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एस्सार लीक्स: ये मत पूछिए किस-किस का नाम है, ये पूछिए किसका नहीं है

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 June 2016, 14:46 IST
(कैच)

अधिवक्ता सुरेन उप्पल के प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे एक पत्र ने कई नए विवादों को जन्म दे दिया है.

कुछ प्रकाशनों में एस्सार द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से टेप की गई फोन काॅल की ट्रांस्क्रिप्ट प्रकाशित होने के बाद राजनेताओं, नौकरशाहों और शीर्ष उद्यमियों का आचरण बेहद गंभीर संदेह के दायरे में आ गया है.

इसके अलावा उच्च न्यायपालिका के आचरण पर भी सवालिया निशान उठ गए हैं. आइये आपको बताते हैं कि आखिर इन ट्रांसस्क्रिप्ट में है क्याः

हालांकि कैच इन ट्रांसस्क्रिप्ट या इनकी विषय वस्तु की प्रमाणिकता की स्वतंत्र रूप से जिम्मेदारी नहीं लेता है.

एस्सार लीक्स: एक रात में कैसे बदल गई कहानी?

रिलायंस इडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अम्बानी, उस दौर के रिलायंस इडस्ट्रीज के शीर्ष अधिकारी और वर्तमान में अपने छोटे भाई अनिल अम्बानी के दाहिने हाथ माने जाने वाले सुहेल सेठ से बात करते हुए कह रहे हैं, ‘‘दूरसंचार मंत्री के रूप में प्रमोद महाजन के कार्यकाल को जारी रखवाने का समर्थन दिलवाने के लियेे 4-5 मुख्यमंत्रियों, 8-10 सांसदों के अलावा करीब 500 और लोगों से पत्र लिखवाओ.’’ 

महाजन पर लगा था आरोप

एनडीए की सरकार के दौरान महाजन पर डब्लूएलएल लाईसेंस के क्षेत्र में रिलायंस को संपूर्ण मोबाइल सेवाओं के लिये साथ देने का आरोप लगा था. 

कहा जाता है कि इसके बदले रिलायंस ने 1 करोड़ शेयर 1 रुपये प्रति शेयर की दर पर महाजन के एक दोस्त के नाम कर दिये थे. उस समय महाजन ने इन आरोपों का खुलकर खंडन किया था.

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इस और बातचीत में झारखंड से दूसरी बार सांसद बने परिमल नाथवानी (पिछले चुनावों में बीजेपी ने उनका समर्थन किया था) सेठ से बात कर रहे हैं कि कैसे रिलायंस ने सरकारी उपक्रम बीएसएनएल के टैरिफ प्लान को अपने हिसाब से तैयार करवाया था, जिसके चलते रिलायंस को भारी मुनाफा हुआ था. 

यहां पर यह याद दिलवाना आवश्यक है कि उस समय रिलायंस का सीडीएमए दूसरी निजी कंपनियों और बीएसएनएल के साथ बेहद कड़े टैरिफ संबंधित विवाद में फंसा था. नाथवानी रिलायंस इडस्ट्रीज के ग्रुप चेयरमैन हैं.

कथित टेप में रिलांयस समूह के मालिक मुकेश अंबानी की कई लोगों से बातचीत रिकॉर्ड की गई है

मुकेश अम्बानी और सेठ के बीच हुए एक और वार्तालाप में देश के सबसे धनी कारोबारी सेठ को सेल्युलर्स ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया में फूट डलवाने के लिये कहते हुए सुने जा रहे हैं. वे सेठ को बाकी की सेल्युलर लाॅबी में से राजीव चंद्रशेखर को 100-200 करोड़ रुपये देने के लिये कह रहे हैं. 

