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'विधानसभा चनावोंं में पेड न्यूज पर रहेगी चुनाव आयोग की विशेष नज़र'

सादिक़ नक़वी | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

चार राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुच्चेरी में अप्रैल में विधान सभा चुनाव होंगे. चुनाव आयोग द्वारा चुनावी की तारीखों की घोषणा के साथ ही इन सभा राज्यों में चुनावी आचार संहिता लागू हो चुकी है.

चुनाव और उसमें आने वाली संभावित मुश्किलों से निपटने के लिए चुनाव आयोग की तैयारी पर कैच ने बात की मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम ज़ैदी से.

पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:

पश्चिम बंगाल में छह चरणों में और असम में दो चरणों मे चुनाव होने हैं, बाकी जगहों पर एक चरण में चुनाव होगा. इसके पीछे कोई विशेष कारण है?


ये फैसला संसाधनों का सर्वोत्तम इस्तेमाल करने के लिए लिया गया है. असम और पश्चिम बंगाल भौगोलिक रूप से करीबी हैं. मसलन, अर्ध सैनिक बल असम में मतदान कराने के बाद पश्चिम बंगाल चल जाएंगे. बंगाल बड़ा राज्य है और राज्य के कुछ इलाके वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित है इसलिए वहां छह चरणों में चुनाव होगा.

अप्रैल के अंत तक सुरक्षा बल दक्षिण भारत चले जाएंगे और तमिलनाडु, केरल और पुडुच्चेरी में चुनाव कराएंगे. इसके अलावा हमने इन तीनों राज्यों में इसलिए भी एक ही दिन चुनाव रखा ताकि पड़ोसी राज्य का प्रभाव न पड़े. क्योंकि ये तीनों राज्य आपस में सटे हुए हैं. इन राज्यों में एक साथ चुनाव होने से तमाम तरह की चुनावी धांधली को रोकने में भी मदद मिलेगी.

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तमिलनाडु में बाढ़ के कारण कई जगहों पर परीक्षा की तारीख आगे बढ़ा दी गयी है. इसलिए मतगणना अधिकारी और मतदान केंद्रों की उपलब्धता के अनुसार भी वहां के लिए मई में रखी गयी चुनावी तारीख मुफीद है.

चुनाव में धनबल से वोट खरीदने का मुद्दा लगभग हर बार उठता है. इसपर काबू करने के लिए चुनाव आयोग ने इस बार क्या एहतियात किए हैं?


हम इस तरह की चीजों को रोकने के पुराने तरीके को बेहतर बनाने के साथ ही कुछ नए कदम भी उठा रहे हैं. मसलन, अब उड़ाका दलों के पास जीपीएस होगा. जिससे उनकी मौजूदगी के बारे में हर पल की मालूमात होती रहेगी. अब उड़ाका दलों में केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी होंगे. ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि कई बार ऐसी शिकायत आई कि उड़ाका दलों ने अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभायी. उन्हें भेजा कहीं और गया और वो चले कहीं और गए.

हमने आयकर विभाग और सीमा शुल्क विभाग के खुफिया शाखा को भी निर्दश दिया है कि वो गैर-कानूनी पैसे और शराब की आवाजाही पर नजर रखें. मसलन, तमिलनाडु में हवाला के जरिए पैसे का काफी लेन-देन होता है. तो हमने आयकर वालों को हवाला नेटवर्क पर नजर रखने के लिए कहा है.

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एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन सहित जिला स्तर पर ऐसी चीजों पर निगरानी रखी जा रही है. कई बार कुछ लोग वाजिब कारण से भी बड़ी राशि लेकर सफर करते हैं. ऐसे लोगों के लिए हर जिले में एक अपीलैट बॉडी बनायी गई है. अगर उड़ाका दल या पुलिस ने किसी से ऐसी राशि जब्त की है तो वो यहां अपील कर सकता है. उसकी शिकायत पर 24 घंटे के अंदर फैसला हो जाएगा.

असम में 'संदिग्ध वोटरों' का मुद्दा काफी अहम रहा है. इनमें से बहुत से लोग सुदूर इलाकों में रहते हैं. उनका कहना है कि उन्हें इस बात की सूचना तक नहीं मिलती कि उनका नाम 'संदिग्ध वोटरों' में है. आपने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कुछ किया है?


जब तक मतगणना अधिकारी को अदालत या संबंधित न्यायाधिकरण से आदेश नहीं मिल जाता तब तक 'संदिग्ध वोटर' चिह्नित किए गए लोग वोट नहीं पाएंगे.

असम में करीब एक लाख 'संदिग्ध वोटर' हैं. हम अदालत या न्यायाधिकरण के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. उसके बाद ही उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जा सकते हैं.

पेड न्यूज को लेकर चुनाव आयोग ने क्या रणनीति बनायी है?


हमने इसके लिए तीन स्तरीय व्यवस्था की है. हमने हर जिले, हर प्रदेश और चुनाव आयोग में एक मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी बनायी है. ये कमेटी पेड न्यूज़ पर नजर रखेगी. हमने इस बारे में अपनी वेबसाइट पर भी इसके बारे में अद्यतन निर्देश जारी किए हैं.

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अभी तक पेड न्यूज़ अपराध की श्रेणी में नहीं है. हमने कानून मंत्रालय को लिखा है कि इसे अपराध की श्रेणी में रखा जाए. अभी इसपर मंत्रालय ने कोई फैसला नहीं किया है. हमने घूसखोरी को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखने की भी मांग की है. अभी तक ये भी नहीं हुआ है.


हेट स्पीच को लेकर चुनाव आयोग के नरम रुख की काफी आलोचना होती रही है?


मैं ऐसा नहीं मानता. आयोग नफरत भड़काने वाले बयानों का संज्ञान लेता रहा है. ऐसे कई मामले अदालतों में विचाराधीन भी हैं. चुनाव आचार संहिता तोड़ने वाले नेताओं को हमने नेताओं को चेतावनी दी है, उनपर रोक तक लगायी है.

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ऐसे मामलों में संबंधित नेता के चुनाव प्रचार करने पर रोक लग सकती है. हमने जिलाधिकारियों को ऐसी किसी शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराने का भी निर्देश दिया है.

हम स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं. किसी भी व्यक्ति को सामाजिक समरसता बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी. अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे. हमने पहले ही सभी पार्टियों और नेताओं से चुनावी आचार संहिता का पालने करने का निर्देश जारी कर दिया है.

First published: 20 March 2016, 9:58 IST
 
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