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एस्सार लीक्स: एक रात में कैसे बदल गई कहानी?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 18 June 2016, 14:13 IST

शुक्रवार को भारतीय मीडिया जगत में कथित तौर पर एस्सार समूह द्वारा देश के नामचीन लोगों के फोन टैपिंग की खबर सुर्खियों में बनी रही. हालांकि, 24 घंटे के अंदर ही इस खबर और वकील सुरेन उप्पल के दावों पर सवाल उठने शुरू हो गए है.

एस्सार समूह के पूर्व सिक्योरिटी हेड बासित खान जिनके बारे में कहा गया कि उनके ही देखरेख में फोन टैपिंग को अंजाम दिया गया, वो अचानक ही प्रकट हुए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल को पूरे प्रकरण के लिए दोषी ठहराया और टैपिंग के आरोपों से खुद को अलग कर लिया.

कहानी का नाटकीय मोड़

सुरेन उप्पल ने दावा किया था कि अप्रैल महीने के बाद से ही बासित खान उनके संपर्क में नहीं है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी कहा गया कि उनसे बासित खान से बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. इंडियन एक्सप्रेस ने साफ कहा कि उसके संवाददाताओं से मुंबई के वार्डन रोड पर खान के निवास का दौरा किया, लेकिन वह 'टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे.'

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हालांकि आउटलुक और इंडियन एक्सप्रेस ने कहा कि उन्हें शुक्रवार को एस्सार के एक अन्य अधिकारी से एक ईमेल प्राप्त हुआ जो खान ने वकील उप्पल को लिखा है. ईमेल के अनुसार, 'इंडियन एक्सप्रेस अखबार और आउटलुक पत्रिका जिसमें आपने (उप्पल) मेरे और पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं, उससे मुझे निराशा हुई है.'

इस मेल से अब भ्रम की स्थिति की उत्पन्न हो गई है. शुक्रवार को मीडिया रिपोर्ट्स में एस्सार के पूर्व सिक्योरिटी हेड की पहचान अल बासित खान के तौर पर दर्ज हुई जबकि आउटलुक में छपे मेल के अनुसार उनका बासित खान है. अगर उप्पल जिनका दावा है कि वे जनवरी से मार्च महीने तक खान के संपर्क में रहे हैं, तो उनका (खान) का नाम गलत कैसे ले सकते हैं?

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अगर खान का दावा सच है तो इस कहानी में कई मोड़ हैं. उप्पल को लिखे पत्र में खान कहते हैं कि अवैध निगरानी के दावे 'मनगढ़ंत कहानी' हैं. खान ने यह कबूल किया कि जनवरी 2016 में उनकी उप्पल से मुलाकात हुई थी और उन्होंने टेप के बारे में बताया था. उन्होंने कहा कि टेप को मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने सुरक्षा के लिहाज से उन्हें सौंपा था, जिसकी सत्यता के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. वास्तव में खान का साफ कहना था कि यह रिकार्डिंग उन्होंने नहीं की है.

खान और उप्पल अब एक-दूसरे से लड़ रहे हैं. दोनों ने अलग-अलग दावा किया है. और दोनों कह रहेे हैं कि उनके पास दावे के सबूत भी हैं. खान का कहना है कि उन्होंने कभी उप्पल को हायर नहीं किया. फिर उप्पल इस मामले को किस आधार पर पीएमओ में ले गए?

खान ने आरोप लगाया कि उप्पल कॉरपोरेट दिगग्जों से उगाही करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने मीडिया का सहारा लिया. उनका कहना है कि उप्पल उन पर दबाव बनाकर अपने अवैध कार्यों के लिए समर्थन हासिल करना चाहते हैं. इस पर उप्पल का जवाब आया है कि खान के बयान से उन्हें कोई हैरत नहीं हुई है. खान अब 'एस्सार' के दबाव में आ गए लगते हैं.

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इस बीच एक कहानी सामने आई. बासित खान ने कहा है कि उन्हें ये टेप मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिये थे. खान के अनुसार, जिस पुलिस अधिकारी ने उन्हें ये टेप दिए, वे जाने माने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट थे और एक बड़े आतंकी हमले में मारे गए.

इसके बाद अटकले लगाई जा रही हैं कि खान का इशारा 2008 में मुंबई आतंकी हमले की ओर है. उस हमले में मुंबई पुलिस के तीन वरिष्ठ अधिकारी एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे, पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त अशोक काम्टे और सीनियर इंस्पेटर विजय सालस्कर शहीद हो गए थे. अगर यह बात सच है कि फोन टैपिंग मुंबई पुलिस ने की है. तो यह सवाल है कि पुलिस ने आखिर ऐसा क्यों किया?

First published: 18 June 2016, 14:13 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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