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तकनीकी तौर पर टेरी के चांसलर नहीं बन सकते आरके पचौरी

निहार गोखले | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • यूजीसी रेगुलेशंस 2010 के सेक्शन 6.1 के एनेक्सर 2 के मुताबिक \'सोसाएटी या ट्रस्ट या सोसाएटी या ट्रस्ट के प्रेसिडेंट का सदस्य डीम्ड यूनिवर्सिटी का चांसलर नहीं बन सकता है.\'
  • टेरी बतौर सोसायटी रजिस्टर्ड है. दूसरे मामले में टेरी के दस्तावेज बताते हैं कि पचौरी वास्तव में सोसायटी के सदस्य हैं. टेरी चूंकि टेरी यूनिवर्सिटी की प्रोमोटर है और निमयों के मुताबिक टेरी का सदस्य टेरी यूनिवर्सिटी का चांसलर नहीं बन सकता है.

आर के पचौरी तकनीकी तौर पर टेरी यूनिवर्सिटी के चांसलर नहीं हो सकते. कैच के पास जो दस्तावेज है उसके आधार पर यही निष्कर्ष निकलता है. यूजीसी के नियमों के मुताबिक ऐसी किसी यूनिवर्सिटीज का चांसलर पैरेंट ऑर्गनाइजेशंस से जुड़ा हुआ व्यक्ति नहीं हो सकता है.

नियमों के मुताबिक चांसलर यूनिवर्सिटी का ट्रस्टी नहीं हो सकता. कैच के पास मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि पचौरी किसी भी मोर्चे पर ऐसी योग्यता नहीं रखते.

पहला मामला

पहले मामले के मुताबिक पचौरी टेरी यूनिवर्सिटी के चांसलर है. यूजीसी रेगुलेशंस 2010 के सेक्शन 6.1 के एनेक्सर 2 के मुताबिक 'सोसाएटी या ट्रस्ट या सोसाएटी या ट्रस्ट के प्रेसिडेंट का सदस्य डीम्ड यूनिवर्सिटी का चांसलर नहीं बन सकता है.'

लेकिन टेरी यूनिवर्सिटी के ट्रस्ट डीड के मुताबिक पचौरी शुरू से ही ट्रस्टी रहे हैं जब इसे टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के नाम से जाना जाता था.

दूसरा मामला

टेरी बतौर सोसायटी रजिस्टर्ड है. दूसरे मामले में टेरी के दस्तावेज बताते हैं कि पचौरी वास्तव में सोसायटी के सदस्य हैं. टेरी चूंकि टेरी यूनिवर्सिटी की प्रोमोटर है और निमयों के मुताबिक टेरी का सदस्य टेरी यूनिवर्सिटी का चांसलर नहीं बन सकता है.

टेरी से जुड़े दो दस्तावेज बताते हैं कि पचौरी टेरी के सदस्य हैं. क्लॉज 3,5 और 10 के मुताबिक पचौरी टेरी के गवर्निंग काउंसिल के मेंबर है.

कानूनी पहलू

कैच को यह दस्तावेज संस्थानिक स्रोतों से मिले हैं. अगर पचौरी ने टेरी यूनिवर्सिटी के ट्रस्टी के पद से खुद को अलग कर लिया है या फिर टेरी के निमयों में बदलाव किया जा चुका है तो इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती.

लेकिन अगर स्थिति टेरी और टेरी यूनिवर्सिटी के दस्तावेजों के मुताबिक है तो वकीलों के मुताबिक पचौरी को तत्काल इस्तीफा देना होगा. सीनियर एडवोकेट और पूर्व असिस्टेंट सॉलिसीटर जनरल ऑफ इंडिया इंदिरा जयसिंह के मुताबिक, 'मामला पूरी तरह से डीम्ड यूनिवर्सिटी के दर्जे को हटाए जाने से जुड़ा है और इससे छात्रों पर असर होगा. इसलिए छात्रों के हितों में आर के पचौरी को चांसलर के पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए.'

इस मामले में पचौरी को भेजे गए ईमेल और संदेश का जवाब नहीं मिल सका है.

First published: 11 February 2016, 11:07 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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