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Birthday: जब मानेकशॉ ने इंदिरा गांधी से कहा- मैं हमेशा तैयार रहता हूं, 'स्वीटी'...

आदित्य साहू | Updated on: 3 April 2018, 13:56 IST

साल 1971, भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ चुकी थी. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी परेशान थीं. वह जल्दी-जल्दी तत्कालीन जनरल सैम मानेकशॉ के पास आईं. इंदिरा गांधी ने सैम बहादुर से पूछा कि क्या आप इस युद्ध के लिए तैयार हैं? तब सैम ने मुस्कुराकर उन्हें जवाब दिया- मैं हमेशा तैयार रहता हूं, 'स्वीटी'.

हम बात कर रहे हैं भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की. सैम मानेक्शा, एक ऐसा शख्स, जिनका नाम सुनते ही साल 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध जेहन में आ जाता है. उस समय मानेकशॉ भारतीय सेना के अध्यक्ष थे. उनकी अगुवाई में भारत ने सिर्फ 13 दिनों के भीतर पाकिस्तान को धूल चटा दी थी. जिसके बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ था. आज उनका जन्मदिन है. इस खास मौके पर हम बता रहे हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक किस्सों के बारे में.

सैम मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम होर्मूसजी मानेकशॉ और मां का नाम हीराबाई था. जन्म के बाद मां-बाप ने उनका नाम साइरस रखा था, लेकिन उनकी चाची ने सुना था कि जिन पारसियों का नाम साइरस होता है उन्हें जेल भेज दिया जाता है. इसलिए उन्होंने उनका नाम सैम रख दिया. सैम का पूरा नाम सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ था, लेकिन बाद में उन्हें सैम बहादुर के नाम से जाना जाने लगा.

उन्हें साल 1969 में भारतीय सेना का अध्यक्ष बनाया गया था. 1965 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था तब सैम बहादुर ने ही इंडियन आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के बीच कॉर्डीनेशन बनाकर पाकिस्तान को चारों खाने चित किया था. वह पहले ऐसे आर्मी मैन हैं जिन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि से नवाजा गया था.

सैम मानेकशॉ एकमात्र ऐसे सेनाधिकारी थे, जिन्हें सेवानिवृत्ति से पहले ही पांच सितारा रैंक तक पदोन्नति दी गई थी. मानेकशॉ के देशप्रेम व देश के प्रति निस्वार्थ सेवा के चलते उन्हें वर्ष 1972 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से नवाज़ा गया. इसके अलावा जनवरी, 1973 में उन्हें फील्ड मार्शल का पद दिया गया, और इसी माह वह सेवानिवृत्त हो गए.

इंदिरा के साथ थे हंसी-मजाक वाले रिश्ते

इंदिरा गांधी के साथ उनकी बेतकल्लुफ़ी के कई किस्से मशहूर हैं. मानेकशॉ जैसा शख्स ही इंदिरा को स्वीटी कहने का माद्दा रख सकता है. मेजर जनरल वीके सिंह बताते हैं, "एक बार इंदिरा गांधी जब विदेश यात्रा से लौटीं तो मानेकशॉ उन्हें रिसीव करने पालम हवाई अड्डे गए. इंदिरा गांधी को देखते ही उन्होंने कहा कि आपका हेयर स्टाइल ज़बरदस्त लग रहा है. इस पर इंदिरा गांधी मुस्कराईं और बोलीं, और किसी ने तो इसे नोटिस ही नहीं किया."

1971 की लड़ाई में इंदिरा गांधी चाहती थीं कि वह मार्च में ही पाकिस्तान पर चढ़ाई कर दें लेकिन सैम ने ऐसा करने से इनकार कर दिया क्योंकि भारतीय सेना हमले के लिए तैयार नहीं थी. इंदिरा गांधी इससे नाराज़ भी हुईं. मानेकशॉ ने पूछा कि आप युद्ध जीतना चाहती हैं या नहीं. उन्होंने कहा, हां. इस पर मानेकशॉ ने कहा, मुझे छह महीने का समय दीजिए. मैं गारंटी देता हूं कि जीत आपकी होगी.

First published: 3 April 2018, 13:48 IST
 
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