राजीव चंद्रशेखर उच्च सदन राज्यसभा के सांसद हैं, जो 2012 में बीजेपी और जेडी(एस) के समर्थन से दोबारा सांसद चुने गए थे. इसके अलावा वे बीपीएल मोबाइल के संस्थापक भी हैं और वर्ष 2002 में सीओएआई के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इस वार्तालाप में चंद्रशेखर को 100-200 करोड़ रुपये देने का सुझाव दिया जा रहा है.

फोन टैपिंग और भारतीय राजनीति की संगत बहुत पुरानी है

एक और ट्रांस्क्रिप्ट मुकेश अंबानी समूह के साथ वर्ष 1997 से जुड़े जाने-माने ज्योतिषी शंकर अधवाल, जो वर्तमान में कंपनी की 4 जी सेवाओं रिलायंस जियो के रेग्युलेटरी हेड के रूप में कार्यरत हैं, के बीच की बातचीत को भी सामने लाती है. 

इस बातचीत में अम्बानी साफ तौर पर अडवाल से कह रहे हैं कि कैसे दूरसंचार विभाग से एक फाइल गायब करवाकर सेल्युलर ऑपरेटर लाइसेंस शुल्क के रूप में अदा की जाने वाली 1300 करोड़ रुपये की रकम को देने से बचा जा सकता है.

बातचीत में वे आगे कहते हैं कि इस काम को उस समय दूरसंचार विभाग में ही कार्यरत अजय सिंह और अजाॅय मेहता की मदद से पूरा किया जा सकता है. 

अमर सिंह से कथित बातचीत

स्पाइस जेट एयरलाइंस के सहसंस्थापक और वर्तमान मालिक अजय सिंह को बीजेपी नेतृत्व का काफी करीबी माना जाता है. वे पहले सूचना और प्रसारण मंत्रालय और बाद में दूरसंचार विभाग में प्रमोद महाजन के साथ विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के रूप में कार्यरत रहे. महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी मेहता वर्तमान में बीएमसी के अध्यक्ष के रूप में सेवारत हैं.

अम्बानी, सिंह और सेठ के मध्य हुई दो अन्य वार्ताएं इस बात पर रोशनी डालती हैं कि कैसे महाजन ने कथित तौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के इशारे पर एयरटेल के सुनील भारती मित्तल के अनुरोधों को नजरअंदाज किया था. 

महाजन का मंत्रालय जानते-बूझते एयरटेल के सरकार के तहत आने वाले टेलीकाॅम ऑपरेटरों के साथ इंटर-कनेक्टिविटी के अनुरोधों को टाल रहा था. दूरसंचार के बाजार में भारती की एयरटेल को रिलायंस टेलीकाॅम के प्रतिद्वंद्वी के रूप में जाना जाता है.

एस्सार लीक्स: जिस जेपीसी को अमर सिंह 'मैनेज' कर रहे थे वह केतन पारेख कांड से जुड़ा था और रिलायंस को राहत मिली थी

अधिवक्ता द्वारा प्रदान करवाई गई ट्रांस्क्रिप्ट की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेश और होल्डिंग्स के चेयरमैन हीतल मेसवानी और सेठ के बीच वार्तालाप भी है, जिसमें केजी बेसिन की अनियमितताओं को लेकर बेहद गोपनीय जानकारी है. अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने केजी बेसिन के आवंटन में सरकारी खजाने को भारी नुकसान होने की ओर इशारा किया है.

अनिल धीरूभाई अम्बानी समूह के चेयरमैन अनिल अम्बानी, सेठ और रिलायंस इंडस्ट्रीज के एक और वरिष्ठ अधिकारी शाह के बीच हुई एक और बातचीत में यह लोग इस बारे में चर्चा कर रहे हैं कि कैसे रिलायंस केजी बेसिन मेें सिर्फ 500 करोड़ रुपये खर्च करके इसकी लागत को 1500 करोड़ तक बढ़ाने का दोषी है. इसके अलावा यह भी कि अगर जांच बैठ जाती है, तो कैसे ‘‘सबका बैंड बज जायेगा.’’

