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दाभोलकर हत्याकांड में 34 महीने में पहली गिरफ्तारी, जानिए कौन है वीरेंद्र तावड़े?

पार्थ एमएन | Updated on: 13 June 2016, 23:03 IST
(फाइल फोटो)

लगभग एक दशक पहले जब डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने सतारा में गणेश उत्सव के दौरान जल निकायों के प्रदूषण के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था तब एक आदमी ने उनका कड़ा विरोध किया था.

दाभोलकर और उनके सहयोगियों ने अपने संगठन एएनआईएस के माध्यम से नागरिकों को शिक्षित करने का फैसला किया और उनसे अनुरोध किया कि वे गणपति प्रतिमाओं को जल में विसर्जित करने की बजाय उनको दान कर दें. ऐसा करने से जल प्रदूषण से बचाव होगा.

लेकिन यह पहल एक पूर्व नाक-कान-गला विशेषज्ञ (ईएनटी सर्जन) के गले नहीं उतरी. उस सर्जन ने कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की और पुलिस में शिकायत भी दर्ज करा दी. करीब 10 साल बाद, वह सर्जन अब सीबीआई की हिरासत में है. उसे अगस्त 2013 में दाभोलकर की हत्या के सिलसिले में हिरासत में लिया गया है.

वीरेंद्र तावड़े को सीबीआई ने शुक्रवार 10 जून की रात को मुंबई के पास पनवेल से गिरफ्तार किया. उसे शनिवार को पुणे की सत्र अदालत में पेश किया गया और जून 16 तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया. दाभोलकर की 34 महीने पहले हुई हत्या के मामले में यह पहली गिरफ्तारी है.

संदिग्ध का प्रोफाइल

तावड़े हिन्दू जनजागृति समिति (एचजेएस) के पश्चिमी क्षेत्र प्रमुख है. एचजेएस सनातन संस्था से टूटकर बनी है. उससे 2 जून से उसके बेलापुर कार्यालय में सीबीआई द्वारा तब से पूछताछ की जा रही थी, जब उसके निवास पर पहली छापा मारा गया था.

दाभोलकर की 34 महीने पहले हुई हत्या के मामले में यह पहली गिरफ्तारी है

तावड़े महाराष्ट्र के तटीय कोंकण क्षेत्र के सिंधुदुर्ग जिले के एक अच्छे परिवार से आता है. उसने 1987 में मुंबई के जेजे अस्पताल में ग्रांट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कोर्स पूरा किया था. उसने सायन अस्पताल के मेडिकल कॉलेज से ईएनटी (कान-नाक-गला) में विशेषज्ञता भी हासिल की.

बाद में, उसने कोल्हापुर में प्रैक्टिस शुरू की, जहां वह क्लीन शेव और बड़े करीने से पहने कपड़ों में घूमा करता था. यह सब उसकी पहले की तस्वीरों में साफ नजर आता है.

हालांकि, 2001 में उसने एचजेएस ज्वाइन करने के लिए अपनी अच्छी-खासी प्रैक्टिस छोड़ दी थी. 2007 तक वह कोल्हापुर में रहा और अगले दो साल सतारा में, जहां उसने गोविंद पंसारे के कार्यक्रम का विरोध किया. पंसारे भी फरवरी 2015 में दाभोलकर की ही तरह मारे गए थे. इसके बाद तावड़े ने दो जिलों में दाभोलकर के कार्यक्रमों का भी विरोध किया.

तावड़े पिछले कुछ वर्षों से पनवेल में अपने परिवार के साथ एक सामान्य जीवन जी रहा था. वहीं छिपकर वह सनातन संस्था द्वारा 2007 में शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट दाभोलकर' पर काम कर रहा था. मुंबई मिरर ने सीबीआई सूत्रों के हवाले से उसे इस हत्याकांड के 'सरगना' में से एक बताया है. तावड़े का काम दाभोलकर के ठिकानों और आंदोलनों पर नजर रखने का था.

