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Exclusive ऑडियो: 'कोई बचना नहीं चाहिए, घेरकर सबका काम तमाम कर दो'

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 3 November 2016, 13:54 IST
QUICK PILL
  • भोपाल सेंट्रल जेल से कथिततौर पर फ़रार सिमी कार्यकर्ताओं के एनकाउंटर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण ऑडियो क्लिप सामने आया है. 
  • यह क्लिप मध्य प्रदेश पुलिस कंट्रोल रूम में बैठे अफ़सर और सिमी कार्यकर्ताओं को घेरने वाली पुलिस टीम के बीच हुई बातचीत का है. 
  • इस क्लिप में कंट्रोल रूम से अफ़सर सिमी कार्यकर्ताओं को मारने का हुक्म देते हैं और ईंटखेड़ी में मौजूद टीम सभी को मार गिराती है. 

सिमी एनकाउंटर केस में मध्य प्रदेश पुलिस के ख़िलाफ़ नए सबूत सामने आए हैं. यह सबूत एक ऑडियो क्लिप है जिसमें एमपी पुलिस के आला अफ़सर कंट्रोल रूम से बैठकर ईंटखेड़ी में मौक़े पर मौजूद पुलिस टीम को फरार आरोपियों को मार गिराने का हुक्म दे रहे हैं.

अफ़सरों और ऑपरेशन में लगी टीम के बीच हुई बातचीत सुनने से यह साफ़ हो जाता है कि पुलिस का इरादा सिमी कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार करने या उनसे सरेंडर करवाने का था ही नहीं. क्या यह पूरी तरह से मध्य प्रदेश पुलिस की एकतरफा कार्रवाई है?

ऑडियो क्लिप की शुरुआत में पुलिस टीम सिमी कार्यकर्ताओं और इनके घरवालों को भद्दी गालियां देते हुए सुनाई देती है. फिर महज़ 10 मिनट में आठ लोग मार गिराए जाते हैं.  यह समय भी मुठभेड़ की सच्चाई पर सवाल खड़ा करती है. ऐसे तमाम उदाहरण हैं जब एक-दो आतंकियों से मुठभेड़ में पुलिस वालों को 24 घंटे से ज्यादा समय लग जाता है. जबकि इस मामले में महज दस मिनट के अंदर आठो फरार लोगों को पुलिस ने मार गिराया.

यह क्लिप मध्य प्रदेश पुलिस के पिछले सभी दावों पर सवालिया निशान लगते हुए साफ़ करती है कि उसका मकसद इन्हें मारना था ना कि उन्हें गिरफ्तार करना.

यह मध्य प्रदेश पुलिस का ऐसा एनकाउंटर है जिसमें कथिततौर पर आठ आतंकवादी महज़ 10 मिनट में मार गिराए गए. 

अभी तक मध्य प्रदेश पुलिस या सरकार ने सामने आए किसी भी सबूत (फोटो, वीडियो और ऑडियो) की प्रमाणिकता पर सवाल नहीं उठाए हैं. 

एनकाउंटर का हुक्म कंट्रोल रूम से

इस ऑडियो क्लिप में एक अफ़सर को यह कहते हुए साफ़ सुना जा सकता है, 'सबको निपटा दो. घेर के पूरा कर दो काम तमाम.' मतलब कि आला अफ़सर ने मौक़े पर मौजूद पुलिस टीम को सिमी कार्यकर्ताओं को मारने का हुक्म दिया.

यह क्लिप कहीं से भी नहीं बताती कि पुलिस टीम ने सिमी कार्यकर्ताओं से बात भी करने की कोशिश की. एक जगह कहा गया है, 'सिग्मा सेवन वन, चार पांच मर गए हैं. उनको गोली लग गई है.' कंट्रोल रूम को यह इत्तेला करने के बाद जवाब आता है, 'चलो शाबाश कोई दिक्कत नहीं है, हम लोग पहुंच रहे हैं.' फिर इसके बाद कहा जाता है, 'अब तीन बचे हैं.'

ज़िंदा बचा तो इलाज में ख़र्च होगा

एक जगह इनमें से किसी को ज़िंदा पकड़ने के सवाल पर ऑपरेशन टीम का एक सदस्य कहता है, 'बहुत अच्छा हुआ. इनका इलाज कराने में कितना ख़र्च होता.' तकरीबन नौ मिनट की इस ऑडियो क्लिप के आख़िर में कहा गया है, 'आठों मारे गए. (फिर सभी तालियां बजाते हैं, हंसते हैं) खेल ख़त्म.'

इसके बाद कंट्रोल रूम के अफ़सर और मौक़े पर मौजूद टीम एक-दूसरे को बधाई देती है, 'सर बधाई हो, वेल डन, वेरी गुड.'

फर्ज़ी ऑपरेशन?

मौक़े पर मौजूद पुलिस टीम को फर्ज़ी ऑपरेशन कहते हुए भी सुना जा सकता है. 7 मिनट 42 सेकेंड पर एक पुलिसवाला कहता है, 'सब पीछे हट जाओ...कुछ और फर्ज़ी ऑपरेशन कराना पड़े तो.'

सोमवार को एनकाउंटर के बाद मध्यप्रदेश पुलिस के डीजीपी योगेश चौधरी ने पत्रकारों से कहा था, 'यह पूरा ऑपरेशन एक घंटे में ख़त्म हुआ.' मगर ऑडियो क्लिप सुनने के बाद पता चलता है कि उनका दावा संदिग्ध है. इसमें एक घंटा नहीं बल्कि महज़ 9 से 10 मिनट लगे. 

पुलिस के दावे संदिग्ध

क्लिप में एक जगह पुलिसवाला कहता है कि वे (सिमी कार्यकर्ता) फ़ायरिंग कर रहे हैं. मगर इसके बाद ऐसा कोई मैसेज नहीं है कि कोई पुलिसवाला इस फायरिंग में ज़ख्मी हुआ है. एक आकलन यह भी है कि पुलिस वाले चारो तरफ से घेरकर गोली बारी कर रहे थे लिहाजा जिस फायरिंग की बात हो रही है वह दूसरी तरफ मौजूद पुलिस वालों की तरफ से भी हो सकती है.

एटीएस चीफ़ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि आरोपियों के पास कोई भी हथियार नहीं था.

वहीं सोमवार को डीजीपी योगेश चौधरी ने दावा किया था कि ऑपरेशन टीम के तीन सदस्य इस मुठभेड़ में धारदार हथियार से ज़ख़्मी हुए हैं. अब यह विरोधाभासी बयान भी संदिग्ध नज़र आता है. 

ऑडियो की बातचीत से पता चलता है कि सभी फ़रार सिमी सदस्य चारों तरफ़ से घिरे हुए थे. उन्हें सरेंडर करवाया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं किया गया. टीम साफ़ कहती है, 'एक किलोमीटर का दायरा घेर के रखे हैं.'

(यह ऑडियो क्लिप कैच को कुछ विश्वसनीय स्रोत से प्राप्त हुए हैं. हालांकि इनकी सत्यता की पुष्टि कर पाना संभव नहीं है. पुलिस के तमाम अधिकारियों ने इस संबंध में बातचीत करने से इनकार कर दिया)

First published: 3 November 2016, 13:54 IST
 
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