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गोमूत्र में सोना न भी मिले तो निराश न हों, दूसरे कई उपयोग हैं इसके

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 July 2016, 8:04 IST
(कैच)

मेक्सिको की एज़टेक सभ्यता (13वीं से 15वीं सदी) में स्वर्ण (सोना) के लिए टियोक्यूट्लैट शब्द का प्रयोग किया जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ "देवताओं का अपशिष्ट" होता है. एज़टेक सभ्यता में पेशाब के लिए जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है उसका शाब्दिक अर्थ 'तरल सोना' होता है.

एज़टेक सभ्यता के करीब छह सदियों बाद गुजरात की एक यूनिवर्सिटी ने पेशाब और सोने के बीच साम्य देखा.

गुजरात की जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (जेएयू) का असल मकसद सूखा पीड़ित सौराष्ट्र इलाके की जरूरतों को पूरा करना था लेकिन अब विश्वविद्यालय ने गाय के मूत्र में सोना होने का शोध पत्र पेश किया है. जूनागढ़ के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गाय के प्रति लीटर मूत्र में 10 मिलीग्राम सोना होता है. इन वैज्ञानिकों ने 400 गायों के मूत्र का परीक्षण करने का दावा किया.

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जाहिर है भारतीय कृषि वैज्ञानिकों के इस दावे के बाद एज़टेक सभ्यता के पुरखे अपनी कब्रों में करवट बदलने लगे होंगे.

जेएयू ने जिन गायों के मूत्र का परीक्षण करने की बात कही है वो गिर इलाके की हैं. ये इलाका एशियाई शेरों के अभ्यारण्य के लिए जाना जाता है.

गोमूत्र तो पहले भी कई बार खबरों में आ चुका है लेकिन 12 साल पुराना जेएयू शायद पहली बार इस दावे के बाद राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आया है. 

लेकिन आप ये न सोचें कि गोमूत्र के गुणों का परीक्षण पहली बार जेएयू ने किया है. इससे पहले भी गोमूत्र के गुणों पर कई शोध हो चुके हैं. पेश हैं इस पर हुए कुछ शोधों के नतीजे-

गोमूत्र का पेटेंट

अमेरिकी पेटेंट नंबर US6410059 के तहत ऐसी दवा का पेटेंट कराया गया जो गोमूत्र का अर्क और एंटीबॉयोटिक से बनी है.

ये पेटेंट इंडियन काउंसिल ऑफ साइंटफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने साल 2002 में कराया था. पेटेंट कराने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार इस दवा के उपयोग से संक्रमण और कैंसर रोकने वाले बॉयोएक्टिव मॉलीक्यूल बढ़ते हैं.

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खेती में उपयोग

खेती में गाय और उसके उत्पादों का उपयोग कृषि प्रधान भारत में सर्वज्ञात है. भारतीय किसान गाय के गोबर का उपयोग खाद और गोमूत्र का प्रयोग कीटनाशक के रूप में करते रहे हैं. भारतीय वैज्ञानिकों ने भी इसपर अपनी मुहर लगाई है.

तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी किसानों को सब्जियों को कीड़ों से बचाने के लिए गोमूत्र छिड़कने का सुझाव देती है. आप इस सुझाव को यूनिवर्सिटी की वेबसाइट 'एग्रीटेक पोर्टल' पर खुद देख सकते हैं.

यूनिवर्सिटी के अनुसार कीटनाशक के तौर पर गोमूत्र का तीन तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है- एक, आधा लीटर गोमूत्र, आधा लीटर मट्ठे कौ नौ लीटर सादे पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इसे सात दिन तक एक दिन में दो बार छिड़कना पड़ेगा. गोमूत्र का उपयोग खाद के रूप में भी किया जाता है. इससे मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा संतुलित होती है.

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फर्श की सफाई और दूसरे उपयोग

कुछ लोगों के अनुसार गोमूत्र का इस्तेमाल फर्श साफ करने में भी किया जा सकता है. केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी भी इससे सहमत हैं. 

गोमूत्र वाले क्लीनर का निर्माण होली काउ फाउंडेशन और योग गुरु रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद संस्थान करते हैं. 

इन संस्थानों के अनुसार गोमूत्र के कीटाणुनाशक गुणों के कारण ये बाजार में प्रचलित फर्श साफ करने वाले क्लीनर से बेहतर हैं. पतंजलि एक केश तेल और साबुन में भी गोमुत्र का प्रयोग करता है.

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कोल्ड ड्रिंक

गोमूत्र का दवा, खाद, कीटनाशक और फर्श की सफाई में इस्तेमाल की सलाह से आप परिचित हो चुके हैं. अब हम आपको बताते हैं कि कुछ लोग इसे पेय पदार्थ के तौर पर प्रयोग करने की भी सलाह देते हैं.

कानपुर गोशाला सोसाइटी ने साल 2009 में 'गोलोक पेय' लॉन्च किया जिसमें 5% गोमूत्र का अर्क था. इस आयुर्वेदिक कोल्ड ड्रिंक के एक लीटर की बॉटल की कीमत 150 रुपये है.

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First published: 1 July 2016, 8:04 IST
 
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