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Farmers Protest: किसान संगठनों की चेतावनी- मांगे नहीं मानी तो 26 जनवरी को दिल्ली में होगी ट्रैक्टर परेड

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 January 2021, 16:09 IST

Farmers Protest : सरकार के साथ अगले दौर की वार्ता से पहले शनिवार को किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले दौर की बैठक में सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली की ओर एक ट्रैक्टर परेड निकालेंगे. इस बार ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में होंगे. वह राजपथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि होंगे. एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि उनकी प्रस्तावित परेड को 'किसान परेड' नाम दिया गया है और यह गणतंत्र दिवस परेड के बाद आयोजित की जाएगी.

सरकार और किसान संघों के बीच अगले दौर की वार्ता 4 जनवरी को होने वाली है. शुक्रवार को यूनियनों ने घोषणा की थी कि अगर बैठक गतिरोध को हल करने में विफल रही तो उन्हें कड़े कदम उठाने होंगे. स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा ''अगर 26 जनवरी तक हमारी बातें नहीं सुलझती तो दिल्ली के तमाम मोर्चों से किसान दिल्ली के अंदर घुसकर अपनी किसान गणतंत्र परेड करने के लिए मजबूर होंगे. उन्होंने कहा कि यह एक साफ झूठ है कि सरकार ने किसानों की 50 प्रतिशत मांगें मान ली हैं. उन्होंने कहा "हमें अभी तक कागज पर कुछ भी नहीं मिला है."


बुधवार को औपचारिक वार्ता के छठे दौर के बाद कहा गया था कि सरकार ने किसानों की 2 मांगों को मान लिया है. किसान नेता गुरनाम सिंह चोडुनी ने कहा "हमारी पिछली बैठक में हमने सरकार से एक सवाल किया था कि क्या आप एमएसपी पर 23 फसलें खरीदेंगे. उन्होंने इंकार कर दिया. फिर आप देश के लोगों को गलत जानकारी क्यों दे रहे हैं?" उन्होंने कहा कि हमारे आंदोलन के दौरान अब तक 50 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं.

ठंड का सामना करते हुए हजारों किसान इन तीन नए कानूनों के खिलाफ एक महीने से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इन किसानों में पंजाब और हरियाणा से अधिकतर हैं. सरकार का कहना है कि उन्होंने इन कानूनों को किसानों की मदद करने और अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रमुख कृषि सुधारों के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन विरोध करने वाले यूनियनों को डर है कि नए कानूनों ने उन्हें एमएसपी और मंडी प्रणालियों को कमजोर करके बड़े कॉर्पोरेटों की दया पर छोड़ दिया है.

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First published: 2 January 2021, 16:09 IST
 
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