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गोहत्या के आरोप में पूर्व बीजेपी नेता पर लगा रासुका

दीपक शर्मा | Updated on: 4 February 2016, 21:54 IST
QUICK PILL
  • मध्य प्रदेश पुलिस ने एक पूर्व बीजेपी नेता को गोहत्या से जुड़े मामले में रासुका के तहत गिरफ्तार किया. माना जा रहा है कि गिरफ्तार नेता की बीजेपी में गहरी पैठ थी.
  • मामले ने ले लिया है राजनीतिक रंग. दोनों समुदाय कर रहे हैं अलग अलग दावे. अभी तक बरामद मांस के गोमांस होने की पुष्टि नहीं हुई है.

आरएसएस की किताब में गोहत्या का समर्थक हर शख्स राष्ट्र विरोधी है. लेकिन मध्य प्रदेश में बीजेपी के ही कार्यकर्ता को गोहत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इस मसले पर संघ परिवार को ख़ासी फज़ीहत झेलनी पड़ रही है.

इसी किरकिरी का नतीजा है कि देवास ज़िला प्रशासन ने अनवर मेव उर्फ अन्ना को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के कठोर प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है. अनवर देवास के टोंकखुर्द नगर में फ्रीगंज इलाके के निवासी हैं. इस प्रकरण से पहले तक वे बीजेपी के ज़िला अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के उप-प्रधान थे.

क्या था मामला?


आरोपों के मुताबिक बीते बुधवार की सुबह राजू विश्वकर्मा और गोपाल चौधरी नाम के दो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मेव के घर के भीतर मवेशियों के चिल्लाने की आवाज़ सुनी. उन्होंने घर के भीतर झांककर देखा तो अनवर घर की चौखंडी पर एक मवेशी का वध कर रहे थे. दोनों के मुताबिक गुड्डू मेव, भूरू मेव, वसीम फिरोज़, रियाज़, शादाब मेव, रोमीज मेव और कालू भी इस काम में अनवर का साथ दे रहे थे.

इन कार्यकर्ताओं ने फौरन पुलिस और स्थानीय हिंदू संगठनों को इत्तला दी. पुुलिस के आने से पहले ही कार्यकर्ताओं ने हुजूम ने अनवर के घर को घेर लिया.

कथित तौर पर गोहत्या के मामले में पकड़े गये अनवर मेव की बीजेपी में गहरी पैठ थी

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मांस की बरामदगी की. कहा जा रहा है कि मांस को कई बोरियों में भरकर घर के अलग-अलग हिस्सों में छिपाया गया था.

हिंदू कार्यकर्ताओं ने मांस को ठेले पर रखकर फ्रीगंज के बाज़ार में घुमाया और परीक्षण के लिए सरकारी पशु चिकित्सालय लेकर गए. घटना के एक दिन बाद अनवर पर रासुका की धाराएं लगाकर उज्जैन जेल भेज दिया गया. नौ अन्य अभियुक्तों के खिलाफ राज्य के गोहत्या विरोधी कानून के अलावा आईपीसी की कई धाराओं और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है. उन्हें फिलहाल स्थानीय कारागार में रखा गया है. पकड़े गए आरोपियों में अनवर मेव के बेटे, भाई और भतीजे शामिल हैं. दो आरोपियों की तलाश जारी है.

दूसरी ओर, अनवर के परिवार का दावा है कि बरामद मांस भैंस के बछड़े का है. घटना से व्यथित अनवर के बड़े भाई मुनम मेव का कहना था, " रजिस्टर भी उनका था, कलम भी उनकी थी और सरकार भी उनकी है. मैं नहीं जानता उन्होंने क्या लिखा. लेकिन मुझे इतना मालूम है कि ये गोमांस नहीं था."

कानूनी कार्रवाई


मध्य प्रदेश में कृषि मवेशी संरक्षण अधिनियम, 1959 के तहत गोवंश के किसी जानवर या भैंस की हत्या पर पाबंदी है. ऐसा करने वाले शख्स को तीन साल तक की सज़ा दी जा सकती है. वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र बनाए गए एनएसए एक्ट के तहत पुलिस आरोपी को 12 महीने तक हिरासत में रख सकती है.

पुलिस और स्थानीय प्रशासन मेव की इस कानून के तहत गिरफ्तारी को जायज़ ठहरा रहे हैं. वो इसके लिए अनवर के 'पुराने आपराधिक रिकॉर्ड' का हवाला दे रहे हैं. देवास पुलिस के मुताबिक इलाके में हाल ही में हुई सांप्रदायिक घटनाओं के मद्देनज़र भी ये कार्रवाई ज़रूरी थी. अनवर के खिलाफ एनएसए एक्ट की वैधता पर आखिरी फैसला एक सलाहकार बोर्ड करेगा.

अनवर और चार अन्य आरोपियों को ज़िलाबदर करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

हालांकि ये सवाल बरकरार है कि क्या अनवर के घर से गोमांस ही बरामद हुआ था? इस बात की तस्दीक मथुरा की प्रयोगशाला से जांच के नतीजे आने के बाद ही हो पाएगी. इन नतीजों की रिपोर्ट आने में तीन हफ्ते तक का वक्त लग सकता है. इस सिलसिले में पुलिस अफसर स्थानीय पशु चिकित्सालय की फौरी रिपोर्ट की ओर इशारा कर रहे हैं जिसके मुताबिक ज़ब्त किया गया मांस गाय का ही था.

मसले पर सियासत


गोरक्षा के नाम पर हिंदू वोटबैंक पर दावा ठोकने वाली बीजेपी के लिए ये प्रकरण कोई अच्छा इश्तिहार नहीं था. लिहाज़ा पार्टी डैमेज कंट्रोल के लिए फौरन हरकत में आई और आनन-फानन में मेव को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया.

