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1 लाख करोड़ रुपये का बैड लोन है राहुल गांधी का किसान मांग पत्र

हर्षवर्धन त्रिपाठी | Updated on: 11 October 2016, 7:57 IST
(भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस )
QUICK PILL
  • देवरिया से दिल्ली की यात्रा के दौरान राहुल गांधी का पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश के किसानों पर ही रहा. उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार आई तो 10 दिनों में किसानों का सारा कर्ज माफ कर दिया जाएगा.
  • राहुल गांधी कहते हैं कि मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट्स का एक लाख करोड़ रुपये का कर्जा माफ किया है, तो फिर किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ किया जा सकता.

देवरिया से दिल्ली पहुंचे राहुल गांधी ने संसद मार्ग पर एक ऐसा शब्द बोल दिया कि जिस मकसद से राहुल गांधी और कांग्रेस ने पूरी खाट पर चर्चा किसान यात्रा निकाली थी वह मकसद ही खो गया. नरेंद्र मोदी पर सैनिकों के खून की दलाली के लिए राहुल गांधी की जमकर आलोचना हुई. यह ऐसा बयान था जिसकी आलोचना होनी ही थी. ये बयान पूरी तरह से राजनीतिक बयान है और इसका कोई बहुत सीधा असर नहीं पड़ने वाला है.

लेकिन, राहुल गांधी की बड़ी आलोचना जिस बात के लिए होनी चाहिए उसकी चर्चा शायद ही कहीं हो रही है. राहुल गांधी और कांग्रेस एक ऐसी जमीन तैयार कर रहे हैं जिससे देश की तेज तरक्की की राह में बड़ी रुकावट आ सकती है.

जब केंद्र सरकार सरकारी बैंकों के डूबते कर्ज पर पूर्व सीएजी विनोद राय की अगुवाई में बनी समिति से ये चाह रही है कि सरकारी बैंकों के डूबते कर्ज से बैंकों को बचाने की कोई राह निकाली जाए, ऐसे समय में राहुल गांधी ने सरकारी बैंकों को कम से कम 100,000 करोड़ रुपये के बैड लोन के जाल में डालने की जमीन तैयार कर दी है. और ये जमीन तैयार हो रही है राहुल गांधी कि किसान यात्रा में किसानों के मांग पत्र से.

देवरिया से दिल्ली की यात्रा के दौरान राहुल गांधी का पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश के किसानों पर ही रहा. वो लगभग हर सभा में ये बताते रहे कि केंद्र सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों के अरबों के कर्ज नहीं वसूल पा रही है. लेकिन, किसानों से कर्ज वसूली हर कीमत पर करना चाहती है.

10 दिन में किसानों का सारा कर्ज़ माफ़?

उन्होंने इस बात को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश के किसानों को भरोसा देने की कोशिश की, कि वो उनका कर्ज माफ कराएंगे. कमाल की बात तो ये है कि राहुल गांधी कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार आई तो 10 दिनों में किसानों का सारा कर्ज माफ कर दिया जाएगा.

क्या राहुल गांधी के इस बयान पर भरोसा किया जा सकता है? उत्तर प्रदेश में हर किसी को पता है कि इस तरह की किसान यात्रा और खाट पर चर्चा से मीडिया में भले ही कांग्रेस चर्चा में आ गई हो. लेकिन यह बात तय है कि अभी भी कांग्रेस उत्तर प्रदेश में चौथे स्थान की ही पार्टी है. हो सकता है कि उसमें थोड़ा सुधार हो जाए.

मान लेते हैं कि उत्तर प्रदेश में चमत्कार हो जाता है और सूबे में कांग्रेस की सरकार बन जाती है. तो क्या किसी राज्य की सरकार के पास इस तरह के वित्तीय अधिकार होते हैं कि वो किसानों के सरकारी बैंक से लिए कर्ज को माफ कर सके? इसका जवाब भी ना में ही है.

कुल मिलाकर राहुल गांधी या कांग्रेस के ऊपर निजी तौर पर किसानों को कर्ज माफ करने का सीधा कोई दबाव नहीं बनने वाला है. एक तो उत्तर प्रदेश का चुनावी नतीजा इस पर कोई असर नहीं डालेगा. दूसरा, केंद्र की सरकार के लिए चुनाव 2019 में ही होना है. लेकिन, राहुल गांधी और कांग्रेस ये सब जानते हुए भी उत्तर प्रदेश के किसानों को एक असंभव भरोसा दे रहे हैं. उनके इस कदम से सरकारी बैंकों की पहले से बिगड़ी सेहत के और बिगड़ने की जमीन भी तैयार हो रही है.

