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क्या कहती हैं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर ली गई मोदी की ये 5 तस्वीरें?

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

जब देश की ज्यादातर आबादी मंदी, गलत नीतियों, महंगाई और असहिष्णुता से त्राहिमाम कर रही है तब हमारे प्रधानमंत्री लोगों को खुशियां बेच रहे हैं. सरकार ने लोगों के लिए अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मकता का मिश्रण तैयार किया है. इस समय योग भारत में सालाना उत्सव है और दुनिया भर में भारत सरकार के लिए हेल्थ मार्केटिंग और प्रमोशन का जरिया है.

नरेंद्र मोदी इस समय कई मोर्चों पर निपटने के लिए योग को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि भी शामिल है. योग स्वास्थ्य के लिए सही है और यह सबसे पुरानी भारतीय परंपराओं में से एक है. जिस विचारधारा और राजनीति का प्रतिनिधित्व मोदी करते हैं, इस समय योग उसे अपील करती है. योग उन्हें फिट रखता है और हिंदुत्व ब्रिगेड भी इसके साथ खुश है.

पिछली बार राजपथ पर बड़ा आयोजन हुआ था और इस बार मोदी चंडीगढ़ पहुंच गए. यहां कुछ तस्वीरें हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार और कार्य की व्याख्या करते हैं.

1. गमछा

पिछले साल मोदी राजपथ पर गले में तिरंगे जैसा गमछा लपेट कर आए थे, लेकिन लोगों ने सोशल मीडिया पर इसका मजाक बना दिया. लोगों का कहना था कि उन्होंने गमछे को गलत तरीके से रखा था.

योग के दौरान गमछा ओढ़ने से बचना चाहिए, लेकिन यह निकले हुए पेट को अच्छी तरह छिपाता है. विशेष रूप से यह उनके लिए ज्यादा जरूरी है जो अब योग के ब्रांड अंबेडसर हैं. इसीलिए मोदी ने गमछे को नजरअंदाज नहीं किया.

इस बार उन्होंने गले में तीन रंगों वाला गमछा लपेटा, लेकिन यह पिछली बार की तरह नहीं था. इससे लोगों को आलोचना करने का मौका नहीं मिला.

2. योग गुरु बने मोदी

प्रधानमंत्री को आम लोगों के बीच योग करना था और उन्होंने ऐसा किया. मोदी अपने साथ योग कर रहे लोगों के ध्यान और आसन को देख रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें योग की बेहतर समझ है. उनका बरताव एक शिक्षक, विशेषज्ञ और योग सिखाने वाले की तरह था. वह लोगों के बीच घूम रहे थे जिससे योग कर रहे अन्य लोगों को परेशानी हो रही थी. यह देख चीन के टेराकोटा संग्रहालय की तस्वीर याद आ गई.

लोगों को मंत्रालयों, विभागों और अन्य जगहों पर योग करने के लिए कहा गया और उन्होंने ऐसा किया. इस आदेश से असहमत होने की गुंजाइश नहीं थी. स्कूल और कॉलेजों में भी ऐसा किया गया क्योंकि उन्हें योग करने का आदेश दिया गया था.

3. ज्यादा लचीले

पिछली साल की तुलना में मोदी इस साल योग करते हुए ज्यादा सहज और ज्यादा लचीले दिखे. उनके आसन पहले से ज्यादा बेहतर हुए हैं. राजपथ की तुलना में उनका इस बार योग करते हुए उनका शरीर बेहतर तरीके से मूव कर रहा था और कठिन आसनों में भी वे आराम से दिख रहे थे.

हालांकि, मोदी की स्वाभाविक बैचेनी दूर नहीं हुई. योग के दौरान उनकी एकाग्रता की कमी उस समय दिख गई जब वह इधर-उधर देख रहे थे.

4. 'आलोचना करिए, मुझे परवाह नहीं'

पिछले साल योग दिवस के अगले दिन द टेलीग्रॉफ के पहले पेज पर छपे योग करते हुए मोदी की तस्वीर बहुत पॉपुलर हुई थी. सोशल मीडिया में यह तस्वीर वायरल हो गई थी.

वसुंधरा राजे और ललित मोदी के मसले पर अखबार और उनके विरोधी मोदी की चुप्पी पर सवाल उठा रहे थे. हालांकि, इस बार भी मोदी ने इस आसन को नहीं छोड़ा और दोबारा इसे दोहराया. संदेश साफ है, 'आप हमला करते रहे, मैं परवाह नहीं करता. मैं यह कर रहा हूं क्योंकि मैं इस पर विश्वास करता हूं.'

5. राजनीतिक आसन

योग दिवस मनाना वास्तव में मोदी द्वारा एक राजनीतिक निर्णय है. पिछले साल यह इंडिया गेट के सामने राजपथ पर हुआ. इस बार पीएम ने अपने शो के लिए चंडीगढ़ का चयन किया. देश के दूसरे बड़े शहरों की तुलना चंडीगढ़ ज्यादा आधुनिक और विकसित है.

पंजाब और हरियाणा में बीजेपी सत्ता में है और चंडीगढ़ दोनों राज्यों की राजधानी है. मोदी इस शहर के माध्यम से दुनिया को विकसित भारत की तस्वीर दिखाने चाहते थे.दूसरी ओर पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. मोदी ने योग दिवस पर राज्य के मुख्यमंत्री, पार्टी के नेताओं और मंत्रियों की मौजूदगी में राजनीतिक संदेश दे दिया.

First published: 21 June 2016, 8:50 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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