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एक्सक्लूज़िव: नोटबंदी के पहले खरीदी गई जमीनों के लिए भाजपा ने करोड़ों का नगद भुगतान किया

कैच को मिले कुछ दस्तावेज बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने नोटबंदी के ठीक पहले बिहार के कई जिलों में जमीनों की खरीद फरोख्त के लिए नगद पैसे का इस्तेमाल किया. पिछले हफ्ते कैच ने एक ख़बर प्रकाशित की थी. कैच को मिले दस्तावेजों से पता चला था कि भारतीय जनता पार्टी ने आठ नवंबर को प्रधानमंत्री द्वारा 1000 और 500 के नोटों को प्रतिबंधित करने की घोषणा से पहले बड़े पैमाने पर देश भर जमीनों की खरीद फरोख्त की थी.

कैच की ख़बर आने के कुछ ही घंटों बाद बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील मोदी ने बयान जरी किया था कि सभी खरीददारियां पारदर्शी तरीके से हुई हैं. उन्होंने तो यहां तक दावा किया कि इन जमीनों की खरीद के लिए पार्टी ने लोन लिया है.

ऐसे कम से कम पांच जमीन खरीद के दस्तावेज कैच को मिले हैं जिनमें भुगतान नगद में होने का जिक्र है

कैच की ख़बर पर प्रतिक्रिया देते हुए सुशील मोदी ने 25 नवंबर को कहा था, 'ज़मीनों की ख़रीद-फ़रोख्त में सभी नियम-कानून का पालन किया गया है.' उनका दावा यह भी था कि इसमें किसी तरह की वित्तीय हेराफेरी नहीं हुई है. मोदी ने कहा था, 'जहां तक मुझे पता है कि ज़मीन ख़रीदने के लिए भुगतान डिमांड ड्राफ्ट और चेक से किया गया है ना कि कैश में. अगर कुछ भी गड़बड़ी हुई है तो बिहार सरकार के पास इसकी विस्तृत जानकारी होगी.'

इस संबंध में कैच ने अपनी पड़ताल में पाया कि भाजपा ने ज्यादातर खरीददारियां नगद में की हैं. ऐसे कम से कम पांच जमीन खरीद के दस्तावेज हमारे पास हैं जिनमें भुगतान नगद में होने का जिक्र है. सवाल उठता है कि फिर सुशील कुमार क्या सबको गुमराह कर रहे थे?

कैच को मिले दस्तावेजों के मुताबिक सीतमढ़ी, अरवल, कैमूर, अररिया और बगहा आदि जिलों में पार्टी ने नगद मे भुगतान कर जमीनें खरीदीं.

बिहार से मिले दस्तावेज बताते हैं कि पार्टी ने अगस्त महीने के बाद से लेकर नवंबर महीने के पहले हफ्ते तक करोड़ों रुपए की जमीनें अलग-अलग जिलों में खरीदीं थीं.

कैच ने भाजपा द्वारा खरीदी गई इन संपत्तियों के करीब दर्जन भर दस्तावेज इकट्ठा किए थे. जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े ये दस्तावेज बिहार सरकार की भूमि जानकारी संबंधी वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं. भाजपा ने ये संपत्तियां अपने कार्यकर्ताओं के नाम पर खरीदी हैं. इनमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से पार्टी के सीनियर कार्यकर्ता और विधायकों को सिग्नेटरी बनाया गया है.

कैच के पास वह पत्र भी मौजूद है जिसे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ओर से पार्टी पदाधिकारियोंं को जारी किया गया है. एक पत्र में अमित शाह ने जमीनों की खरीद के लिए बिहार के कोषाध्यक्ष दिलीप जायसवाल को अधिकृत किया है.

बिहार की दीघा विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक संजीव चौरसिया जो कि इन तमाम खरीदों में सिग्नेटरी भी हैं, ने भी कैच से बातचीत में स्वीकार किया था कि पार्टी ने हाल के दिनों में बड़ी मात्रा में जमीनों की खरीद-फरोख्त की है. चौरसिया ने बताया कि पार्टी ने बिहार के साथ ही देश भर में जमीनें खरीदी हैं. ये जमीनें पार्टी कार्यालय और पार्टी के तमाम दूसरे कामों के लिए ली गई हैं.

चौरसिया के शब्दों में, 'सब जगह खरीदा जा रहा था. बिहार के साथ और भी जगह जमीन खरीदा जा रहा है... हम लोग तो सिर्फ सिग्नेटरी अथॉरिटी हैं, पैसा तो पार्टी की तरफ से आया था... सारी जमीन खरीदी है पार्टी कार्यालय के लिए और अन्य कामों के लिए. नवंबर के पहले हफ्ते तक जमीन खरीदी है.'

दस्तावेज 1

दस्तावेज 2

दस्तावेज 3

दस्तावेज 4

दस्तावेज 5

कैच को मिले राजस्व विभाग के पांच दस्तावेजों के मुताबिक करीब 2.07 करोड़ रुपए की राशि नगद में भुगतान की गई. ये वो आंकड़े हैं जिनके दस्तावेज हमारे पास मौजूद हैं. इसके अलावा भी बड़ी मात्रा में जमीनों की खरीद फरोख्त हुई है. खुद भाजपा के तमाम बड़े नेताओं ने स्वीकार किया है कि उन्होंने देश भर में पार्टी कार्यालय के लिए जमीने खरीदी हैं.

नगद में जमीनों की खरीद फरोख्त इस बात का संकेत है कि नोटबंदी से ठीक पहले पार्टी ने बड़े पैमाने पर अपने पैसे को रियल एस्टेट में तब्दील कर लिया. कांग्रे पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने अपने काले धन को सफेद बनाने के लिए इन जमीनों की खरीद फरोख्त की है. सुरजेवाला ने मांग की है कि पिछले एक साल के दौरान भारतीय जनता पार्टी द्वारा खरीदी गई सभी जमीनों की जांच हो.

एक अन्य विपक्षी पार्टी जदयू ने भी मांग की है कि इन सभी खरीददारियों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो. 

पार्टी द्वारा खरीदी गई जमीनों की साइज आधा एकड़ से 250 वर्गफीट के बीच है. इनकी कीमत 8 लाख से 1.16 करोड़ के बीच है. सबसे महंगी जमीन करीब 1100 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर से खरीदी गई है.

जमीनें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से बिहार भाजपा के जनरल सेक्रेटरी संजीव चौरसिया, लाल बाबू प्रसाद, उपाध्यक्ष, भाजपा बिहार इकाई, दिलीप कुमार जायसवाल- कोषाध्यक्ष, भाजपा बिहार इकाई आदि नेताओं के नाम पर खरीदी गई हैं.

First published: 29 November 2016, 18:35 IST
 
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