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किसान मुक्ति मार्च: संसद कूच करेंगे 40,000 किसान, कहा- इस बार सोने नहीं आये

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 November 2018, 14:44 IST

देशभर के किसान आज किसान मुक्ति मार्च के साथ गुरुवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्र हुए और आज शुक्रवार को संसद की ओर बढ़ेंगे. यह विरोध प्रदर्शन पूरे भारत से 200 किसान समूहों के गठबंधन अखिल भारतीय किसान संघ समन्वय समिति द्वारा आयोजित किया जा रहा है. उनकी मांगों में कृषि संकट और लोकसभा में पेश किए गए दो बिलों, न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि और एमएस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए संसद का संयुक्त सत्र शामिल है.

पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के किसान मार्च के लिए दिल्ली आए हैं. दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठे हुए किसानों का कहना है कि अखिल भारतीय किसान संघ समन्वय समिति ने दावा किया कि यह किसानों का सबसे बड़ा प्रदर्शन है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार समिति से जुड़े एक निकाय के सदस्य विजू कृष्णन ने कहा, "हम शुक्रवार की सुबह संसद स्ट्रीट की ओर बढ़ने के लिए 35,000-40,000 लोगों की एक सभा की उम्मीद कर रहे हैं."

 

राष्ट्रीय राजधानी में किसानों का यह दूसरा बड़ा विरोध प्रदर्शन है. 2 अक्टूबर को सुरक्षाकर्मियों ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया था. क्योंकि इस दौरान सात पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.

पीटीआई के मुताबिक उत्तर प्रदेश के संबल जिले के एक गन्ना किसान करतार सिंह ने कहा, "हम यहां सोने के लिए नहीं आए हैं. किसानों ने केंद्र सरकार को याद दिलाने के लिए दिल्ली में कदम रखा है. सरकार ने अपने घोषणापत्र में किसानों की ऋण माफ़ी का वादा किया था लेकिन सत्ता में आने के साढ़े चार साल बाद भी उन्होंने वादा पूरा नहीं किया है''.

 

किसान समूहों की अगुवाई कर रहे कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अतुल अंजान ने कहा कि दिल्ली में पांच गुरुद्वारों ने किसानों को रात के लिए रहने की पेशकश की थी. उन्होंने कहा कि ज्यादातर किसान रात में रामलीला मैदान में तंबू में बिताना पसंद करते थे.

उत्तर प्रदेश के एक किसान नेता राकेश चौधरी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "राजनेता केवल मंदिर और मस्जिदों में रुचि रखते हैं. हमारे मंदिर हमारे पशुधन और हमारी फसलें हैं. गन्ना खेती का नया मौसम शुरू हो गया है और हमें अभी तक पिछली फसल की कीमतें नहीं मिल रही हैं."

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First published: 30 November 2018, 10:54 IST
 
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