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ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती, हम इसे साबित कर देंगे: मुख्य चुनाव आयुक्त

सादिक़ नक़वी | Updated on: 14 April 2017, 10:10 IST


राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को छोड़कर राजनीतिक स्पेक्ट्रम के सभी पक्ष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की विश्वसनीयता, अचूकता पर हमलावर हो गए हैं. अब भारत के चुनाव आयोग पर चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता को दिखाने और उसे बरकरार रखने का बड़ा काम है. आयोग ने बार-बार कहा है कि आरोप बेबुनियाद हैं और ईवीएम के साथ किसी तरह की टैंपरिंग संभव नहीं है. आयोग ईवीएम के समर्थन में खुलकर सामने आया है.


बुधवार को 16 राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को याचिका दी कि चुनाव में मतदान की पुरानी प्रक्रिया मतपत्र के इस्तेमाल होने की अनुमति दी जाए. राजनीतिक दलों का आरोप है कि पिछले कई चुनावों में ईवीएम से टैंपरिंग की गई है. 

 

कैच से बातचीत करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने कहा कि इस बारे में आयोग का दिमाग खुला हुआ है. उनका कहना है कि हमारा खुला मत है. अगर कोई हमें विश्वसनीय सबूत देता है या कोई सामग्री दिखाता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई या इसमें छेड़छाड़ की जा सकती है, तो हम निश्चित रूप से जांच करेंगे.

 

जैदी इस बारे में पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि ईवीएम से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है. वह कहते हैं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के लिए आपको पूरी आंतरिक व्यवस्था की अनदेखी, उपेक्षा करनी होगी. सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों से लेकर ईवीएम बनाने वाली इकाईयों तक, ईवीएम के परिवहन से लेकर स्टोर करने वाले अधिकारियों तक, और उन लोगों पर जो चुनावी प्रक्रिया के दौरान ड्यूटी पर मुस्तैद रहते हैं.


पारदर्शिता के आज के युग में जहां राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और प्रत्याशी हर चरण, हर मौके पर मौजूद रहते हैं, वहां यह कल्पना करना सम्भव ही नहीं है कि पूरी व्यवस्था की अनदेखी हो जाए. उन्होंने सिलसिलेवार बताया कि चुनाव आयोग किस तरह कई चरणों में इन मशीनों की सख्त सुरक्षा करता है. टेक्निकल से लेकर प्रशासनिक स्तर तक. जिस स्थान पर ईवीएम रखी जाती हैं, वहां भी आयोग सुनिश्चित करता है कि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति उस जगह तक पहुंचने न पाए.

 

राजनीतिक दलों का एक समूह सोमवार को आयोग के अधिकारियों से मिला था. जैदी कहते हैं कि हमने राजनीतिक दलों से कहा है कि हम उनके साथ अलग से एक बैठक करेंगे. हम ईवीएम के सभी पहलुओं को सामने रखना चाहते हैं-निर्माण से लेकर उनके स्टोर किए जाने तक, ताकि हम दिखा सकें कि ईवीएम में दखल नहीं किया जा सकता.


चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी को 'आत्म विश्लेषण' करने की सलाह दी है. आयोग ने यह सलाह आम आदमी पार्टी द्वारा हर बार ईवीएम को लेकर मुखर रहने के सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया में दी है. इस बारे में पूछे जाने पर जैदी ने कहा कि हम यहां राजनीतिक दलों के साथ मुकाबले के लिए नहीं आए हैं. जैदी ने कहा कि चुनाव आयोग लोगों तक व्यापक रूप से पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि हम लोगों तक यह संदेश पहुंचा सके कि ईवीएम में कुछ भी इधर-उधर करना सम्भव ही नहीं है. हम वह सब कुछ करेंगे जो सम्भव है.

चुनौती


समझा जाता है कि चुनाव आयोग को पिछले कुछ दिनों में कई लोगों से ऐसी शिकायतें मिली हैं जिसमें दावा किया गया है और दिखाया गया है कि ईवीएम पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं. चुनाव आयोग सभी एक्टिविस्टों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, कम्प्यूटर के जानकारों को आमंत्रित करने की योजना बना रहा है. जैदी ने कहा कि आयोग उन्हें चुनौती देता है कि वे यह दिखाएं कि ईवीएम में हेरफेर की जा सकती है.


दलों को आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर आयोग पहले से ही काम कर रहा है. चुनाव आयोग के टेक्नीकल अधिकारी इसकी औपचारिक घोषणा से पहले सभी जरूरी तैयारियां कर रहे हैं. जैदी कहते हैं कि इसमें 10-12 दिन या अधिक समय भी लग सकता है. हालांकि, इस चुनौती के लिए कोई नगद पुरस्कार नहीं है.

