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डरावना सच: लातेहार में 'गोरक्षा' के कारण हुआ था दोहरा हत्याकांड

वरीशा सलीम | Updated on: 7 April 2016, 22:50 IST
QUICK PILL
  • पशु कारोबारी मजलूम अंसारी और उनके 12 साल के बेटे इम्तियाज खान की हत्या को 17 दिन हो चुके हैं. इन दोनों की हत्या झारखंड के लातेहार जिले के झाबर गांव में हुई थी.
  • स्थानीय पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. स्थानीय लोगों की माने तो आरोपियों में से एक अरुण साहू बजरंग दल से जुड़ा हुआ है.
  • कैच के पास पांच आरोपियों का बयान है जो उन्होंने पुलिस को दिया है. इस बयान में उन्होंने साफ माना है कि उनकी मंशा गोरक्षा थी. यह कहीं से भी पशुओं की लूट का मामला नहीं है, जैसा कि कुछ समाचार रिपोर्ट्स और पुलिस शुरुआत में बता रहे थे.

पशु कारोबारी मजलूम अंसारी और उनके 12 साल के बेटे इम्तियाज खान की हत्या को 17 दिन हो चुके हैं. इन दोनों की हत्या झारखंड के लातेहार जिले के झाबर गांव में हुई थी. 

स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने हत्या के 24 घंटों के भीतर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था. बाद में तीन अन्य आरोपियों ने आत्मसमर्पण कर दिया.

हालांकि झारखंड पुलिस और प्रशासन हत्या की मंशा को लेकर स्थिति साफ नहीं कर पाई थी. वह भी तब जब आरोपियों में से कुछ गौरक्षा कार्यकर्ता हैं और उनका पहले भी पशु कारोबारियों के साथ झगड़ा हो चुका है.

स्थानीय लोगों की माने तो आरोपियों में से एक अरुण साहू बजरंग दल से जुड़ा हुआ है. कैच के पास पुलिस द्वारा गिरफ्तार पांचो आरोपियों का बयान है जो उन्होंने पुलिस को दिया है. इस बयान में उन्होंने साफ माना है कि हत्या की मंशा गाय की रक्षा थी. यह कहीं से भी पशु धन की लूट का मामला नहीं है, जैसा कि कुछ समाचार रिपोर्ट्स में बताया गया.

मनोज कुमार साहू, मिथिलेश प्रसाद साहू, प्रमोद कुमार साहू, मनोज साव और अवधेश साऊ को पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया था. तीन अन्य आरोपियों अरुण साऊ, सहदेव साऊ और विशाल तिवारी ने बाद में अदालत में आत्ममपर्ण कर दिया.

Arun Sau.

पांचों गिरफ्तार आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया है. उनके बयान के मुताबिक हत्या का मास्टरमाइंड अरुण साऊ है जो कथित तौर पर बजरंग दल का कार्यकर्ता है.

दो आरोपियों ने बताया कि अरुण ने ही मजलूम और उसके बेटे इम्तियाज की गला घोंटकर हत्या की और फिर दोनों को फांसी लगाई थी. हत्या में गौरक्षा समूह के शामिल होने की बात को स्थापित करते हुए एक आरोपी मिथिलेश साव उर्फ बंटी ने बताया कि उसने जो कुछ भी किया, वह गौरक्षा समिति की तरफ से सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत किया गया.

यह बयान हत्या के पीछे की मंशा को साफ कर देता है.

स्वीकारोक्ति

कुछ निजी बातों को छोड़कर पांचों आरोपियों के पुलिस को दिए गए बयान एक हद तक समान हैं. उनके बयान के आधार पर 8 में से चार आरोपी अरुण साहू, मनोज साहू, प्रमोद साहू और सहदेव साहू हत्या में सक्रिय भूमिका में थे.

FIR Latehar.
पशु कारोबारी का पीछा करने के बाद यह लोग दो समूहों में बंट गए. चार लोग मजलूम और इम्तियाज को घटनास्थल पर ले गए और बाकी के 4 लोग बैलों को छुड़ाकर जंगल में ले गए. नीचे के बयानों से हम इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि 18 मार्च की सुबह क्या हुआ था.

मनोज साहू

  • 27 साल

  • झाबर गांव, बालूमाथ ब्लॉक, लातेहार

  • पेशा: कृषि. स्थानीय कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी में पार्ट टाइम अकाउंट कीपर का काम.

बयान

मेरी शादी बालूमाथ में हुई है और इसी वजह से मैं अरुण साहू के संपर्क में आया जो मेरी ही जाति का है. मैं उसे भैया बुलाता और हम अक्सर मिला करते थे. करीब छह महीनों पहले किसी कुरैशी ने बालूूूमाथ में उसे किसी घर के अंदर बंद कर पीटा था. हमारी बैठक में साहू ने कहा कि हमें बदला लेना चाहिए. फिर झाबर गांव से बालूमाथ पशुओं को ले जाने वाले कारोबारियों से बदला लेने के लिए टीम का गठन किया गया.

