Home » इंडिया » Fadnavis can derails Modi's pet bullet train projest
 

बुलेट ट्रेन को पटरी से उतार सकते हैं देवेंद्र फडनवीस

अश्विन अघोर | Updated on: 21 December 2015, 7:50 IST
QUICK PILL
  • नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल ही में 98,000 करोड़ रुपये की लागत से मुंबई-अहमदाबाद के बीच बनने वाले बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर जापान सरकार के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है.
  • महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने इस परियोजना के लिए बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में जमीन देने से मना कर दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना उनकी ही पार्टी के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस की वजह से धाराशायी हो सकती है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को पूरा करने के लिए मोदी सरकार ने हाल ही में जापान के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) के चेयरमैन हैं जिसने स्टेशन के निर्माण के लिए बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के पास जमीन देने से मना कर दिया है.

बुलेट ट्रेन परियोजना

98,000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2009 में हुई थी. पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने 2009-10 के रेल बजट में इस प्रोजेक्ट की वित्तीय व्यावहारिकता को समझने की दिशा में कदम बढ़ाया था.

शुरुआत में मुंबई होते हुए पुणे से अहमदाबाद के बीच 650 किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव था

प्रोजेक्ट की वित्तीय व्याहारिकता का पता लगाने की जिम्मेदारी राइट्स लिमिटेड, इटालफर और सिस्ट्रा को दी गई थी. हालांकि  कई बैठकों के के बाद अधिकारियों ने यह तय किया कि कॉरिडोर की शुरुआत मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) से होगी. 

मोदी ने पिछले साल 28 मई को इस परियोजना को मंजूरी दी. तब से लेकर कई दौर के सर्वेक्षण हो चुके हैं. इसके अलावा प्रोजेक्ट की वित्तीय व्यावहारिकता और लोकेशन का दौरा किया जा चुका है. पहले छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से भूमिगत रुट बनाने का प्रस्ताव था जिसे तत्काल बाद बदलकर बीकेसी कर दिया गया.

विपक्ष का विरोध

मुंबई में जगह की जबरदस्त कमी की वजह से जमीन की कीमत बेहद अधिक है. इसलिए जब रेलवे ने बीकेसी से जमीन मांगी तो हंगामा मच गया. इस इलाके में रहने के लिए खरीदी जाने वाली जमीन की कीमत 50,000 रुपये वर्गफीट तक है जबकि व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए ली जाने वाली जमीन की कीमत इससे भी अधिक है. 

मौजूदा भाव को देखते हुए बुलेट ट्रेन के लिए ली जाने वाली जमीन की कीमत खरबों रुपये होगी

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का पहले कोई विरोध करता उससे पहले ही एमएमआरडीए ने अपने पैर वापस खींच लिए. एमएमआरडीए ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपने हिस्से की जमीन देने से मना कर दिया.

बीकेसी के पास पड़ी जमीन एमएमआरडीए के राजस्व का बहुत बड़ा जरिया है. एमएमआरडीए के एक अधिकारी ने बताया, 'अगर हम अपनी जमीन दे देेते हैं तो विभाग के पास जारी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए राजस्व जुटाना मुश्किल हो जाएगा. इसके साथ ही भविष्य की सभी परियोजनाएं दांव पर लग जाएंगी.' 

अधिकारी ने यह बताया कि कैसे एममआरडीए ने उन कई परियोजनाओं को पूरा किया जिन्हें अमल में लाना स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी थी.

एमएमआरडीए को कई बार अपनी जमीन साझा करनी पड़ती है और उसे इसके बदले में स्थानीय निकायों और राज्य सरकार की तरफ से मुआवजा मिलता है. अधिकारी ने बताया, 'इस बार हम अपनी जमीन किसी को नहीं देने जा रहे हैं. अगर ऐसा जारी रहा तो हमारी हालत बदतर हो जाएगी.'

जनवरी में भी एमएमआरडीए ने जमीन देने से मना कर दिया था. तब रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने फडनवीस से मुलाकात कर उन्हें प्रोजेक्ट की वित्तीय व्यावहारिकता रिपोर्ट आने से पहले कोई फैसला नहीं करने के लिए समझाया था. फडनवीस उस वक्त सहमत हो गए थे और फिर सबने राहत की सांस ली थी.

हालांकि उनकी उम्मीद उस वक्त धूमिल हो गई जब फडनवीस ने हाल ही में प्रभु को पत्र लिखकर वित्तीय बाध्यताओं का हवाला देते हुए बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने से मना कर दिया.

फडनवीस के फैसले से मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को झटका लगेगा जिसे लेकर वह जापान के प्रधानमंत्री के साथ करार कर चुके हैं. रेलमंत्री को अब वैकल्पिक जमीन की तलाश करनी होगी जो कि अपने आप में एक दुरुह कार्य होगा. लेकिन राज्य सरकार ने रेल मंत्रालय को इस प्रोजेक्ट को कुर्ला और दादर से शुरू किए जाने का प्रस्ताव रखा है जहां उसके पास पर्याप्त जमीन है.

First published: 21 December 2015, 7:50 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी