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नौसेना में पत्नियों की अदला-बदली: पीड़िता ने बताई अपनी त्रासदी

सुहास मुंशी | Updated on: 23 May 2016, 8:09 IST
(कैच)

मीनाक्षी (बदला हुआ नाम) को हर दम खौफ रहता है कि उनकी हत्या की जा सकती है. इस इंटरव्यू के दौरान भी उन्होंने दावा किया कि उनपर हर दम नजर रखी जाती है.

उन्होंने भारतीय नौसेना का ऊपर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. मीनाक्षी ने अपने पति और उनके सहकर्मियों पर वाइफ स्वैपिंग (पत्नियों की अदला बदली) का आरोप लगाया है. ये मामला अभी अदालत में विचाराधीन है.

उन्होंने कैच से कहा कि जब से उन्होंने अपने पति और उनके साथियों के खिलाफ अदालत में मामला दर्ज कराया है तब उन्हें लगातार धमकी दी जाती रही है.

नौसेना: पत्नियों की अदला-बदली की जांच अब एसआईटी के हाथ

 मीनाक्षी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की थी. उन्होंने उच्चतम अदालत से मामले को केरल की अदालत से दिल्ली में स्थानांतरित करने और मामले की जांच पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने की मांग की है. हालांकि 12 मई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोनों मांगें खारिज कर दीं.

पूरे मामले पर मीनाक्षी ने कैच से विस्तृत बातचीत की. पढ़ें बातचीत के चुनिंदा अंश-

आप जिस नौसेना अधिकारी पर आपको वाइफ स्वापिंग में शामिल होने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है उससे आपने प्रेम विवाह किया था? आप उनसे कैसे मिली थीं?

मैं उससे 2008 में मिली थी. मैं सेंट्रल लाइब्रेरी जाया करती थी. वो भी अपने दोस्तों के साथ वहां आता था. वहीं हमारी बातचीत शुरू हुई. वो देश की समस्याओं और लोगो में कम होते देशप्रेम की बातें किया करता था. उस समय में मुझे वो एक सच्चा आदर्शवादी नौजवान लगता था. कुछ महीनों बाद उसने मेरे सामने शादी का प्रस्ताव रखा. उसके बाद हमने एक मंदिर में शादी की.

आपको 'वाइफ स्वैपिंग पार्टी' के बारे में पहली बार कब और कैसे पता चला?

2012 की शुरुआत में मुझे इसके बारे में पहली बार पता चला. हम विशाखापट्टनम के नेवी बेस में रह रहे थे. एक दिन मेरी पति की गैर-मौजूदगी में तीन-चार अफ़सर मेरे घर आए. उन्होंने मुझे वाइफ स्वैपिंग पार्टी का निमंत्रण पत्र दिया. मैंने पहली बार ऐसी कोई चीज देखी-सुनी थी इसलिए मुझे लगा कि वो लोग मज़ाक कर रहे हैं. मैंने इसके बारे में अपने पति को बताया. उन्होंने कहा कि चिंता मत करो. उन्होंने कहा कि हमें इस पार्टी में जाने की जरूरत नहीं है.

उसके बाद वही अफ़सर दोबारा आए और एक और निमंत्रण पत्र दिया. इसके बाद मैंने अपने पति से साफ साफ जवाब मांगा. उन्होंने मुझे बताया कि नौसेना में ये होता रहता है. उन्होंने ये भी कहा कि चूंकि मेरे अड़ियल नजरिए को देखते हुए उन्हें मुझमें और नौसेना में से एक को चुनना होगा. उन्होंने कहा कि एक बार उनका सिविल सेवा सेलेक्शन हो जाए फिर वो नौसेना छोड़ देंगे और फिर कभी नहीं लौटेंगे.

'जब मेरा पति घर पर नहीं था तब नौसेना के कुछ अफसर मेरे घर पर वाइफ स्वैपिंग पार्टी का निमंत्रण पत्र लेकर आए'

आपने अपनी याचिका में कहा है कि इस दौरान आपको घनघोर मानसिक पीड़ा और यंत्रणा से गुजरना पड़ा था. आप ऐसी कोई घटना हमारे साथ शेयर करना चाहेंगी?

ऐसी कई घटनाएं हैं. मेरे पति ने मुझे एक कमरे में अपने साथियों के साथ बंद कर दिया. उन लोगों ने मेरे साथ जबरदस्ती की. (मामले अदालत में है इसलिए कैच उन अफसरों का नाम नहीं प्रकाशित कर सकता.) उन्होंने मुझे भद्दी-भद्दी गालियां दीं और मेरा सामूहिक बलात्कार करना चाहा. उसके बाद मुझे कोची नौसेना बेस में बंद करके रखा गया ताकि मैं पुलिस में शिकायत न दर्ज करा सकूं.

