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यूपी के इस लाल ने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ गांववालों को ऐसे दिया नया जीवन

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 April 2019, 13:11 IST

आज ज्यादातर युवा इंजीनियरिंग की नौकरी कर मनपसंद जिंदगी जीना चाहते हैं. ऐसे में उन्हें किसी तरह की कोई दिकतक ना हो, लेकिन यूपी के एक लाल ने इंजीनियरिंग की नौकरी महज गांव के लोगों को बेहतर जिंदगी देने के लिए छोड़ दी. अब वह बच्चों को कोचिंग देते हैं और उससे ही अपना खर्च चलाते हैं.

हम बात कर रहे हैं रामवीर तंवर की. यूपी के ग्रेटर नोएडा के रहने वाले रामवीर तंवर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. उन्हें इंजीनियर के तौर पर बढ़िया नौकरी भी मिल गई, लेकिन उनके मन में गांव के लोगों के लिए कुछ करने का विचार आया. इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर तालाबों को संरक्षित करने का काम शुरु कर दिया. जिससे पानी को संरक्षित किया जा सके. रामवीर अब तक 10 तालाबों को नया जीवन दे चुके हैं.

रामवीर बताते हैं कि, "मेरे लिए एसी ऑफिस में बैठने से ज्यादा जल संरक्षण का कार्य अधिक महत्वपूर्ण है." रामवीर बीते पांच साल से तालाबों को नया जीवन देने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें कि गौतम बुद्ध नगर जिले में सैंकड़ों छोटे तालाब हैं, जिन्हें आज तक संरक्षित नहीं किया गया. लेकिन रामवीर की मेहनत से तालाबों में पानी पहुंचने लगा है.

 

रामवीर एक किसान के बेटे हैं इसलिए अच्छी तरह से समझते हैं कि गांव के लोगों के लिए पानी कितना जरूरी है और उसका संरक्षण उससे भी ज्यादा. रामवीर बताते हैं कि यहां के तालाब सूख रहे हैं और उनका इस्तेमाल कूड़ा फेंकने के लिए किया जाता है. इन्हीं जलाशयों के पानी पर यहां के कई परिवारों का जीवन निर्भर करता है.

रामवीर कहते हैं कि जलाशयों के साथ हो रहे गलत व्यवहार को देखते हुए वह बड़े हुए हैं. जब वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने जलाशयों की सफाई के लिए गांववालों की जल चौपाल लगाई और नौकरी छोड़ने के बाद से पूरी तरह इस काम में लग गए.

बता दें कि यह चौपाल एक गांव से दूसरे गांव जाकर जल संरक्षण के बारे में बताती है. सबसे पहले उनकी वॉलंटियरों की टीम ने 2014 में डाबरा गांव में जलाशय की सफाई का काम किया था. इस जलाशय का कूड़ा साफ करने में महीनों लग गए. इसके बाद फिल्टर सिस्टम का प्रयोग किया गया जिससे पानी को सिंचाई के योग्य बनाया जा सके. यही नहीं ये पानी साफ भी रहे इसके लिए मछलीपालन को प्रोत्साहन भी दिया गया.

इस काम के लिए जब रामवीर को और लोगों की जरूरत पड़ तो उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया. रामवीर कहते हैं कि, "हमारे फेसबुक पेज 'बूंद-बूंद पानी' के अब तक एक लाख से अधिक सदस्य हैं. जब भी हमें लोगों की जरूरत होती है, हम पेज पर घोषणा कर देते हैं और हर बार करीब 100 लोग संरक्षण के काम के लिए पहुंच जाते हैं."

बता दें कि उनके इस काम पर लोगों का ध्यान उस वक्त गया जब उन्होंने #SelfiewithPond के साथ गांव वालों को जलाशयों की तस्वीरें भेजने के लिए प्रोत्साहित किया. इसके बाद से उनके पास स्पॉन्सरशिप के मौके भी आए. जिसका सारा पैसा जलाशयों को जीवंत करने में लगाया गया.

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First published: 7 April 2019, 13:11 IST
 
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