 

भिंड और धौलपुर का मामला


उप्र विधान सभा चुनावों में करारी पराजय के बाद बहुजन समाज पार्टी ने सबसे पहले ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे. तब से ईवीएम को लेकर कई घटनाएं सामने आईं कि किस तरह से सिर्फ भाजपा के पक्ष में वोट निकले और ईवीएम की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए.


जैदी कहते हैं कि मप्र के भिंड और राजस्थान के धौलपुर की दोनों घटनाओं को लेकर किए जाने वाले दावे आधारहीन हैं. जैदी कहते हैं कि जैसे ही यह खबर आई, आयोग ने मामले की जांच के लिए दोनों जगहों पर अपनी टीम भेजी. भिंड में वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट टेल (वीवीपीएटी) के डेमो के दौरान कोई भी बटन दबाने पर भाजपा की पची निकलने की खबर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि यह झूठ है. उन्होंने कहा कि कन्ट्रोल यूनिट से जो डाटा मिले हैं, उससे पुष्टि होती है कि ईवीएम को हैक नहीं किया गया है. मशीन बेहतर तरीके से काम कर रही है.


जैदी ने एक घटना को चूक बताया जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर ने नए चुनाव के वास्ते मशीन को ले जाने के पहले डाटा मिटाए जाने की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था. मुख्य चुनाव आयुक्त कहते हैं कि ज्यादा अधिक तो यह है कि वीवीपीएटी को उप्र चुनाव के बाद ही न केवल मप्र में उप चुनाव के लिए बल्कि सभी नौ राज्यों में ले जाया गया था. इन राज्यों में पहले से ही ईवीएम हैं. वीवीपीएटी की कमी थी. इसीलिए उसे उप्र से भेजा गया था.


यह सवाल कि ईवीएम उप्र से मप्र कैसे पहुंच गई जबकि इसे स्ट्रांग रूम में कम से कम 45 दिनों रखे जाने का कानून है, इस पर जैदी ने कहा कि यह वीवीपीएटी मशीन है न कि ईवीएम. जैदी आगे व्याख्या करते हुए कहते हैं कि यह उन मशीनों में एक थी जिसे रिजर्व में रखा गया था. उन्होंने बताया कि मशीन को उत्तर प्रदेश के गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र में वास्तविक उपयोग में नहीं लाया गया था. इसे उम्मीदवार के सेट के साथ आरक्षित रखा गया था. यहां से उसे मध्य प्रदेश में ले जाया गया था, यही कारण है कि वीवीएपीएटी से पहली पर्ची भाजपा के सत्य देव पचौरी के नाम की निकली.


मुख्य चुनाव आयुक्त कहते हैं कि धौलपुर में भी जो कन्ट्रोवर्सी उत्पन्न हुई, उसे भी आधारहीन पाया गया. सिर्फ दो ईवीएम में छोटी सी दिक्कत आई थी, न कि 18 ईवीएम में, जैसा कि खबरों में दावा किया गया है. जांच रिपोर्ट से ऐसा कोई संकेत या साक्ष्य नहीं मिला है कि ईवीएम में हेरफेर हुई है. उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी या मतदाता ने ईवीएम को लेकर कोई शिकायत नहीं की फिर कैसे चुनाव आयोग के अधिकारी जांच के लिए इलाके में जाते.

वीवीएपीएटी मशीनों के बारे में क्या?


चुनावी प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने चुनावों में वीवीएपीएटी मशीनों को अनिवार्य बनाए जाने का आदेश दिया है. हालांकि, सरकार द्वारा फंड न जारी किए जाने से ऐसी मशीनों की भारी कमी है. चुनाव आयोग के पास इस समय 52,000 वीवीएपीएटी मशीने उपलब्ध हैं. आने वाले सप्ताहों में आयोग के पास 33,000 और मशीनों के आने की सम्भावना है. हालांकि, यह संख्या भी जरूरत के हिसाब से बहुत कम है. पूरे देश में लगभग 15 लाख मशीनों की जरूरत है.


नसीम जैदी कहते हैं कि नई मशीनों के प्रोडक्शन के लिए सरकार को फंड जारी करना है. सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को समय पर उनका निर्माण करने की जरूरत है. और तब पीएसयू हमें वीवीएपीएटी मशीनों की आपूर्ति करेगा. जैदी साहब कहते हैं कि हम उसका उपयोग करने के लिए तत्पर हैं. चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने के लिए प्रतिबद्ध और क्रियान्वयन के लिए तत्पर है.

First published: 14 April 2017, 10:10 IST
 
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