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क्या चीनी सेना वाकई चमोली में घुस आई थी?

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा है. इसका रखा खर्च भारतीय सेना के मुकाबले तीन गुना है, आकार दो गुना और शस्त्रागार कई गुना बड़ा है. भारत के साथ चीन की सीमा रेखा की लंबाई 4,057 किलोमीटर है. जो दुनिया की सबसे बड़ी सीमा रेखा है.

इसीलिए जैसे ही चीनी सेना के भारतीय सीमा क्षेत्र में घुसने का पता लगता है भारतीय अधिकारी सतर्क हो जाते हैं. हाल ही में 19 जुलाई को चमोली, उत्तराखंड में भी यही हुआ. हालांकि यह घटना वैसी नहीं थी जैसी कि 2013 में ओल्डी, दौलत बेग में हुई थी, जब चीनी सेना की पलटन भारतीय सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर 30 किलोमीटर अंदर तक घुस आई थी और वहीं कैम्प कर रही थी.

इस कमजोर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर किसी प्रकार के निर्माण कार्य या दूसरी सेना की गतिविधियां भारतीय रक्षा और गृह मंत्रालय के लिए चेतावनी है, क्योंकि इसका मतलब दूसरी सेना द्वारा ताकत का प्रदर्शन करने से लेकर अंदरूनी हस्तक्षेप तक कुछ भी हो सकता है, जैसा दौलत बेग में हुआ था.

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कैच ने इस मामले में जब उत्तराखंड सरकार और सुरक्षा बलों से बात की तो उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में घूमते देखे गए. राज्य के मुख्यमंत्री इस संबंध में विचलित दिखे. एक संवाददाता सममेलन बुला कर मुख्यमंत्री रावत ने सीमा के भीतर चीनी सेना की मौजूदगी पर चिंता जताई.

हालांकि शाम होते-होते उन्होंने बयान बदल दिया और कहा कि कोई घुसपैठ नहीं हुई है, बस सीमा पर चीनी सैनिकों की संख्या में इजाफा हुआ है. उन्होंने कहा ‘परेशानी की कोई बात नहीं है, क्योंकि ये गतिविधियां चीनी सीमा में हुई.’

इस बीच, रावत की प्रेस काॅन्फ्रेंस के कुछ मिनट बाद ही भारत के गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने खबरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि यह घटना घुसपैठ की थी या नहीं.’ इसके लिए वे इस पर विस्तृत रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

सवाल उठता है कि वास्तव में 19 जुलाई को चमोली में हुआ क्या था?

भारत और चीन के बीच 4,057 किलोमीटर लंबी सीमा है. चूंकि इस बारे में अक्सर बिना किसी आधार के बात की जाती है, इसलिए चीनी सैनिकों द्वारा ज्यादातर पश्चिमी लद्दाख और पूर्वी क्षेत्रों- सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ और सीमा में अतिक्रमण की खबरें लगातार सुनने को मिलती रहती हैं.

सीमा का ‘मध्य क्षेत्र’ उत्तराखंड ज्यादातर शांत रहता है. परन्तु इस बार 19 जुलाई को चीनी सेना को इसी क्षेत्र के चमोली में बरहोती क्षेत्र में घुसपैठ करते देखा गया.

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दरअसल सीमा रेखा पर नियमित रूप से निरीक्षण करने वाली 19 सिविल अधिकारियों की टीम ने सीमा पर अंतिम सुरक्षा चौकी रिमखिम से आठ किलोमीटर अंदर, भारत की ओर हथियारों से लैस चीनी सेना को देखा था.

तो वहां निश्चित रूप से चीनी सेना ने घुसपैठ की थी?

भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान 19 जुलाई की घटना को घुसपैठ या अतिक्रमण नहीं मान रही है. गृह और रक्षा मंत्रालय सामान्यतः इन शब्दों का इस्तेमाल तब करते हैं, जब विदेशी सेना भारतीय सीमा में घुस कर तम्बू गाड़ कर रहने लगती है, जैसा कि दौलत बेग ओल्डी में हुआ था. इस घटना को सरकार ‘दखल’ मान रही है.

क्या चीनी और भारतीय सेना के बीच कोई मुकाबला हुआ था?

19 सदस्यीय दल के एक अधिकारी ने कहा, ‘नहीं कोई मुकाबला नहीं हुआ जैसे ही हमने एक दूसरे की ओर देखा वे अपने कैम्प में लौट गए और हम अपने आॅफिस आ गए. आम तौर पर जब तक सीमा पर चीन की ओर से किसी विशेष सैन्य गतिविधि की सूचना नहीं होती है तब तक भारत की तरपफ से हथियारबंद सैनिक सीमा के निरीक्षण के लिए नहीं भेजे जाते. 

19 जुलाई को भी निरीक्षण दल बकरवाल जाति के स्थानीय चरवाहों के साथ सीमा पर गया था, जिसमें मात्र दो सिविल अधिकारी थे. उन्होंने अचानक ही वहां चीनी सैनिकों को देख लिया.

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जैसे ही उन्होंने एक दूसरे की उपस्थिति भांप ली, चीनी सेना ने भारतीय अधिकारियों से पीछे हटने को कहा. अधिकारी तुरंत अपने जिला आॅफिस लौट आए और कुछ देर बाद ही चीनी सैनिक भी कथित तौर पर अपने कैम्प लौट गए और वहां कुछ भी अप्रिय नहीं हुआ.

इसके तुरंत बाद चमोली के स्थानीय अधिकारियों ने वहां तैनात आईटीबीपी के साथ मिल कर इस पर एक रिपोर्ट तैयार की और उसी दिन गृह मंत्रालय को भेज दी. इसका मतलब, वहां चीनी सेना की गतिविधि आकस्मिक रूप से पकड़ी गई.

तो क्या भारत इन इलाकों की लगातार निगरानी नहीं कर रहा?

हां, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के अनुसार ऐसा लगता है कि इस 19 सदस्यीय निगरानी दल को सीमा पर चीनी सेना की मौजूदगी की कोई जानकारी नहीं थी.

भारत और चीन दोनों नियंत्रण रेखा पर निगरानी रखते हंै लेकिन भारतीय दल इस मध्य क्षेत्र का दौरा साल में बस चार बार करता है तो चीनी हर महीने कम से कम एक बार तो यहां निगरानी के लिए आते ही 

बरहोती किस प्रकार का क्षेत्र है, जहां चीनी सेना मंडराते देखी गई?

यह क्षेत्र ‘असैन्य क्षेत्र’ या ‘विवादित क्षेत्र’ कहलाता है. यह अंतरराष्ट्रीय सीमा के काफी नजदीक है और दोनो ही तरफ से सेनाएं यहां आम तौर पर नहीं आती लेकिन दूसरे सीमा क्षेत्रों की तरह बरहोती पर कोई बाड़बंदी नहीं है और यहां चरवाहे अपनी भेड़ें चराते हए अक्सर सीमा पार चले जाते हैं. कोई भी पक्ष इस पर आपत्ति नहीं करता क्योंकि ये सुरक्षा बलों के ‘आंख और कान’ का काम करते हैं.

First published: 30 July 2016, 12:50 IST
 
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