देवास के पार्टी जिलाध्यक्ष गोपीकृष्ण व्यास मामले से पल्ला झाड़ते हुए बोले, "इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता मेव कितने बड़े पदाधिकारी थे, इतने बड़े गुनाह के बाद किसी का पार्टी बने रहना मुमकिन नहीं है."

बीजेपी के राज्याध्यक्ष शैलेश केसरवानी ने मेव के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई का समर्थन किया. उनके मुताबिक, "गोहत्या किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती."

वहीं, कांग्रेस ने इस बहाने बीजेपी के 'सांप्रदायिक चरित्र' को कठघरे में खड़ा किया.

कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया, "मीडिया में ऐसी कई ख़बरें आई हैं जो बीजेपी सदस्यों के गोहत्या में शामिल होने का खुलासा करती हैं. इनमें कई हिंदू भी शामिल हैं. बीजेपी समाज को गोमाता के नाम पर बांट रही है. हकीकत ये है कि मौजूदा एनडीए सरकार के राज में गौमांस का निर्यात बढ़ा है."

ज़मीनी हालात


बहरहाल, अनवर की गिरफ्तारी का असर टोंकखुर्द में तनाव के तौर पर देखने को मिला. बुधवार को शहर के ज़्यादातर बाज़ार बंद रहे. किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए आसपास के इलाकों से पुलिस बुलाई गई. हिंदू संगठनों के विरोध के चलते सुरक्षा व्यवस्था अब भी कड़ी है.

प्रशासन ने हालात को काबू में रखने के लिए दोनों समुदायों के बीच शांति बैठकें की हैं. इन बैठकों के दौरान दोनों ओर से अनवर के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग उठी है. स्थानीय मुस्लिम नेताओं का कहना है कि अगर लेबोरेटरी रिपोर्ट में अनवर का गुनाह साबित होता है तो उनके पूरे परिवार का बहिष्कार किया जाएगा. स्थानीय वकीलों ने इस मामले के आरोपियों का केस लड़ने से इनकार कर दिया है.

अनवर मेव के पिता के इंतकाल पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद उसके घर गये थे

इस वाकये के बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने इलाके से मटन और चिकन की दुकानें हटाने की मांग को दोहराया है. स्थानीय हिंदू नेताओं के मुताबिक ऐसी दुकानों से बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं.

मुस्लिम समुदाय के लोग इस बात से इत्तफाक नहीं रखते. उनकी दलील है कि ये कारोबार कई दशकों से बेरोकटोक चल रहा है लेकिन कभी कोई सांप्रदायिक समस्या खड़ी नहीं हुई. कई मांस कारोबारियों का आरोप है कि हिंदू संगठन जानबूझकर उनकी रोज़ी-रोटी पर चोट कर रहे हैं.

हिंदू संगठन स्कूलों और धार्मिक स्थलों के नज़दीक इन दुकानों की मौजूदगी का पहले भी विरोध करते रहे हैं. लेकिन उनकी मुहिम ने पिछले साल दिसंबर में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् की 'शौर्य यात्रा' के बाद ज़ोर पकड़ा है. देवास में हालिया सांप्रदायिक हिंसा के बाद ये मांग और तेज़ हुई है.

अनवर मेव की गिरफ्तारी के बाद हिंदू संगठनों की ये ख्वाहिश पूरी होती दिख रही है. तहसीलदार कन्हैयालाल तिलवारी ने मटन और चिकन की सभी दुकानों को टोंकखुर्द के बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया है. उन्होंने भरोसा दिलाया है कि नगर प्रशासन दुकानदारों के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम मुहैया करवाएगा.

संदिग्ध अतीत


ये पहला मौका नहीं है जब अनवर मेव के खिलाफ़ गोहत्या का आरोप लगा है. बीते नवंबर में इसी इलाके में गोमांस के अवशेष मिलने के बाद हालात बिगड़े थे. देवास के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश रघुवंशी के मुताबिक मेव को उस वक्त भी गिरफ्तार किया गया था.

स्थानीय सूत्रों की मानें तो अनवर का मांस कारोबार का लाइसेंस खत्म हो चुका था. इसके बावजूद वो हर हफ्ते लगने वाले हाट बाज़ार में मांस बेचा करता था.

बजरंग दल के कार्यकर्ता दावा करते हैं कि वो अनवर के परिवार की गतिविधियों पर दो साल से नज़र रख रहे थे. इस दौरान उन्होंने अनवर को कई बार 'रंगे हाथ' पकड़ने की कोशिश भी की लेकिन अनवर उनके हाथ नहीं आ सके.

अनवर के परिवार के कई सदस्य सियासत में शामिल रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर कांग्रेस के समर्थक हैं लेकिन अनवर ने कुछ साल पहले बीजेपी की सदस्यता ली. अनवर के सहयोगी रहे बीजेपी कार्यकर्ता बताते हैं कि विचारधारा इसकी वजह नहीं थी. दरअसल, अनवर अपने 'अवैध धंधे' को सत्ताधारी पार्टी के रसूख़ की आड़ में चलाना चाहता था.

पांच साल पहले अनवर के पिता वाहिद और भतीजी फरीन ने सड़क हादसे में जान गंवाई. वो बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे के कार्यक्रम में शरीक होने भोपाल गए थे. उस वक्त मातमपुर्सी के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद अनवर के घर पहुंचे थे.

First published: 4 February 2016, 21:54 IST
 
दीपक शर्मा @catch_deepak

Is a Delhi-based journalist whose heart still resides in his native mountains of Himachal. After almost a decade-long career in television news, he's made the switch to digital. When not working, he likes to venture into the world of theatre, music and literature. Obscure places are where he meets his element.

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