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अब स्कूलों में पढ़ाई जाएगी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता, 'कदम मिलाकर चलना होगा'

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 February 2019, 10:11 IST
(File Photo)

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता अब स्कूली बच्चे पढ़ेंगे. बता दें कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का पिछली साल 16 अगस्त को दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया था. अब नेशनल काउंसलिंग ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानि NCERT ने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की कविता 'कदम मिलाकार चलना होगा' को 8वीं कक्षा की किताब में शामिल करने का निर्णय लिया है. बता दें कि NCERT वाजपेयी के योगदान और उनकी उपलब्धियों को अमर रखने के लिए ये कदम उठाने जा रही है.

बता दें कि आठवीं क्लास की हिंदी की किताब वसंत में वायपेयी की कविता को शामिल किया गया है. इस किताब में रामधारी सिंह दिनकर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिशंकर परसाई और इस्मत चुगताई जैसे प्रसिद्ध लेखकों के द्वारा लिखे गए निबंध, कविता और लघु कथाएं शामिल हैं.

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की ये कविता देशवासियों से एक साथ चलने की अपील करती है. हालांकि अभी तक ये नहीं बताया गया है कि किताब में वाजपेयी की कविता कब छपेगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हृषिकेश सेनापति ने अभी इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया है.

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अटल बिहारी वाजपेयी की कविता 'कदम मिलाकार चलना होगा'

बाधाएं आती हैं आएं

घिरें प्रलय की घोर घटाएं,

पावों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,

निज हाथों में हंसते-हंसते,

आग लगाकर जलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफानों में,

अगर असंख्यक बलिदानों में,

उद्यानों में, वीरानों में,

अपमानों में, सम्मानों में,

उन्नत मस्तक, उभरा सीना,

पीड़ाओं में पलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में,

कल कहार में, बीच धार में,

घोर घृणा में, पूत प्यार में,

क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,

जीवन के शत-शत आकर्षक,

अरमानों को ढलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,

प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,

सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,

असफल, सफल समान मनोरथ,

सब कुछ देकर कुछ न मांगते,

पावस बनकर ढलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

कुछ कांटों से सज्जित जीवन,

प्रखर प्यार से वंचित यौवन,

नीरवता से मुखरित मधुबन,

परहित अर्पित अपना तन-मन,

जीवन को शत-शत आहुति में,

जलना होगा, गलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

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First published: 20 February 2019, 10:11 IST
 
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