मैं किसी तरह से वहां से खुद को छुड़ाकर भागी. मैं एफआईआर दर्ज कराने पुलिस थाने गई तो उन्होंने मेरी शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया. उन्होंने मेरी शिकायत दर्ज करने के बजाय वहां नौसेना के अफ़सरों को बुला लिया. उन लोगों ने पुलिस से कहा कि मेरी मेरे पति से कभी शादी ही नहीं हुई थी. उन्होंने ये भी कहा कि मेरी दिमागी हालात ठीक नहीं और मुझे मनोचिकित्सक की जरूरत है. नौसेना के अफसर चाहते थे कि मुझे मानसिक अस्पताल भेज दिया जाए. मैं वहां किसी तरह से निकली और दिल्ली आ गई.

आप पर दो सवाल खड़े किए गए हैं. एक, नौसेना वाइफ स्वैपिंग पार्टी का निमंत्रण पत्र छपवाने की बेवकूफी क्यों करेगी? दो, आपके पति ने आप पर वित्तीय हेरफेर का आरोप लगाया है? आपका क्या कहना है?

पहले सवाल का जवाब ये है कि आज भी मेरे पास वो निमंत्रण पत्र हैं. नौसेना समेत कोई भी ये साबित कर दे कि ये निमंत्रण पत्र फर्जी हैं. नौसेना को जितनी छूट मिली हुई उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. उनके सामने ये निमंत्रण पत्र कुछ भी नहीं हैं.

कुछ लोग तो अपने फेसबुक ग्रुप और कुछ निजी वेबसाइट्स पर 'हसबैंड्स नाइट्स' की तस्वीरें डालते हैं. आप नौसेना के अफसरों को गैर लड़कियों के संग नाचते-झूमते देख सकते हैं. आप इन तस्वीरों में नौसेना के कंट्रोल रूम के अंदर महिलाओं को देख सकते हैं, जबकि वहां किसी बाहरी व्यक्ति को जाने की इजाजत नहीं है. यहां तक कि शायद भारत के पीएम भी नहीं जा सकते. मेरे पास ऐसी सारी तस्वीरें हैं. जो चाहे उन्हें देख सकता है.

इन तस्वीरों से नौसेना के कई बड़े अफ़सर मुश्किल में पड़ सकते हैं. फिर भी वो बगैर डरे तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालते हैं.

मेरे पति ने बसंत विहार थाने में मेरे ऊपर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है. ये वही थाना है जहां मेरे संग मारपीट की गई. यूनिवर्सिटी के मेरे दोस्तों ने आकर मुझे बचाया था. मेरे पति ने आरोप लगाया था कि मैं उसके नाम पर क्रेडिट कार्ड लेना चाहती थी. जब मेरे ऊपर ये आरोप लगा तो मैंने बैंक मैनेजर से कहा कि वो उस दिन की सीसीटीवी फूटेज दिखाएं जिस दिन मैं बैंक में क्रेडिट कार्ड का आवेदन देने आई थी. बैंक मैनेजर ने पुलिस से कहा कि उनके पास उस दिन की सीसीटीवी फूटेज नहीं है!

सच ये है कि मैं उस दिन देहरादून एक प्रवेश परीक्षा देने गई थी (बस का टिकट दिखाती हैं). मेरे पास इसके सुबूत थे तो उनका आरोप धराशायी हो गया.

ऐसा नहीं है कि उन्होंने मेरे ऊपर यही एक मामला दर्ज कराया है. पूरे देश में नौसेना ने मेरे खिलाफ करीब 100 मामले दर्ज कराए हैं.

आपकी पति से हाल फिलहाल में बातचीत हुई है?

नहीं लेकिन मुझे पता चला कि उसने 2014 में किसी से शादी कर ली. नौसेना के दस्तावेज के अनुसान मैं उसकी पत्नी थी ही नहीं तो वो शादी कर सकता था.

नौसेना की जांच कमेटी में वो अफसर थे जो मेरे पति के जूनियर हैं

आपने फिर तलाक लेने की कोशिश क्यों नहीं की?

मैं ऐसा नहीं करूंगी. ये मेरा निजी फैसला है.

नौसेना ने आपके आरोपों की जांच के लिए बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी का आदेश दिया था. आप उसकी जांच से संतुष्ट नहीं हैं?

बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी एक मजाक था. आपको पता है कि इस कमेटी के सदस्य कौन थे? वो एजुकेशन अफसर थे. उन्होंने टीचिंग के लिए भर्ती किया जाता है. उन्हें कानून की कोई जानकारी नहीं होती. वो ऐसे गंभीर मामले की जांच कैसे करते? और वो सब मेरे पति के जूनियर थे. वो कर ही क्या सकते थे?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने और सीबीआई से जांच कराने की आपकी अपील खारिज कर दी है. अब आगे क्या करेंगी?

मैं इस फैसले के खिलाफ एक बार फिर अदालत जाऊंगी. मैं अपने राज्य और केंद्र में हर किसी से संपर्क करूंगी. जब तक मुझे न्याय नहीं मिल जाता, मैं उन लोगों को चैन से नहीं बैठने दूंगी.

First published: 23 May 2016, 8:09 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

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