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इंजीनियरिंग कॉलेजों को नहीं मिल रहे छात्र, घटाई जायेगीं 1.36 लाख सीटें

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2018, 12:12 IST

इंजीनियरिंग में कम होते एडमिशन को देखते हुए इंजीनियरिंग कॉलेजों ने AICTE को सीट कम करने के लिए आवेदन किया है. इंजीनियरिंग कॉलेजों ने जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से लगभग 1.36 लाख बी.टेक और एम.टेक कोर्सेज की सीटों को कम करने के लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्न‍िकल एजुकेशन (AICTE) को आवेदन दिए हैं.

एआईसीटीई के आंकड़ों के अनुसार, 83 इंजीनियरिंग संस्थान जो पूरे साल में 24,000 सीटों पर दाखिला देते हैं. उन कॉलेजों ने दाखिला बंद करने के लिए आवेदन किया है. वहीं 494 कॉलेजों ने कुछ इंजीनियरिंग में अंडरग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज को बंद करने के लिए अनुमति मांगी है.

गौरतलब है कि इन सभी कॉलेजों के बंद होने जाने के बाद करीब 42,000 इंजीनियरिंग की सीटों में भी गिरावट आएगी. इसके अलावा, 639 संस्थानों ने नियामक 62,000 सीटों में दाखिला कम करने के लिए अनुरोध किया है.


गौरतलब है कि इन कॉलेजों ने बी.ई/बी.टेक और एम.ई/एम.टेक कोर्सेज के 1.3 लाख सीटों को कम करने एआईसीटीई के सामने प्रस्ताव रखा है. जिसके लिए अभी एआईसीटीई की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. सूत्रों ने अनुसार सभी अनुरोधों को स्वीकार कर लिया गया है.

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बता दें, पिछले साल इंजीनियरिंग संस्‍थानों में सीटें खाली होने पर एआईसीटीई ने अगले शैक्षणिक सत्र से करीब 800 कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लिया गया था. वहीं एआईसीटीई ने कहा है कि इंजीनियरिंग कोर्सेज को बंद करने के लिए 80 प्रतिशत अनुरोधों को मंजूरी देने की उम्मीद है. अंतिम आंकड़े मई महीने के पहले सप्ताह में जारी कर दिए जाएंगे.

पिछले पांच सालों में हुई एडमिशन में गिरावट

इंजीनियरिंग कॉलेज में पिछले पांच साल से दाखिले में गिरावट आ रही है. हर साल ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. जिसको ध्यान में रखते हुए इंजीनियरिंग कॉलेजों ने ये फैसला लिया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इंजीनियरिंग सहित टेक्निकल कोर्सेज में पिछले पांच सालों में 30 प्रतिशत दाखिले कम हुए. वहीं ऐसा चलता रहा था नए शैक्षिक वर्ष से सीटें कम हो जाएंगी. वहीं एआईसीटीई ने कहा है जिन कोर्सेज में दाखिला शून्य हो जाएगा उस कोर्स को तुरंत बंद कर दिया जाएगा.

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भारत में 70 प्रतिशत सीटें टेक्निकल शिक्षा के लिए

भारत में 70 प्रतिशत सीटों पर टेक्निकल शिक्षा दी जाती है. जिसमें मैनेजमेंट (एमबीए), फार्मेसी, कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए), आर्किटेक्चर, टाउन प्लानिंग, होटल मैनेमेंट और 'आर्ट्स और क्राफ्ट' कोर्स शामिल हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक साल 2016-17 में 3,291 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 15.5 लाख बी.ई/बीटेक कोर्सेज की सीटों पर 51 प्रतिशत छात्रों ने दाखिला नहीं लिया था. जांच में मालूम चला कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है.

सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियरिंग सीटों (बी.टेक और एम.टेक) की सीटों में कमी के लिए अंतिम आंकड़े नए कॉलेजों की स्थापना और मौजूदा संस्थानों की क्षमता के आधार ऑफसेट होंगे. आपको बता दें, इस साल एआईसीटीई को नए संस्थानों की स्थापना के लिए 64 आवेदन प्राप्त हुए हैं. जहां 15 हजार सीटों को जोड़ा जाएगा. साथ ही 247 मौजूदा कॉलेजों में लगभग 25,000 सीटों को जोड़ा जाएगा .

 

First published: 21 April 2018, 12:12 IST
 
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