि शायद ही कभी होती हो

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 20 August 2016, 7:24 IST
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कुल मामले राजद्रोह के

वर्ष 2014 में सामने आएः नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी)

राजद्रोह के आरोप का ताजा शिकार मानवाधिकारों पर काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंडिया बनी है. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कन्हैया कुमार के साथियों के साथ शुरू हुआ राजद्रोह के आरोपों का सिलसिला दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर एसएआर गीलानी, पाटीदार आंदोलन के हार्दिक पटेल को समेटने के बाद अब नए शिकार की तलाश में है.

राज्य के मुताबिक, एमनेस्टी और इसके सभी लोग राजद्रोही हैं. यह वो शब्द है जो भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत बेहद अस्पष्ट है.

धारा 124ए में कहा गया है, "जो कोई भी विधि द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ या तो मौखिक या लिखित शब्दों से, या संकेतों से, या फिर दृश्य प्रतिनिधित्व से, अन्यथा नफरत या अवमानना के प्रयास से, या फिर उत्तेजित करता है या उत्तेजित करने का प्रयास करता है को आजीवन कारावास के साथ जुर्माने की, या फिर तीन साल तक कारावास, या सिर्फ जुर्माने की सजा दी जाएगी."

जानिए राजद्रोह से जुड़ी कुछ जरूरी बातें और तथ्यः

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  • राजद्रोह के मामले 2014 में सामने आएः  नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी)
  • गौरतलब है कि 2014 से ही एनसीआरबी ने राजद्रोह के आंकड़े जुटाने शुरू किए. 2015 के आंकड़े अभी आने बाकी हैं.
  • चूंकि पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य के विषय हैं, इसलिए गृह मंत्रालय राजद्रोह के आंकड़े नहीं जुटाता.
  • राजद्रोह के सर्वाधिक मामलों वाले राज्यों में झारखंड (18), बिहार (16), केरल (5) शामिल रहे.

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  • लोगों को 2014 में धारा 124ए के तहत गिरफ्तार किया गया.
  • इनमें से करीब आधे 28 बिहार से हैं.
  • हालांकि इनमें से भी केवल 16 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिससे पता चलता है कि पुलिस के पास इन्हें गिरफ्तार करने का पुख्ता आधार नहीं था.
  • झारखंड में केवल एक व्यक्ति को ही दोषी पाया गया.

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  • देशों में भारत की ही तरह राजद्रोह का कानून है.
  • इनमें सऊदी अरब, मलयेशिया, ईरान, उज्बेकिस्तान, सूडान, सेनेगल और तुर्की शामिल हैं. 
  • ब्रिटेन, इंडोनेशिया, स्कॉटलैंड, दक्षिण कोरिया पहले ही इस काले कानून को निरस्त कर चुके हैं.
  • अमेरिका में भी अभी 218 साल पुराना राजद्रोह कानून है लेकिन इसके कई हिस्सों को हटाया जा चुका है.  

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  • राजद्रोह के मामले भारत के इतिहास में सर्वाधिक विवादित हैं. 
  • बालगंगाधर तिलकः दो बार आरोप लगाया गया. 1897 में उन पर कथित तौर पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा जिसमें दो ब्रिटिश अधिकारियों की हत्या हो गई और दोबारा 1909 में उनके लेख के लिए.
  • महात्मा गांधीः 1922 में अपनी पत्रिका यंग इंडिया में सविनय अवज्ञा के आह्वान के बारे में लिखने पर अंग्रेज सरकार ने उन्हें छह साल के लिए कारावास दिया.
  • बिनायक सेनः एक चिकित्सक और मानवाधिकार कार्यकर्ता जिन्हें माओवादियों से कथित संबंधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई.
  • प्रवीण तोगड़ियाः 2003 में कट्टरपंथी हिंदूवादी नेता पर राजस्थान सरकार ने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में राजद्रोह लगा दिया.
  • अरुंधति रॉयः प्रख्यात लेखिका और कार्यकर्ता पर दिल्ली पुलिस ने 2010 में राजद्रोह का तब मामला दर्ज किया जब वे कथितरूप से नई दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में भारत विरोधी भाषण दे रही थीं.
  • अकबरुद्दीन ओवैसीः मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के विधायक पर 2012 में निर्मल में भड़काऊ भाषण देने के लिए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया. 

आरोप है कि राजद्रोह को व्यापक समर्थन नहीं मिल सका. कई बार इसका इस्तेमाल केवल बदला लेने के लिए किया जाता है. सरकार इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है. 2012 में गृह मंत्रालय द्वारा कानून एवं न्याय मंत्रालय को धारा 124ए के प्रावधानों के विश्लेषण और बदलावों का सुझाव देते हुए एक औपचारिक अनुरोध किया था.

इसके बाद कानून एवं न्याय मंत्रालय ने विधि आयोग से अनुरोध किया था कि वे देश में मौजूद आपराधिक कानूनों की व्यापक समीक्षा पर विचार करें. दिसंबर 2014 में विधि आयोग ने सूचित किया था कि उन्होंने कुछ विशेष क्षेत्रों की पहचान की है और इन पर विचार-विमर्श के लिए उपसमूहों का गठन किया.

2014 के अंत में विधि आयोग ने सूचित किया कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनकी समीक्षा की जरूरत है. हालांकि इस औपनिवेशिक अवशेष के भविष्य पर अंतिम रिपोर्ट अभी प्रतीक्षित है.

First published: 20 August 2016, 7:24 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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