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देश में औसतन 7 निर्माण हादसे होते हैं, न बंगाल ने सबक लिया न देश ने

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 April 2016, 23:31 IST
QUICK PILL
  • इमारतों, पुलों और मकानों के ढहने की सर्वाधिक घटनाएं बड़े राज्यों में हुई है लेकिन बंगाल इसका अपवाद है. 2010 से 2014 के बीच बंगाल में निर्माण हादसों में 184 लोग मारे गए.
  • चार सालों में देश के सबसे बड़े राज्य में 2,065 लोगों की मौत निर्माणाधीन ढांचों के गिरने हुई. महाराष्ट्र में जहां 1,343 लोग तो आंध्र प्रदेश में 1,330 लोगों की जान चली गई.

कोलकाता के फ्लाईओवर हादसे में अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है. पुलिस ने इस मामले में कंस्ट्रक्शन कंपनी आईवीआरसीएल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करते हुए इसके सात कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया है. 

बंगाल में चार अप्रैल से विधानसभा चुनाव शुरू होने हैं और इस वजह से पुल गिरने की घटना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सियासत शुरू हो गई है. 

तृणमूल ने इस घटना के लिए जहां वामपंथी दलों को जिम्मेदार बताया वहीं वामपंथी दलों का कहना है कि पुल बना रही कंपनी के खराब रिकॉर्ड के बावजूद तृणमूल की सरकार ने बार-बार उसे अतिरिक्त समय दिया.

बांध और पुल के ढहने से होने वाली मौतों की संख्या क्रमश: 124 और 297 है जो ऐसी घटनाओं में हुई कुल मौतों का करीब 3.2 फीसदी है

कोलकाता में हुआ हादसा निर्माण क्षेत्र में बरती जाने वाली लापरवाही की पुष्टि करता है. देश में औसतन हर दिन ऐसे सात हादसे होते हैं. वहीं 2010 से 2014 के बीच बंगाल में 184 लोग मारे गए. 

घटनाओं से सबक नहीं लेती सरकार

आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि देश में निर्माण संबंधी हो रहे लगातार हादसों से सरकारें कोई सबक नहीं लेती है. हालांकि कोलकाता हादसे के बाद केंद्र सरकार ने सभी निर्माणाधीन और बन चुके पुलों की समीक्षा कराने का फैसला किया है. 

Flyover tragedy2

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरोके आंकड़ों के मुताबिक 2010 से 2014 के बीच निर्माण संबंधी ढांचों के ध्वस्त होने से देश भर में 13,178 लोगों की जानें गईं. औसत के लिहाज से देखा जाए तो देश में हर दिन ऐसे सात हादसे हुए.

2014 में ढांचों के गिरने से 1,821 लोगों की मौत हुई. 2010 में ऐसी घटनाओं में कुल 2,682 लोगों की मौत हुई. 2011 में यह संख्या बढ़कर 3,161 हो गई.

2013 में ऐसे हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या 2,382 रही. हालांकि 2014 में ऐसी घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या न्यूनतम रही. 2014 में ढांचों के गिरने से 1,821 लोगों की मौत हुई.

मकान गिरने से सबसे ज्यादा लोगों की मौत

मकान गिरने की घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है जो ढांचों के गिरने से होने वाली कुल मौत का 50 फीसदी है.

2010 से 2014 के बीच रिहायशी मकानों के गिरने से सर्वाधिक 4,914 लोगों की मौत हुई जो ऐसी घटनाओं में होने वाली मौत का 37.3 फीसदी है. व्यावसायिक इमारतों के ढहने से हुई मौतों की संख्या 1,610 है.

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक 2010 से 2014 के बीच निर्माण संबंधी ढांचों के ध्वस्त होने से देश भर में 13,178 लोगों की जानें गईं

बांध औैर पुल के ढहने से होने वाली मौतों की संख्या क्रमश: 124 और 297 है जो ऐसी घटनाओं में हुई कुल मौतों का करीब 3.2 फीसदी है.

ढहने की सर्वाधिक बड़े राज्यों में हुई लेकिन पश्चिम बंगाल इसका अपवाद है. 2010 से 2014 के बीच बंगाल में 184 लोग मारे गए.

सबसे ज्यादा लोगों की जान उत्तर प्रदेश में गई. इन चार सालों में देश के सबसे बड़े राज्य में 2,065 लोगों की मौत ढांचों के गिरने हुई. महाराष्ट्र में जहां 1,343 लोग तो आंध्र प्रदेश में 1,330 लोगों की जान चली गई. 

इमारतों, पुलों और मकानों के ढहने की सर्वाधिक घटनाएं बड़े राज्यों में हुई है लेेकिन बंगाल इसका अपवाद है. 2010 से 2014 के बीच बंगाल में 184 लोग मारे गए. 

चार सालों में देश के सबसे बड़े राज्य में 2,065 लोगों की मौत ढांचों के गिरने हुई. महाराष्ट्र में जहां 1,343 लोग तो आंध्र प्रदेश में 1,330 लोगों की जान चली गई.

First published: 2 April 2016, 23:31 IST
 
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