Home » इंडिया » Finally Rekha get a surname
 

एक्सक्लूजिव: ...और इस तरह से मिला रेखा को उनका जायज सरनेम

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 September 2016, 7:30 IST
(कैच न्यूज)
QUICK PILL
फिल्मी दुनिया में मिस्ट्री लेडी की छवि वाली सदाबहार शख्सियत अभिनेत्री रेखा पर यासिर उस्मान की लिखी किताब के एक्सक्लूजिव अंश यहां हम अपने पाठकों के सामने रख रहे हैं. रेखा की छवि के मुताबिक ही किताब का नाम है \'रेखा: कैसी पहेली जिंदगानी\'.

1990 का आगाज ही हुआ था कि मुंबई में एक शाम रेखा के घर फोन की घंटी बज उठी. फोन पर दिल्ली से बीना रमानी थीं. वो रेखा की बात उनके एक 'दीवाने फैन' से कराना चाहती थीं. बीना ने बताया कि ये दीवाना फैन दिल्ली का एक जाना-माना बिजनेसमैन है और बेहद अच्छा इंसान है, इसका नाम मुकेश अग्रवाल है. क्या मैं इसे तुम्हारा नंबर दे दूं? रेखा ने अपना नंबर देने से मना कर दिया, लेकिन खुद बीना से मुकेश का नंबर ले लिया.

उन लम्हों में शायद रेखा को जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि ये फोन कॉल उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल कर रख देगी. रेखा की जिंदगी की तरह ही मुकेश की जीवन की कहानी भी फिल्मी थी.

रेखा की ही तरह मुकेश को भी कभी एक सही हमसफर नहीं मिल सका था. उस वाकये को याद करते हुए रेखा ने बाद में एक इंटरव्यू में कहा, बीना रमानी ने मुझे मुकेश से मिलवाया था. शुरू में मुझे उसमें जरा भी दिलचस्पी नहीं थी. बीना के बार-बार कहने पर मैंने मुकेश को फोन किया.दोनों के बीच पहली बातचीत बेहद औपचारिक थी, लेकिन कहते है मुकेश पूरी तरह से रेखा की खूबसूरत आवाज का दीवाना हो गया था. वो फिल्म स्टार जिस पर लाखों लोग फिदा हैं, उस रेखा ने उसे फोन किया था, ये सोचकर ही मुकेश के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे.

वो बहुत अच्छा आदमी है

रेखा ने पहला कदम उठा लिया था. फोन कॉल्स का सिलसिला शुरू हो गया. दिल्ली में रेखा की दोस्त सुरिंदर कौर शुरुआत से ही इस रिश्ते की गवाह रही थी. पेशे से एयरहोस्टेस सुरिंदर रेखा की करीबी दोस्त थीं और चाहतीं थी कि रेखा का घर बस जाए. बीना रमानी और सुरिंदर अक्सर रेखा से कहते, 'वो बहुत अच्छा आदमी है... इस मौके को हाथ से जाने मत देना.'

आखिरकार जनवरी 1990 में रेखा और मुकेश की पहली मुलाकात मुंबई में हुई. फिल्म इंडस्ट्री के झूठे दिखावे और पाखंड से थक चुकी रेखा के लिए मुकेश हवा के ताजा झोंके की तरह था. उसकी सरलता और ईमानदारी में रेखा को एक सच्चाई का अहसास हुआ.

बीना रमानी और सुरिंदर अक्सर रेखा से कहते, 'वो बहुत अच्छा आदमी है... इस मौके को हाथ से जाने मत देना

मुकेश ने प्यार जताने की खूबसूरत कोशिश शुरू कर दी. उसने रेखा को दिल्ली आने के लिए भी मना लिया. उसने रेखा का दिल जीत लिया. दोनों के बीच एक अजीब बंधन था और एक दूसरे की तरफ आकर्षित होने की अपनी-अपनी वजह. मुकेश को रेखा की स्टार वाली छवि से प्यार था और रेखा अपने प्रति उसके दीवानेपन को पसंद करने लगी थी.

मुंबई में मुकेश की एक करीबी दोस्त थी- अभिनेत्री दीप्ति नवल. दोनों की मुलाकात 1981 में दिल्ली में एक पार्टी में हुई थी. तब से वो अच्छे दोस्त थे. दीप्ति ने बताया, 'जबसे मुकेश की रेखा से फोन पर बात हुई और फिर दिल्ली और मुंबई में मुलाकातें हुई थीं, तबसे मुकेश बस उसी का जिक्र करता रहता था. मुझे लगता है वो रेखा का दीवाना हो गया था.'

चार मार्च 1990, वो रविवार का दिन था. मुकेश और रेखा की मुलाकात हुए अभी एक महीना ही बीता था. मुकेश बेचैन था. दोपहर को वो सुरिंदर कौर के साथ मुंबई में रेखा के घर पहुंच गया. अचानक, बिना किसी भूमिका के, मुकेश ने रेखा के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया.

जब मुकेश मुंबई आया तो सुरिंदर ने मुझे हां कहने के लिए मजबूर कर दिया, उस दिन को याद करते हुए रेखा ने बाद में कहा- 'मुकेश की खुशी का ठिकाना नहीं था. वो फौरन बोला, अभी शादी कर लेते हैं! रेखा ने भी कुछ ही पल में हां बोल दी. दोनों के परिवार मुंबई में नहीं थे फिर भी दोनों ने फैसला किया कि शादी हर हाल में आज ही होगी. मानो डर हो कि कल तक किसी का इरादा न बदल जाए.'

मंदिर-मंदिर घूमे तब हुई शादी

शाम होते ही उसने अपनी मनपसंद लाल और सुनहरी गोल्डन कांजीवरम सिल्क साड़ी और खूबसूरत गहने पहने. मुकेश और सुरिंदर के साथ वो जुहू में किसी मंदिर की तलाश में निकल पड़ी. एक मंदिर मिला मगर उसमें पुजारी नहीं था. कुछ ही दूरी पर इस्कॉन मंदिर भी था, लेकिन वहां जबरदस्त भीड़ थी.

उस रात नियम तोड़े गए. रात 10.30 बजे जूहू के मुक्तेश्वर देवालय मंदिर में शादी के मंत्र पढ़े गए

इसी मंदिर के सामने एक और मंदिर नजर आया- मुक्तेश्वर देवालय मंदिर. रात के करीब 10 बज चुके थे. मंदिर का जूनियर पुजारी संजय बोदस मंदिर के पीछे बने छोटे से कमरे में सोने जा चुका था. मुकेश ने उसे जगाया और कहा कि वो फौरन शादी करना चाहता है. पुजारी संजय पसोपेश में था.

जैसे ही उसकी नजर रेखा पर पड़ी, उसकी नींद अचानक गायब हो गई. शाम की आरती के बाद मंदिर के खुलने पर पाबंदी थी और रात के समय किसी की शादी करवाने की भी मनाही थी, लेकिन उस रात नियम तोड़े गए. रात 10.30 बजे जूहू के मुक्तेश्वर देवालय मंदिर में शादी के मंत्र पढ़े गए. दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई. 37 साल के मुकेश और 36 साल की रेखा पति-पत्नी बन गए.

(यासिर उस्मान की 'रेखा: एन अनटोल्ड स्टोरी' के जल्द ही प्रकाशित होने वाले हिन्दी संस्करण 'रेखा: कैसी पहेली जिंदगानी' के प्रकाशक जगरनॉट बुक्स से अनुमति प्राप्त अंश)

First published: 6 September 2016, 7:30 IST
 
अगली कहानी