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इलाहाबाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में मिशन 2017 पर नजर

पाणिनि आनंद | Updated on: 11 June 2016, 17:17 IST
(कैच न्यूज)

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक की सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. इलाहाबाद सजधज के तैयार है और इसी के साथ भाजपा अपने मिशन यूपी को सूबे के पश्चिम से पूरब की ओर ले जाती नज़र आ रही है. 12 और 13 जून को हो रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी अपनी औपचारिकताओं के अलावा मुख्यरूप से उत्तर प्रदेश के चुनावों के लिए पार्टी द्वारा शक्तिप्रदर्शन का एक मौका है.

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उत्तर प्रदेश में अगले कुछ महीनों में नई विधानसभा के लिए मतदान होना है. इसी के मद्देनज़र राजनीतिक दलों ने अपनी प्रचार और प्रसार की रणनीति को तेज़ी दे दी है. भाजपा इस चुनाव के लिए इस बार बहुत पहले से कमर कसकर मैदान में रहना चाहती है क्योंकि ये चुनाव पार्टी के लिए प्रतिष्ठा और वर्चस्व का प्रश्न बन गया है.

2017 का विधानसभा चुनाव ही पार्टी के लिए वर्ष 2019 के आम चुनावों का माहौल बनाएगा और पार्टी के लिए ज़मीन तैयार करेगा. इसीलिए पार्टी पूरे दमखम के साथ इस चुनाव में उतर रही है और उसके लिए प्रचार का काम शुरू कर चुकी है. इलाहाबाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का आयोजन इसी दिशा में एक अहम पड़ाव है.

इलाहाबाद हुआ भाजपामय

सिद्धांतों और सादगी की दुहाई देने वाली पार्टी अपने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. इलाहाबाद को भाजपामय कर दिया गया है. कांग्रेस के विलासी चरित्र का किस्सा सुनाने वाली पार्टी अपने अतिथियों के लिए शहर के सभी अहम होटल और विश्रामगृह बुक कर चुकी है. सैकड़ों वातानुकूलित कमरे अतिथियों के लिए आरक्षित हैं.

इलाहाबाद के सबसे पास बनारस है और इसीलिए जब इलाहाबाद में सारी ज़रूरत पूरी न हो सकी तो बड़े पैमाने पर बनारस के भी तमाम बड़े पांच सितारा और महंगे होटलों को अतिथियों के लिए आरक्षित करा लिया गया है.

पार्टी कार्यकारिणी के लिए विशेष पंडाल बनाया गया है. यहां वातानुकूलन का खास इंतज़ाम है. पानी, आंधी और धूप से बचने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पंडाल को तैयार किया गया है. 500 से ज़्यादा वातानुकूलित वाहनों का इंतज़ाम किया गया है जो अतिथियों के परिवहन में लगाए जाएंगे.

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इसके अलावा पार्टी के स्थानीय और क्षेत्रीय इकाइयों के नेताओं की ओर से बड़े पैमाने पर वाहनों, कार्यकर्ताओं आदि की व्यवस्था की गई है. सुरुचि भोज के लिए तरह-तरह के पकवानों को बनाने के लिए विशेष खानसामे बुलाए गए हैं.

केंद्र सरकार के एक दर्जन से ज़्यादा मंत्री पिछले कुछ दिनों में इलाहाबाद और आसपास के ज़िलों का दौरा कर चुके हैं. सरकार की कोशिश है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान इलाहाबाद में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को महारैली में तब्दील कर दिया जाए.पार्टी पांच लाख लोगों को रैली में लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसके लिए पार्टी के साथ साथ केंद्र सरकार और यहां तक कि संघ के कार्यकर्ताओं तक की मदद ली जा रही है.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी का एजेंडा

दरअसल, पार्टी कार्यकारिणी एक औपचारिकता है. पार्टी में अधिकतर निर्णय बहुत केंद्रित हो चुके हैं और इसमें मुख्यरूप से पार्टी नेतृत्व और प्रधानमंत्री के निर्णय ही मान्य रहते हैं. पार्टी में अपनी सांगठनिक प्रक्रिया से ज़्यादा नेतृत्व के प्रति विश्वसनीयता और उपयोगिता निर्णायक हो चुके हैं. ऐसे में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी कोई नई ऐतिहासिक चर्चा हो सकती है, इसकी गुंजाइश न के बराबर है. मूल रूप से पार्टी कार्यकारिणी प्रधानमंत्री के कामकाज और राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्णयों के इर्दगिर्द घूमती नज़र आएगी.

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यहां पार्टी दो दिन की चर्चा के दौरान जो प्रस्ताव पास कर सकती है उनमें दो प्रस्ताव प्रमुख हैं. पहला प्रस्ताव है सरकार के दो साल के कामकाज का ब्यौरा लेते हुए उसकी सफलता की प्रशंसा करना. इस प्रस्ताव के ज़रिए मोदी सरकार को एक सफल और ऐतिहासिक उपलब्धियों की सरकार घोषित किया जाएगा और प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना की जाएगी.

दूसरा प्रस्ताव विपक्षी दलों के 'विकास विरोधी और देश विरोधी' की कठोर निंदा और भर्त्सना का हो सकता है. इस प्रस्ताव के ज़रिए पार्टी अपने एजेंडे पर आगे बढ़ने और विपक्ष के विकास विरोधी और सरकार विरोधी रुख को आड़े हाथों लेने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएगी. पार्टी इस दो अहम प्रस्तावों के ज़रिए लोगों के बीच भी सरकार के प्रति एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश करेगी.

यूपी विधानसभा में कुल 41 विधायक

पार्टी के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी शक्ति प्रदर्शन का एक मौका है. इसीलिए पार्टी के तमाम कद्दावर नेता, केंद्रीय मंत्रियों और पदाधिकारियों को सूबे में पहले से ही जुटाया जा चुका है. पार्टी के पास प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सांसद हैं. हालांकि पार्टी विधानसभा में खासी कमज़ोर है और उसके पास 403 की विधानसभा में महज 41 विधायक हैं. ऐसे में पार्टी अपनी कमज़ोर उपस्थिति को मज़बूत और बड़ी मौजूदगी के ज़रिए पाटना चाहती है.

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उत्तर प्रदेश में भाजपा एक कमज़ोर पार्टी है. संगठन की हालत लचर है और राज्य की राजनीति में वो सपा और बसपा से कहीं पीछे खड़ी है. ऐसे में इस शक्ति प्रदर्शन के ज़रिए पार्टी अपने कद को बड़ा करके राज्य के मतदाताओं के सामने रखना चाहती है. एक कमज़ोर पार्टी के लिए मोदी और उनका मंत्रिपरिषद और तंत्र एक शक्तिशाली छवि बनाता है और इलाहाबाद में प्रधानमंत्री इस छवि को भुनाने का प्रयास करेंगे.

First published: 11 June 2016, 17:17 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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