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एक्सक्लूसिव: राहुल गांधी की किसान यात्रा का सच, फर्जी किसान और फर्जी मोबाइल नंबर

आकाश बिष्ट | Updated on: 16 December 2016, 7:36 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में चर्चित किसान यात्रा कर किसानों के मुद्दे उठाया था. 
  • उन्होंने दावा किया था कि सिर्फ़ यूपी के 2 करोड़ किसानों ने उन्हें अपनी समस्या संबंधी मांग पत्र सौंपा है. 
  • वह इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर प्रधानमंत्री से मिलने वाले हैं लेकिन कैच की पड़ताल में पता चला है कि किसानों के मांत्र पत्र किसानों ने नहीं बल्कि कांग्रेसियों ने खुद बैठकर भरे हैं. 

हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में किसान यात्रा कर उनकी मांगों को उठाया था. अब उन्हीं किसानों की मांगों की लिस्ट सौंपने के लिए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा है. राहुल गांधी के पास उत्तर प्रदेश के दो करोड़ और पंजाब के 34 लाख किसानों से ऐसे मांग पत्र हैं जो कि कांग्रेस मुख्यालय के लॉन में रखे हुए हैं. 

मगर इन किसान पत्रों को ग़ौर से देखने पर इसमें हुए गड़बड़झाले का पता चलता है. यहां से उठाए गए कई पत्रों पर हैंड राइटिंग और दस्तख़त बिल्कुल एक जैसे मिले. इस मांग पत्र के प्रारूप में कई वर्ग हैं, जिन्हें किसानों को भरना था. इसमें किसानों के नाम, फोन नम्बर, गांव, खंड, जिला और कर्ज की राशि की जानकारी के कॉलम बनाए गए हैं. साथ ही दस्तख़त के लिए भी जगह है. 

‘यूपी के कई किसान’ असलियत में तेलंगाना, राजस्थान और गुजरात के आम लोग निकले!

कैच ने इन पत्रों पर लिखे दर्जनों फोन नंबरों पर बात की जिससे नाम, पता, मोबाइल नंबर सब फर्ज़ी निकला. नंबरों पर फोन करने पर उत्तर प्रदेश और पंजाब के किसान नहीं मिले. उदाहरण के लिए, कानपुर के सदाना गांव के किसान प्रदीप कुमार के नंबर पर फोन किया तो वह चंडीगढ़ के सरकारी कर्मी का फोन नंबर निकला.

इसी तरह यूपी की किसान जानकी दुलारी के नंबर पर फोन किया तो वह अहमदाबाद के रमेश का नंबर पाया गया, जिसका खेती से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं तो अहमदाबाद में व्यापारी हूं; पता नहीं मेरा नाम उस पत्र में कैसे आया. यह जरूर कोई फर्जीवाड़ा है.’

राजेंद्र नाम के किसान को फोन किया तो वह ग्वालियर का बंटी निकला. ऐसे ही, कपूरी देवी का फोन नंबर तेलंगाना के किसी आदमी का पाया गया. स्नेहलता के नंबर पर इंदौर का कोई आदमी तो पुष्पा देवी के फोन नंबर पर महाराष्ट्र के किसी व्यक्ति ने जवाब दिया.

कैच ने किसान पत्रों पर लिखे करीब 15 ऐसे नंबरों पर फोन किए और सब के सब फर्जी निकले. इनमें से एक भी मोबाइल नंबर यूपी का नहीं था. ये सारे नंबर तेलंगाना, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के हैं.

इन मांग पत्रों के बारे में सबसे दिलचस्प इनके हस्ताक्षर हैं. मांग पत्र के ज़्यादातर बंडलों में दस्तख़त एक जैसे मिल रहे हैं. अगर मांग पत्र में किसी कथित किसान का नाम प्रदीप दर्ज है तो उसके नाम का पहला अक्षर (प) लिखकर गोला बना दिया गया है. अगर किसी का नाम गुरु लिखा है तो 'ग' लिखकर गोला बना दिया गया है. कह सकते हैं कि इस फर्ज़ीवाड़े में सतर्कता की बजाय जल्दबाज़ी दिखाई गई है जिसकी वजह से यह आसानी से पकड़ में आ गया. 

पंजाब के किसानों के भी मांग पत्रों के बंडलों में हस्ताक्षर और हैंडराइटिंग एक जैसी हैं. गोपनीयता की शर्त पर पंजाब के एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कैच को बताया कि उसे पार्टी से 7000 किसान पत्र भरने के लिए दिए गए थे. इनमें से उसने 700 पत्र भरे थे. उससे जब पार्टी के किसी कार्यकर्ता ने पूछा कि 7000 पत्र क्यों नहीं भरे तो ‘मैंने कहा, मैं अब और नहीं भर सकता.’

बुधवार को मीडिया के सामने ये किसान मांग पत्र हाथ में लेते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि ‘कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दर-दर जाकर बड़ी मेहनत से ये मांग पत्र इकठ्ठे किए हैं. ये सभी मांग पत्र जल्द ही सरकार को सौंप दिए जाएंगे.’

प्रशांत किशोर की पहल

सितम्बर माह में राहुल गांधी यूपी में 3500 किलोमीटर लंबी किसान यात्रा पर निकले थे. इस दौरान उन्होंने 141 विधानसभा क्षेत्र कवर करते हुए 48 दिन में 48 जिलों का दौरा किया. यूपी में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पार्टी के नए रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने यह पहल की थी और किसान मांग पत्र भी उन्हीं के दिमाग की उपज है.

इस साल की शुरूआत में यूपी में पार्टी के चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी प्रशांत किशोर को ही सौंपी गई थी. इससे नाखुश पार्टी के कुछ नेताओं ने यूपी में किशोर की भूमिका सीमित कर दी थी. किसानों को ऋण माफी, बिजली के बिल की राशि आधी करने और उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलवाने में मदद करने का सुझाव भी प्रशांत किशोर का ही था. 

देवरिया से शुरू हुई राहुल गांधी की किसान यात्रा के प्रारंभ में किशोर ने अपनी टीम को हर जिले में ये किसान पत्र भरवाने की जिम्मेदारी दी थी जहां-जहां कांग्रेस उपाध्यक्ष गए. पार्टी का हर खंड से 25,000 ऐसे फॉर्म भरवाने का लक्ष्य था, यानी कि प्रदेश से 2 करोड़ मांग पत्र.

कैच ने इस बारे में प्रशांत किशोर से सम्पर्क साधने की कोशिश की लेकिन उन्होंने व्हाट्सएप पर पूछे गए किसी सवाल का जवाब नहीं दिया. यहां तक कि कांग्रेस के यूपी इकाई के अध्यक्ष राज बब्बर ने भी किसी फोन कॉल या मैसेज का जवाब नहीं दिया.

बहरहाल, दिलचस्प सवाल यह है कि राहुल गांधी जब शुक्रवार को प्रधानमंत्री से मिलेंगे तो क्या वे किसानों के फर्ज़ी मांग पत्रों को लेकर जाएंगे? अगर नहीं तो उन्हें किसानों द्वारा सचमुच में भरे गए असली मांग पत्र सार्वजनिक करना चाहिए क्योंकि कांग्रेस मुख्यालय के लॉन में पड़े मांग पत्र कुछ और ही कहानी कह रहे हैं. 

First published: 16 December 2016, 7:36 IST
 
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