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फिरंगीमहली: संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर फतवे से बचें मुस्लिम संस्थान

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2016, 15:54 IST

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य खालिद रशीद फिरंगीमहली ने सोमवार को एक बयान जारी कर दारुल उलूम देवबंद की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि दारूल उलूम जैसी संस्थाओं को संवेदनशील मुद्दों पर फतवा जारी करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसे फतवों से देश और समुदाय पर नकारात्मक असर हो सकता है.

फिरंगीमहली ‘भारत माता की जय’ के नारे वाले फतवे के मामले में अपनी राय दे रहे थे.

फिरंगीमहली ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, 'नारे लगाने के मुद्दे में राजनीतिक मकसद भी शामिल हैं. दोनों ही समुदायों की सांप्रदायिक शक्तियों ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उछाला और यदि कोई मौलाना ऐसे संवेदनशील और राजनीतिक मसले पर फतवा जारी करता है तो इससे सांप्रदायिक शक्तियों को उनका लक्ष्य हासिल करने में आसानी होगी. हम क्यों ऐसे निहित स्वार्थी तत्वों के हाथों की कठपुतली बनें.'

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक फिरंगीमहली ने कहा कि किसी मौलाना के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि वह उसके समक्ष उठाये गये हर मुद्दे पर फतवा जारी करे.

यदि मौलाना को लगता है कि किसी फतवे का देश और समुदाय पर नकारात्मक असर होगा तो उसे ऐसा करने से बचना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पहली बात तो यह है कि संविधान के मुताबिक देश के प्रति प्रेम प्रकट करने के लिए किसी तरह का नारा लगाने या नहीं लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है.

लेकिन मुस्लिमों ने आजादी की लडाई के दौरान ‘इंकलाब जिन्दाबाद’ और ‘जयहिन्द’ के नारे लगाये थे. यदि अनुवाद किया जाए तो ‘भारत माता की जय’ का मतलब भी वही है.जब हम यह नारा लगाते हैं तो यह किसी मूर्ति के लिए नहीं बल्कि ऐसा करते समय देश का नक्शा हमारे मन में आता है.

फिरंगीमहली ने कहा कि हिन्दुओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि बाबरी मस्जिद में राम लला की मूर्ति है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि मुसलमानों को अपना दावा छोड़ देना चाहिए. 'किसी भी मुद्दे पर नतीजे पर पहुंचने से पहले हम ऐतिहासिक तथ्यों और पृष्ठभूमि को देखेंगे'.

गौरतलब है कि एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने पिछले महीने कहा था कि यदि उनके गले पर चाकू रख दिया जाए तो भी वह ‘भारत माता की जय’ का नारा नहीं लगाएंगे, क्योंकि उनका मजहब इस बात की इजाजत नहीं देता है.

वहीं इस मामले में दारूल उलूम देवबंद ने पिछले हफ्ते एक फतवा जारी करके कहा था कि मुसलमानों  को ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाने से बचना चाहिए क्योंकि यह इस्लाम के खिलाफ है.

देवबंद के फतवे के मुताबिक ऐसा नारा तौहीद यानी एकरूप अल्लाह के खिलाफ है, वही अल्लाह जो इस्लाम के मूल में है.

इसके साथ ही देवबंद के मौलाना ने यह भी तर्क दिया कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को उनकी आस्था मानने की अनुमति देता है.

First published: 5 April 2016, 15:54 IST
 
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