अशोक चव्हाण, राशिद अल्वी, दिवंगत गोपीनाथ मुंडे जैसे नेताओं की भी कथित बातचीत लीक हुई है

इसके अलावा धीरूभाई अम्बानी के ‘तीसरे बेटे’ कहे जाने वाले आनंद जैन, सेठ और अम्बानी के बीच हुई कई दौर की बातचीत में साफ होता है कि कैसे आल्टमंड रोड पर एक भूखंड को पाने के लिये अनुचित तरीकों को अपनाया गया. 

इस बातचीत में कथित तौर पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद राशिद अल्वी और एक सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले बीजेपी के पूर्व मंत्री गोपीनाथ मुंडे की संलिप्तता साफ होती है. 

एस्सार पर अंबानी, सुरेश प्रभु और वाजपेयी पीएमओ स्टाफ का फोन टेप करने का आरोप

यह बातचीत बताती है कि कैसे उद्यमी ने बेहद महत्वपूर्ण भूखंड को अपनी मर्जी के दामों पर खरीदा और कैसे आदेशों को अपने पक्ष में करवाकर स्टांप ड्यूटी को बचाया. बाद में इस भूखंड पर बड़े अम्बानी के 4000 करोड़ से अधिक की कीमत वाले बंगले ‘एंटिला’ का निर्माण हुआ, जिसे दुनिया का सबसे महंगा रिहायशी मकान माना जाता है. 

पेडर रोड के बिल्कुल निकट स्थित 4000 वर्ग मीटर के इस भूखंड को वर्ष 2002 में वक्फ बोर्ड से मात्र 21 करोड़ की कीमत में खरीदा गया. बोर्ड द्वारा 2015 में महाराष्ट्र विधानसभा में पेश एक रिपोर्ट में इस सौदे में अनियमितताओं की तरफ इशारा भी किया गया था.

बजट पर प्रभाव

इस सूची का दावा है कि अम्बानी ने वार्षिक बजट के फैसलों को प्रभावित किया. सिंह सरकार में वित्त सचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रह चुके हैं.

इस सूची में सेठ और बीजेपी नेता किरीट सोमैया के बीच बातचीत का भी जिक्र है. इस सूची का दावा है कि सोमैया ने लार्सन एंड टर्बो से जुड़े अंदरूनी सौदे के मामले में सेबी की कार्रवाई को रिलायंस के पक्ष में करने का दबाव बनाया था.

इसके अलावा इस सूची में समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह और समता पार्टी के अखिलेश सिंह के मध्य हुई एक बातचीत का भी ब्यौरा है, जिसमें ये दोनों इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि कैसे केतन पारेख घोटाले में संयुक्त संसदीय समिति और ग्लोबल ट्रस्ट बैंक ‘‘फियास्को’’ को रिलायंस पेट्रोलियम को बचाने के लिये मनाया गया.

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इस बातचीत में कथित तौर पर इस बात का पूरा ब्यौरा है कि जेपीसी के अध्यक्ष प्रकाश मणि त्रिपाठी जिनका बेटा रिलायंस में नौकरी करता था, बीजेपी के एसएस आहलुवालिया, सोमैया, लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी और सांसद प्रेम चंद गुप्ता और पूर्व की यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल सहित कई अन्य राजनेताओं को पैसे का भुगतान किया गया.

इसके अलावा तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री राम नाईक के बीच बातचीत भी है, जिसमें नाईक रिलायंस को ‘‘अनुचित लाभ प्रदान’’ करते प्रतीत हो रहे हैं. इसके अलावा इस बातचीत में यह भी साफ होता है कि कैसे सरकारी बीपीसीएल और एचपीसीएल के विनिवेश में भी रिलायंस ऑयल को फायदा पहुंचाया गया और एचपीसीएल के मामले में तो बड़े पैमाने पर पैसे का भी लेन-देन किया गया.

First published: 18 June 2016, 14:46 IST
 
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