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किसान आंदोलन: तीन घंटे की मीटिंग के बाद महाराष्ट्र सरकार का किसानों से सुलह का दावा

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 March 2018, 17:20 IST

महाराष्ट्र सरकार का दावा है कि उन्होंने मुंबई में विधानसभा का घेराव करे आयी किसानों से सुलह कर ली ही. सरकार का कहना है कि इसके बाद अब किसान अपने आंदोलन को वापस ले लेगी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किसानों और सरकार  के बीच लगभग तीन घंटे की मीटिंग के बाद सुलह का दावा किया गया है. हालांकि किसानों ने सरकार के सामने शर्त राखी कि उन्हें सरकार से लिखित आश्वासन चाहिए.

किसानों की मुख्य मांगों में कृषि ऋण, बिजली बिल, फसलों के लिए बेहतर मूल्य, किसानों के लिए पेंशन योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन और वन उत्पाद को नियंत्रित करने वाले कानूनों का उचित कार्यान्वयन है. 

ऋण माफ़ी पर सवाल 

पिछले साल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने 89 लाख किसानों के लिए 34,022 करोड़ रुपये की ऋण माफी योजना की घोषणा की थी. लेकिन सभी किसान इसके लिए पात्र नहीं थे. किसानों का आरोप है कि ऋण माफी के कार्यान्वयन बड़ी गड़बड़ियां हुई है. योजना के घोषित होने के छह महीने बाद भी लक्षित किसानों को आधे से कम छूट की बात कही गई है.

मौसम और खराब वर्षा ने फसलों को नष्ट कर दिया गया है. महाराष्ट्र के आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि अनाज, दाल और कपास की फसलों के उत्पादन में कमी के चलते वित्तीय वर्ष 2017-18 में नकारात्मक कृषि विकास 8.3 फीसदी पर रहेगा.

सूखा, अपर्याप्त मूल्य निर्धारण नीतियां और जल संकट ने राज्य में कृषि को प्रभावित किया है. अनाज, दाल, तिलहन और कपास का उत्पादन क्रमशः 4 प्रतिशत, 46 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 44 प्रतिशत घटने की उम्मीद है. पिछले साल के मुकाबले अनाज, दालों और तिलहन के क्षेत्र में क्रमशः 42 प्रतिशत, 6 प्रतिशत और 60 प्रतिशत की कमी आई है.

First published: 12 March 2018, 17:20 IST
 
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