18 मार्च 2016 की सुबह अवधेश साहू ने सुबह करीब साढ़े तीन बजे मुझे मेरे मोबाइल पर फोन किया. उसने मुझे बताया कि उसने झाबर से पशुओं को बालूमाथ ले जाते हुए देखा है. मैंने उसे उनका पीछा करने का निर्देश दिया. फिर मैंने अरुण साऊ को फोन किया और उसे अवधेश की बात बताई. अरुण ने मुझे टीम के सभी लोगों को सूचित करने के लिए कहा. फिर मैंने मिथिलेश प्रसाद साहू, प्रमोद साहू और मनोज कुमार साहू को फोन किया. मैंने मनोज कुमार साहू को विशाल तिवारी को बताने को कहा.

Confession.

मैंने अरुण साहू को छात तलाब से उठाया और फिर हम मुख्य सड़क पर आ गए. हमें पहुंचने में करीब 15 मिनट का समय लगा. हमने सहदेव सोनी, विशाल तिवारी, मिथिलेश साहू, प्रमोद साहू, मनोज कुमार साहू और अवधेश साहू को वहां देखा. मिथिलेश, सहदेव सोनी के साथ आया था जो उसे रास्ते में मिला था.

अवधेष ने हम सभी को बताया कि पशुओं को ले जा रहे कारोबारी थोड़ी ही दूरी पर हैं. फिर हमने उनका पीछा किया और झाबर में देवी मंडप के पास उन्हें पकड़ लिया. उनके पास 8 बैल थे.

पकड़े जाने पर अरुण साहू ने मिथिलेश, अवधेश, विशाल और मनोज कुमार साहू को आठों जानवरों को जंगल ले जाने के लिए कहा. वह जानवरों को पश्चिम में जंगल की तरफ ले गए और फिर उन्हें पेड़ से बांध दिया.

पांच गिरफ्तार लोगों में से मनोज साहू और प्रमोद कुमार साहू ने अरुण साहू और सहदेव सोनी के साथ मिलकर दोनों को मार डाला. कुछ निजी विवरणों को छोड़कर मनोज साहू और प्रामोद का दिया गया बयान एक समान है. वारदात की जुबानी भी समान है. प्रमोद कुमार साहू के बयान में इसे देखा जा सकता है.

प्रमोद कुमार साऊ

  • 28 साल

  • झाबर निवासी, बालूमाथ ब्लॉक, लातेहार

  • पेशा: ग्रेजुएट लेकिन बेरोजगार. इसलिए खेतों में काम करना शुरू कर दिया.

बयान

अरुण साहू ने लड़के को गाड़ी पर बिठाया और फिर उसके हाथ बांध दिए. मुझे गाड़ी पर लड़के के पीछे बैठने के लिए कहा गया. मनोज साहू ने अपनी पैशन मोटरसाइकिल पर दूसरे कारोबारी को बिठाया और उसके भी हाथ बांध दिए. सहदेव सोनी को उसके पीछे बैठने के लिए कहा गया. 

फिर हम सभी कच्चा रोड होते हुए पकड़ी के रास्ते खपरैल बार पर रुके. फिर मैं, अरुण साहू, सहदेव और मनोज साहू ने दोनों कारोबारियों को डंडे से बुरी तरह पीटा. फिर अरुण साहू ने हमें इंतजार करने के लिए कहा. वह पास के गांव से जाकर रस्सी ले आया. उसने कहा कि यह लोग बालूमाथ के कुरैशियों को जानवर बेचते हैं. हमें इन्हें जिंदा नहीं छोड़ना चाहिए. मैं इनसे पुरानी दुश्मनी का बदला लूंगा.

इसके बाद अरुण साहू ने रस्सी निकाली और मजलूम अंसारी का गला घोंट दिया. उसने मजलूम को फिर पेड़ से टांग दिया. उसने हमें मोटरसाइकिल पर चढ़ने का आदेश दिया ताकि हम शरीर को ऊपर धकेल सकें. मैंने, सहदेव सोनी और मनोज साहू ने शरीर को ऊपर धकेलना शुरू किया.

इसके बाद अरुण ने शव को पेड़ से टांग दिया. ऐसा बताने की कोशिश की गई कि पशु कारोबारियों ने खुद ही आत्महत्या कर ली.

फिर अरुण साहू ने 12 साल के लड़के का रस्सी से गला घोंट दिया. फिर वह पेड़ पर चढ़ा और लड़के के शरीर को ऊपर खींचने लगा. उसने हम सभी को शरीर को ऊपर धकेलने का आदेश दिया. अरुण साहू ने रस्सी पेड़ से बांधी ताकि यह दिखाया जा सके कि कारोबारी ने खुद ही फांसी लगा ली. फिर मैं, अरुण, सहदेव और मनोज झाबर सड़क पर आए. बाकी चारों ने हमें बताया कि उन्होंने जानवरों को पेड़ से बांध दिया है.