तावड़े की पत्नी बच्चों की चिकित्सक हैं और उसकी बेटी पनवेल में डीएवी स्कूल में पढ़ती है. लेकिन, दिलचस्प बात है कि अप्रैल के अंत में उसकी पत्नी और बेटी को एक लंबी छुट्टी पर लंदन भेज दिया गया था और वे अभी तक नहीं लौटे हैं.

सीबीआई ने पनवेल में उनके घर को सील कर दिया है जो सनातन आश्रम के पास ही स्थित है. सीबीआई ने संकेत दिया है कि यदि उसकी पत्नी और बेटी यहां आने पर जांच में सहयोग से इनकार करती हैं तो यह सील ही रहेगा.

एक जून को एक संवाददाता सम्मेलन में अधिवक्ता संजीव पुनालेकर ने दावा किया कि तावड़े याददाश्त खाेने की बीमारी से पीड़ित था, लेकिन सीबीआई ने इसका खंडन कर दिया.

अन्य आरोपियों से संबंध

तावड़े उस समय सुर्खियों में आया जब यह साबित हो गया कि वह इस मामले के मुख्य षड्यंत्रकारियों में शामिल एक आरोपी और 2009 में गोवा विस्फोट के षड्यंत्रकारी सारंग अकलोकर से लगातार ईमेल के जरिए संपर्क में था.

दाभोलकर, पंसारे और एमएम कलबुर्गी हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार और काम करने का ढंग एक जैसा प्रतीत होता है

अकोलकर मडगांव, गोवा में 2009 में हुए ब्लास्ट के बाद से चर्चा में रहा है. कथित तौर पर उसके द्वारा रचित गोवा आपरेशन उस समय बुरी तरह असफल हो गया जब विस्फोट के लिए सनातन संस्था के दो सदस्यों द्वारा ले जाए जा रहे बम में गलती से विस्फोट हो गया और वे दोनों मारे गए.

अकोलकर और तावड़े के बीच ई-मेल का आदान-प्रदान साजिश की ओर इशारा करते हैं. इसके अलावा, दाभोलकर हत्याकांड में संदिग्ध का स्केच अकोलकर के चेहरे के समान ही है.

सीबीआई ने यह भी कहा कि तावड़े एक काले रंग की होंडा बाइक का मालिक है. यह वैसी ही बाइक है जैसी दाभोलकर की हत्या में इस्तेमाल की गई थी. सनातन कार्यकर्ता समीर गायकवाड़ की गिरफ्तारी के बाद 2015 में पंसारे की हत्या मामले में एक अन्य संदिग्ध उभरकर सामने आया है जिसका नाम रूद्र पाटिल है और वह फरार है.

सनातन कनेक्शन

दाभोलकर, पंसारे और एमएम कलबुर्गी हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार और काम करने का ढंग एक जैसा प्रतीत होता है. सीबीआई यह संभावना तलाश रही है, जबकि पर्यवेक्षकों का कहना है कि सनातन संस्था के फरार सदस्यों को पकड़ना ही होगा, क्योंकि वे एक भूमिगत मॉड्यूल चला रहे हैं और उन्होंने हथियार चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया है.

दाभोलकर के बेटे और कार्यकर्ता हामिद ने कहा कि तावड़े की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता है क्योंकि यह फरार सनातन कार्यकर्ताओं की ओर भी इशारा कर रहा है.हामिद ने कहा कि अगर एनआईए मडगांव विस्फोट के मामले में ढिलाई से काम नहीं करती तो तकनीकी आधार पर पांच-छह आरोपी बरी नहीं होते और इन तर्कवादियों की हत्या नहीं हुई होती. उन्होंने कहा कि "मडगांव विस्फोट के बाद फरार आरोपी बार-बार सामने आते रहे हैं. यह एक खुला मामला था, लेकिन एनआईए ने कुछ नहीं किया."

First published: 13 June 2016, 23:03 IST
 
पार्थ एमएन @catchhindi

Parth is a special correspondent with the Los Angeles Times. He has a degree in mass communication and journalism from Journalism Mentor, Mumbai. Prior to journalism, Parth was a professional cricketer in Mumbai for 10 years.

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