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कभी हां, कभी ना: क्या है मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की कहानी

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 6:45 IST

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में एक साल से कम का समय बचा है, इस बीच प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला फिर से खुलने के कगार पर है.

बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में नई एफआईआर दर्ज करने की अपील की है. कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया है.

मायावती के वकील के अनुसार यह याचिका बसपा के ही पूर्व कार्यकर्ता कमलेश वर्मा ने दायर की है. नई याचिका का केंद्र सरकार ने विरोध किया है. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा है कि मायावती के खिलाफ नई एफआईआर की कोई जरूरत नहीं है, उन्हें पहले ही क्लीनचिट दी जा चुकी है. हालांकि कोर्ट ने कहा है कि नई याचिका की सुनवाई में कुछ भी गलत नहीं है.

मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला 13 साल पुराना है.

मायावती के खिलाफ मामला क्या है

अक्टूबर, 2003 में सीबीआई ने मायावती के खिलाफ केस दर्ज किया था. सीबीआई ने वर्ष 1995 से लेकर 2003 तक उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच कर एफआईआर दर्ज की थी. इस दौरान अलग-अलग समयों में मायावती विधायक, सांसद और यूपी की मुख्यमंत्री थीं. इस अवधि के दौरान कथित तौर पर मायावती की संपत्ति 1.12 करोड़ रुपये आंकी गई थी लेकिन उन्होंने 1997-98 और 2002-03 के बीच आयकर रिटर्न में यह 88.70 लाख रुपये दिखाई थी.

दर्ज एफआईआर के अनुसार मायावती के पास 1.38 करोड़ रुपये की संपत्ति है जबकि बैंकों में 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की रकम है. मायावती और उनके परिवार के पास 1.80 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है जिसका मालिकाना हक उनके पिता, भाई और भाभी के पास है. उनके बैंक खातों और एफडी में जमा रकम 2.39 करोड़ रुपये है.

ताज कॉरिडोर मामला

सितंबर, 2003 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ताज कॉरिडोर मामले में मायावती के खिलाफ जांच कर रही थी. ताज कॉरिडोर मामला उस आरोप से जुड़ा हुआ है जिसमें मायावती के अधीन उत्तर प्रदेश सरकार ने ताजमहल के आस पास के इलाकों को संवारने और पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 74 करोड़ रुपये खर्च किए जबकि ऐसी कोई परियोजना थी ही नहीं.

2007 में सीबीआई ने लखनऊ की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था. सीबीआई ने ताज कॉरिडोर मामले में मायावती और तीन अन्य लोगों पर 175 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया था.

दोनों केसों में क्या हुआ

2007 में यूपी के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने पर्याप्त सबूत के अभाव में मायावती के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में सीधे सुनवाई से इंकार कर दिया. आखिरकार यह केस 2012 में समाप्त हो गया.

सुप्रीम कोर्ट ने मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को खारिज करते हुए कहा कि उसने सीबीआई को केवल ताज कॉरिडोर मामले की जांच करने का आदेश दिया था ना कि आय से अधिक संपत्ति के मामले का.

इससे पहले मायावती इनकम टैक्स अपील ट्रिब्यूनल के समक्ष 2007 में पेश हो चुकी हैं. इस दौरान उन्होंने पार्टी की लोगों के तरफ से मिले नकदी और उपहारों को सामने रखा था. मायावती ने कहा कि यह सबकुछ पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसलिए दिया क्योंकि वे उन्हें बेहद प्यार करते हैं. ट्रिब्यूनल ने मायावती के पक्ष में फैसला दिया और यह माना कि 65 लाख रुपये की कीमत वाले तोहफे वाकई में उन्हें समर्थकों ने दिया था जो कर के दायरे में नहीं आता है.

अब आगे क्या

चूंकि अब सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई को तैयार हो चुका है इसलिए याचिकाकर्ता नए एफआईआर के लिए अपना तर्क पेश करने वाला है. उत्तर प्रदेश में सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट गई है. ऐसे में इस पूरे मामले में सियासत की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. वैसे भी केंद्र की बीजेपी और यूपी की समाजवादी सरकार इस मामले को आगे नहीं बढ़ा रही है. केंद्र सरकार कोर्ट में इसका विरोध कर चुकी है.

First published: 14 April 2016, 7:32 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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