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खोजी पत्रकारिता से बन रहा कार्रवाई का दबाव

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 8 June 2016, 19:43 IST
(कैच हिंदी)
1.3
अरब

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पनामा लीक में मशहूर शख्सियतों के विदेश में काला धन रखने का मामला सामने आया है. इसमें भारत के भी कई बड़े कारोबारी और शख्सियतों का नाम सामने आया है. हालांकि अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है.

ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोटिंर्ंग प्रोजेक्ट के आंकड़ों के मुताबिक यह बात साबित होती है कि मीडिया की सक्रियता से भ्रष्टाचार की दुनिया बदल रही है.

पनामा लीक में नेताओं, मशहूर शख्सियतों और कारोबारियों के नाम सामने आने के बाद बेहद हंगामा हुआ. लीक में सामने आए लोगों के विदेश बैंकों में खाते थे और इनमें से कुछ खातों में कथित तौर पर काले धन को जमा कर रखा गया है.

हालांकि अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. इसे लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. क्या इस तरह के वैश्विक जांच का कोई नतीजा भी निकलेगा? क्या यह समय की बर्बादी है? क्या मीडिया इस मामले में चुप रहने के लिए मजबूर कर दी गई है?

जवाब है नहीं. अगर आप द ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोटिंर्ंग प्रोेजेक्ट को देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि ऐसा नहीं है. यहां कुछ आंकड़ें हैं जिससे यह बात साबित होती है कि मीडिया की सक्रियता से भ्रष्टाचार की दुनिया बदल रही है.

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ओसीसीआरपी की रिपोर्ट के पांच सालों में दुनिया की एजेंसियों ने इतनी रकम की संपत्ति जब्त की.

ओसीसीआरपी इनवेस्टिगेटिव पत्रकारों का मंच है. इसमें 50 देशों 20 मीडिया संगठन शामिल है.

इस अवधि में केवल 50 लाख डॉलर की रकम ओसीसीआपी में निवेश की गई.

2,500

कंपनियों की संख्या है जिसे पिछले पांच सालों में एजेंसियों ने बंद कराया.

वैश्विक तौर  पर एजेंसियां 60 करोड़ डॉलर की संपत्ति रिकवर की गई है.

77

भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या है.

इसमें बोस्निया और हर्जेगोविना के पूर्व प्रेसिडेंट भी शामिल है.

इसके अलावा 10 सरकारी अधिकारियों ने इस्तीफा दिया या उन्हें बर्खास्त किया गया. इसमें कजाखस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री भी शामिल हैं.

इसके अतिरिक्त 20 नियमों में सरकार ने बदलाव किया.

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की चपत भ्रष्ट नेताओं ने रूसी मुद्रा को लगाई.

रूस की शेल कंपनियों ने यूरोपीय यूनियन बैंक को लातविया के जरिये पैसे भेजा.

रोचक तौर पर लातविया और मोलडोवा के एक बैंक का इस्तेमाल किया गया लेकिन पैसे स्थानांतरण के मामले में रूस के 19 बैंक शामिल थे.

ओसीसीआरपी की जांच के बाद रूसी पुलिस ने 21 बैंकों से 700 अरब रूबल के निकासी की जांच की. वहीं मोलोदोवा ने भी जांच की शुरुआत की और 19 ब्रिटिश कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई.

18

ओसीसीआरपी के मुताबिक मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स की संख्या है.

इनमें से अभी तक तीन अपराधियों को ही गिरफ्तार किया जा सका है.

दाउद  इब्राहिम कासकर का नाम भी इस सूची में शामिल है.

2

पत्रकारों के खिलाफ हुए उत्पीड़न के मामलों की संख्या है.

खदीजा इस्माइलोवा दिसंबरर 2014 के बाद से जेल में हैं. अजरबैजान के जेल में बंद इस्माइलोवा रेडियो लिबर्टी के लिए काम करती थीं.

स्लोवेनिया की अनुष्का डेलिक पर खुफिया दस्तावेजों को प्रकाशित करने का आरोप है. इसकी वजह से उन्हें तीन साल की सजा हुई. उन्होंने स्लोवेनिया की नियो नाजी समूह और स्लोवेनियम डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच के संबंधों का पर्दाफाश किया था.

अजरबैजान की जेल से खदीजा लिखती हैं, 'जीवन बेहद जटिल है. लेकिन कई बार हम भाग्यशाली होते हैं और हमें सही और गलत के बीच चुनने का मौका मिलता है. आप सच को चुनिए और हमारी मदद कीजिए.' यह साफ बताता है कि अभी मीडिया कइयों के लिए कितनी बड़ी उम्मीद बना हुआ है.

First published: 8 June 2016, 19:43 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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