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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की संभावना के बीच पंजाब में पार्टियों की नए सिरे से गोलबंदी

राजीव खन्ना | Updated on: 28 July 2016, 8:08 IST
QUICK PILL
  • पंजाब के पानी को अन्य राज्यों के साथ साझा किए जाने के मामले में प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की संभावना के बीच पंजाब में सभी राजनीतिक दलों ने इस भावनात्मक मुद्दे के मुताबिक अपनी स्थिति तय करनी शुरू कर दी है.
  • शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अब पानी साझा किए जाने और सतलज यमुना लिंक नहर के निर्माण के खिलाफ अपने तेवर कड़े कर रहे हैं. 
  • इस नहर का निर्माण 1990 में ही रोका जा चुका है जब इसके चीफ इंजीनियर और सुपरिटेंडेंट इंजीनियर की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. पंजाब की राजनीति में यह मुद्दा काफी गरम रहा है.

पंजाब के पानी को अन्य राज्यों के साथ साझा किए जाने के मामले में प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की संभावना के बीच पंजाब में सभी राजनीतिक दलों ने इस भावनात्मक मुद्दे के मुताबिक अपनी स्थिति तय करनी शुरू कर दी है. पंजाब में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं.

शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अब पानी साझा किए जाने और सतलज यमुना लिंक नहर के निर्माण के खिलाफ अपनेे तेवर कड़े कर रहे हैं. हालांकि इस नहर का निर्माण 1990 में ही रोका जा चुका है जब इसके चीफ इंजीनियर और सुपरिटेंडेंट इंजीनियर की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. पंजाब की राजनीति में यह मुद्दा काफी गरम रहा है.

शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस इस मुद्दे को अपने शासनकाल के दौरान भुना भी चुकी हैं. अगर कांग्रेस प्रेसिडेंट कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2004 के दौरान द पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स बिल को खारिज कर मास्टर स्ट्रोक दिया तो पिछले विधानसभा चुनाव में अकाली दल के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब सतलज यमुना लिंक कनाल बिल 2016 को पास कर कांग्रेस पर बढ़त बनाई. इस बिल के तहत नहर के लिए अधिग्रहित जमीन उसके मूल मालिकों को लौटा दी गई.

अब आम आदमी पार्टी पंजाब की सियासत में दखल दे चुकी है और उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर प्रेसिडेंशियल रेफरेंस को वापस लेने की मांग की है. जब से केजरीवाल ने चुनावी बिगुल फूंका है तब से प्रकाश सिंह बादल सतलज यमुना लिंक नहर को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. वह लगातार बयान देकर यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस और आप पंजाब के हितों के साथ समझौता कर रही हैं. बादल लोगों से यह कह रहे हैं कि उनके रहते कभी भी सतलज यमुना लिंक नहर का निर्माण नहीं हो पाएगा.

पिछले कुछ दिनों के दौरान कांग्रेस ने इस मामलेे में अपने तेवर कड़़े कर लिए हैं. कांग्रेस ने कहा कि अगर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पंजाब के खिलाफ जाता है तो उसके सभी विधायक कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में इस्तीफा दे देंगे.

सिंह ने कहा, 'हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन हमारी जिम्मेदारी पंजाब के प्रति है. इसलिए हम अपने पानी को सुरक्षित करने के लिए विधायी और संवैधानिक रास्ता अख्तियार करेंगे.' उन्होंने कहा कि इससे न केवल मालवा का दस लाख एकड़ इलाके में सूखा पड़ जाएगा बल्कि लोगों को पीने का पानी मिलना भी मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि वह अपनी लोकसभा सीट से भी इस्तीफा दे देंगे.

कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में सतलज यमुना नहर परियोजना को मुद्दा बना रही है

सिंह ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में लोगों के बीच जाकर उनका समर्थन लेगी. उन्होंने कहा, '2017 में हमारी सरकार बनने पर हम 2004 की तरह संवैधानिक और कानूनी विकल्पों की मदद से पंजाब के पानी को सुरक्षित करेंगे. 2004 में हमने पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट पारित किया था.' 

अमरिंदर लगातार कहते रहे हैं कि बादल और देवी लाल ने सतलज यमुना लिंक नहर का निर्माण शुरू किया था न कि कांग्रेस ने.

अमरिंदर ने आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा, 'उनके कानूनी सहयोगी ने सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा के पक्ष में पैरवी की है और यह सब कुछ रिकॉर्ड में है.'

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुनील जाखड़ भी इस मामले को लेकर अकाली पर हमला बोल रहे हैं. उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट का फैसला कभी भी आ सकता है लेकिन बादल अपना राज धर्म निभाने में विफल रहे हैं. अगर फैसला प्रतिकूल आया तो संकट पैदा हो जाएगा. संभावित प्रभाव से बचने के उपाय किए जाने के बदले मुख्यमंत्री लोगोें को भड़का रहे हैं.'

अकाली ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के सतलज यमुना लिंक नहर के निर्माण के फैसले पर मुहर लगाकर अमरिंदर ने पंजाब में काले अध्याय की शुरुआत की है.

यहां तक कि यूनाइटेड अकाली दल ने मामले में आगे आकर कहा कि बादल को इस मामले में नाटक करने से बाज आना चाहिए. यूएडी के नेता गुरनाम सिंह सिद्धू ने कहा, 'हमने सांकेतिक तौर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए सतलज यमुना लिंक नहर में 500 किलो कीचड़ फेंका है.'

आप भी मैदान में

आप नेता एच एस फुल्का ने कहा कि अगर इंदिरा गांधी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्री को एक मेज पर बिठाकर पंजाब के पानी साझा किए जाने की योजना बना सकती हैं तो मोदी को भी यह काम करना चाहिए.

पार्टी के बड़े नेताओं की हस्ताक्षरित चिट्ठी में कहा गया है, 'हम सुप्रीम कोर्ट से प्रेसिडेंशियल रेफरेंस को वापस लिए जाने की मांग करते हैं. केंद्र और पंजाब में अकाली और बीजेपी के गठबंधन सरकार के अलावा हरियाणा और राजस्थान में भी बीजेपी की सरकार है. ऐसे में बीजेपी इस मामले को सुलझाने की बेहतर स्थिति में है. हम आपसे तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक साथ बिठाने की मांग करते हैं ताकि इस मसले को हमेशा के लिए सुलझाया जा सके.'

First published: 28 July 2016, 8:08 IST
 
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