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कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में जीतकर भी अरुणाचल प्रदेश को लेकर 'आशंकित'

आकाश बिष्ट | Updated on: 15 July 2016, 8:50 IST
(कैच)

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में अरुणाचल प्रदेश में 15 दिसंबर, 2015 की यथास्थिति बहाल करने का आदेश दिया. इस फैसले के बाद राज्य में कांग्रेस के नेबाम तुकी फिर से मुख्यमंत्री बने. लेकिन तुकी की मुश्किल ये है कि उन्हें ये नहीं पता कि आगे क्या करना है.

करीब छह महीने पहले 26 जनवरी को राज्यपाल जेपी राजखोवा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था. 

तुकी ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, "आगे क्या किया जा सकता है इसपर मैं कानूनी राय लूंगा और उसके बाद ईटानगर जाकर कार्यभाल संभालूगा."

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहुमत परीक्षण के बाबत दिए गए फैसले पर तुकी ने कहा, "विश्वासमत अपना बहुमत साबित करने का प्राकृतिक तरीका है."

लेकिन, राज्य विधानसभा के आंकड़े तुकी के पक्ष में नहीं नजर आते हैं. तुकी ने दावा किया है कि वो बागी कांग्रेसी विधायकों से संपर्क में हैं. इन नेताओं में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पद से हटाए गए मुख्यमंत्री कालिको पुल भी शामिल हैं.

तुकी ने कहा, "पुल मेरी सरकार में मंत्री थे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अभी भी वो कांग्रेस परिवार के हिस्सा हैं. मैं उनसे अपने साथ काम करने की अपील करूंगा."

पुल भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने से पहले कानूनी राय ले रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि  उनकी सरकार कोई खतरा नहीं है. पुल ने कहा, "सरकार आंकड़ों से चलती है. अदालतें सरकार नहीं चलातीं, संख्याबल से सरकार चलती है. मेरी सरकार बरकरार रहेगी."

कांग्रेस के लिए हैरानी

ऐसा लगता है कि खुद कांग्रेस भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हैरान है क्योंकि शायद उसने राज्य में वापसी की सारी उम्मीद खो दी थी.

तुकी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि उनकी घरवापसी कब होगी. उनमें आत्मविश्वास की भी कमी नजर आ रही थी. तुकी ने कहा कि ईटानगर जाकर वो अपनी कैबिनेट की बैठक करेंगे और अगले विधान सभा चुनाव के बारे में फैसला लेंगे.  हालांकि तुकी पत्रकारों को ये नहीं बता सके कि वो बागी कांग्रेसियों को कैसे मनाएंगे. 

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तुकी ने केंद्र की बीजेपी गठबंधन सरकार पर भी हमला किया. उन्होंने अदालत के फैसले को 'लोकतंत्र की जीत'बताया. तुकी ने कहा, "ये केवल मेरी जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जीत है."

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने अदालत के फैसले के बाद कहा, "जब विधान सभा सत्र होगा तो हम देखेंगे. राजनीतिक बागियों के यही संदेश है कि आप अभी भी हमारे परिवार के संदेश हैं."

विधान सभा की स्थिति

अरुणाचल प्रदेश विधान सभा में कुल 60 सदस्य हैं. अगर यथास्थिति बहाल हुई तो विधान सभा में उनके साथ केवल 15 सदस्य होंगे. वहीं कुल 43 सदस्य उनके खिलाफ होंगे. (30 पुल के पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल, 11 बीजेपी के और दो निर्दलीय.) 

पुल ने दावा किया कि तुकी के साथ जो 15 विधायक हैं उनमें से भी 10 पाला बदलन के लिए तैयार हैं. ऐसे में तुकी का बहुमत साबित करना पाना असंभव प्रतीत हो रहा है.

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शायद इसी आशंका के चलते कांग्रेस आलाकमान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ज्यादा हो-हल्ला करने से परहेज के लिए कहा है. एक कांग्रेसी नेता ने कैच से कहा, "हमें खुशी मनानी चाहिए लेकिन अभी हमें बहुमत साबित करना है इसलिए ज्यादा उत्साह दिखाना ठीक नहीं होगा."

कांग्रेस की मांग

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने प्रेस वार्ता करके पार्टी की तरफ से राज्यपाल राजखोवा से इस्तीफा मांगा है. सिब्बल ने कहा कि पार्टी सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह उन्हें हटाए जाने की मांग करेगी.

सिब्बल ने एक टेप-रिकॉर्डेड बातचीत के हवाले से कहा, "इससे भारत के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की तरफ उंगली उठती है."

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सिब्बल ने कहा कि ये बातचीत हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में जमा की गई है और "हम इन दोनों से संसद में अपना पक्ष रखने की मांग करेंगे. 

सिब्बल ने इस टेप-रिकॉर्डेड बातचीत की जांच कराने की भी मांग की. उन्होंने कहा, "बीजेपी ने उत्तराखंड में जिस तरह श्री रावत से जुड़े एक स्टिंग ऑपरेशन की तुरत-फुरत जांच शुरू की थी, हमें उम्मीद है वो उसी फुर्ती से इस बातचीत की भी जांच कराएंगे."

भावी रणनीति

अदालत का फैसला संसद के मॉनसून सत्र से पांच दिन पहले आया है. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने इस बार भी बीजेपी सरकार के जीएसटी बिल को लेकर गतिरोध होने की संभावना से इनकार नहीं किया.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके बाद केंद्र सरकार सत्ता के दुरुपयोग से परहेज करेगी. 

वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करके 'प्रधानमंत्री को लोकतंत्र का मतलब समझाने के लिए' सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया.

First published: 15 July 2016, 8:50 IST
 
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