मिथिलेश प्रसाद साहू उर्फ बंटी, अवधेश साहू और मनोज कुमार साहू हत्या के वक्त मौजूद नहीं थेे. यह बयान भी समान ही है.  

मिथिलेश 18 मार्च की शाम को मनोज साहू के साथ जानवरों को देखने आया. दो बैल तब भी पेड़ से बंधे थे जबकि छह जानवर रस्सी तोड़कर भाग गए थे.

मिथिलेश का बयान इस लिहाज से अहम है कि वह गौर रक्षा समिति का सदस्य है. उसने कहा कि जो कुछ भी हुआ उसकी जिम्मेदारी समिति ने उसे दी थी.

मिथिलेश प्रसाद साहू ऊर्फ बंटी

 

  • 22 साल

  • झाबर गांव, बालूमाथ ब्लॉक, लातेहार

  • पेशा: सीमेंट की दुकान 

बयान

करीब 5 महीने पहले अक्टूबर 2015 में झाबर गांव में कुछ लोगों की बैठक बुलाई गई. बैठक में मुझे गौरक्षा समिति की जिम्मेदारी दी गई. मुझे उन लोगों की निगरानी का काम सौंपा गया जो जानवरों की तस्करी करते हैं. इसी आदेश के आधार पर मैंने सब कुछ किया.

अगर यह सच है तो गौरक्षा की वजह से मजलूम और इम्तियाज की हत्या की गई. लूट कहीं से भी हत्या की वजह नहीं थी. क्योंकि जानवरों को पेड़ से बांध दिया गया न कि उन्हें कहीं  ले जाया गया. साथ ही आरोपी अच्छी पृष्ठभूमि से आते हैं. मसलन मनोज कुमार साहू बालूमान में अमेरिकन स्कूल का डायरेक्टर है जबकि यह स्कूल एक मुस्लिम व्यक्ति की जमीन पर चलती है.

अरुण साहू के साथ उनकी मुलाकात स्कूल में काम करने के दौरान हुई. मनोज कुमार साहू ने कहा कि बालूमाथ में ठहरने के दौरान मैं अरुण साहू से मिला. हम एक ही जाति के थे.

हालांकि साहू हत्या करने में शामिल चार लोगों में नहीं थे. उन्होंने इस बात को माना कि उन्हें उस दौरान डर लग रहा था.

कौन है अरुण साहू?

पांचों आरोपियों के बयान में अरुण साहू का नाम शामिल है. अपने बयान में मनोज साहू और प्रमोद साहू ने कहा कि अरुण ने ही पशु कारोबारियों को पेड़ से टांगा था. प्रमोद बताते हैं कि अरुण पेड़ पर चढ़ा और फिर उसने 12 साल के लड़के इम्तियाज के शरीर को गर्दन में रस्सी डालकर ऊपर खींचने की कोशिश की.

बालूमाथ के स्थानीय लोग बताते हैं कि साहू बालूमाथ ब्लॉक में बजरंग दल का प्रभारी है. एक स्थानीय व्यक्ति ने कैच से नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया, 'महावीर मंदिर के बाहर एक बोर्ड लगा हुआ था जिस पर बजरंग दल प्रखंड प्रमुख लिखा हुआ था लेकिन इस घटना के बाद उसे तुरंत हटा लिया गया.'

रिपोर्ट्स के मुताबिक मजलूम अंसारी के परिवार ने दावा किया है कि अरुण साहू ने फरवरी महीने में उनके परिवार को धमकाया था. सितंबर में अरुण ने एक वृद्ध व्यक्ति मौलवी गुजार कुरैशी के साथ मारपीट की थी और जबरन उनकी दाढ़ी काटने को मजबूर किया था.

बालूमाथ के अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि अरुण साहू के खिलाफ ऐसे मामलों की लंबी फेहरिस्त है.

क्या कहता है प्रशासन?

हत्या के पीछे मंशा साफ होने के बावजूद प्रशासन गौरक्षा की बात को नजरअंदाज कर रहा है. लातेहार के एसपी अनूप बिथारे ने कैच को बतया, 'हम सभी मामले की जांच करेंगे. हम इस हालत में कोई निर्णय नहीं ले सकते.' 

बिथारे ने अरुण साहू के बजरंग दल पर टिप्पणी करने से मना कर दिया. हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि पुलिस ने कभी भी हत्या के पीछे कारोबारी प्रतिस्पर्धा का लूट की बात की थी. उन्होंने कहा, 'पुलिस ने कभी यह नहीं कहा कि यह लूट या आपसी प्रतिस्पर्धा का मामला है. यह पूरी तरह से गलत है. उन्होंने कहा कि पुलिस जल्द ही इस मामले में आरोप पत्र दायर करेगी.'

First published: 7 April 2016, 22:50 IST
 
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