कहने के सिवाय कुछ नहीं है

हालांकि राहुल गांधी के पास कहने और दिखाने के लिए कुछ तो है. वे उत्तर प्रदेश के किसानों को 2008 आम बजट की याद दिलाते हैं. यही बजट था जिसमें तत्कालीन यूपीए की सरकार ने किसानों का 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया था.

लेकिन इस कर्जमाफी का दश की अर्धव्यवस्था पर जो उल्टा असर पड़ा उसे भी समझना होगा. उसके बाद बैंकों का एनपीए तेजी से बढ़ा था. इसी को आधार बनाकर राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के किसानों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं. या यूं समझिए कि खुद पर भरोसा दिलाने से ज्यादा नरेंद्र मोदी पर जनता का भरोसा खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं.

कॉरपोरेट पर निशाना

राहुल गांधी कहते हैं कि मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट्स का एक लाख करोड़ रुपये का कर्जा माफ किया है, तो फिर किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ किया जा सकता. देवरिया से दिल्ली की 26 दिन की यात्रा में राहुल गांधी नरेंद्र मोदी को कॉर्पोरेट समर्थक और कांग्रेस को किसान समर्थक बताने की कोशिश में किसानों को आसानी से कर्ज देने वाले सरकारी बैंकों की बैलेंसशीट पर एक बड़ी चोट की बुनियाद तैयार कर चुके हैं.

अभी तक किसानों से 75 लाख मांगपत्र कांग्रेस ने भरवाए हैं. कांग्रेस का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश के 2 करोड़ किसानों से कर्ज माफी का ये मांगपत्र भरवाया जाएगा. किसान मांगपत्र की एक प्रति किसान के पास और दूसरी कांग्रेस ने रखी है.

कांग्रेस की अगली तैयारी संसद सत्र में किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे को जोर शोर से उठाने की है. कुल मिलाकर राहुल गांधी और कांग्रेस की पूरी कोशिश यही होगी कि सरकार पर इस तरह से दबाव बनाया जाए कि या तो वो किसानों का कर्ज माफ करे और ये संदेश जाए कि कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करवाया. और अगर मोदी सरकार, किसानों का कर्जा माफ नहीं करती है, तो ये जमकर प्रचारित किया जाए कि मोदी सरकार किसान विरोधी है.

यह बात लगभग तय है कि नरेंद्र मोदी की सरकार इस राजनीतिक कर्ज माफी को स्वीकार नहीं करेगी. वो भी तब जब नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है.

कर्जमाफ़ी बहस में

बावजूद इसके, कर्जमाफी की एक जमीन तो राहुल गांधी ने तैयार कर ही दी है. जिसमें किसान कर्ज लेकर उसे माफ कराने की ही रणनीति पर काम करेगा. वैसे तो किसानों ने एक लाख रुपये से ज्यादा औसत कर्जा माफी का मांगपपत्र सौंपा है. लेकिन, अगर औसत 50,000 रुपये का भी एक किसान का कर्ज माना जाए और कांग्रेस 2 करोड़ किसानों से ऐसे मांगपत्र भरवाने में कामयाब हो जाती है, तो ये सीधे-सीधे 100,000 करोड़ रुपये के सरकारी बैंकों के एनपीए या बैड लोन की बुनियाद तैयार हो गई है.

पहले से ही एनपीए की वजह से खस्ताहाल सरकारी बैंकों पर ये बड़ी चोट होगी. राहुल गांधी की आलोचना खून की दलाली वाली बयान से ज्यादा इस किसान मांगपत्र के जरिए देश का आर्थिक स्थिति कमजोर करने के लिए होनी चाहिए.

इसे देखने का एक नजरिया यह भी है कि राहुल गांधी ने चतुराई से ऐसा राजनीतिक दांव चला है जिसमें उनके हाथ कुछ न होते हुए भी लोगों को अपने पक्ष में लामबंद करने में कामयाबी मिल सकती है. लोगों को दिखाने के लिए उनके पास 2008 का आम बजट है जिसमें उनकी सरकार ने किसानों का कर्ज माफ किया था. हालांकि इसके लिए उन्हें अभी चुनावों का इंतजार करना होगा.

First published: 11 October 2016, 7:57 IST
 
हर्षवर्धन त्रिपाठी @catchhindi

वरिष्ठ पत्रकार

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