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बिहार में पहला हाईप्रोफाइल अपहरण : क्या यह जंगलराज की वापसी है?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • चुनाव परिणाम आने के कुछ दिन बाद ही बिहार के मशहूर व्यवसायी हरिशंकर सिंह का अपहरण हो गया है. बिहार पुलिस के पास अभी तक उनकी कोई खोज-खबर नहीं है.
  • भाजपा इस वारदाद को बिहार में जंगल\r\nराज पार्ट-2 की\r\nशुरूआत के रूप में प्रचारित कर रही है. क्या वास्तव में चुनाव परिणाम आने\r\nके बाद बिहार में अपराधियों के हौसले बुलंद हुए हैं?

बिहार में अपहरण अन्य अपराधों की तुलना में खास मायने रखता है. 1990 के दशक में राज्य में अपहरण का धंधा संगठित अपराध के रूप में फलना-फूलना शुरू हुआ था. बिहारवासियों के जेहन में यह बुरी याद की तरह बसा हुआ है. उस दौरान अपहरण बिहार में उद्योग बन गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार, तकरीबन हर साल फिरौती के लिए 300 लोगों का अपहरण होता था.

इस दौरान राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बाद उनकी पत्नी राबड़ी देवी राज्य में सरकार चला रही थीं. इनके कार्यकाल को जंगलराज की संज्ञा दी गई थी. विडंबना यह है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता में वापसी इन्हीं लालू-राबड़ी की सहायता से की है. जबकि ऐसा माना जाता है 'जंगलराज' शब्द का पहली बार इस्तेमाल नीतीश कुमार ने ही किया था.

बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लगातार बिहारी मतदाताओं को जंगलराज का डर दिखाकर लाभ लेने की कोशिश की गई. अब नीतीश-लालू-कांग्रेस महागठबंधन से हारने के बाद बड़ी संख्या में एनडीए के समर्थकों ने कहना शुरू कर दिया है कि राज्य में जंगलराज की वापसी हो गई है.

सीवान के रहने वाले व्यवसायी हरिशंकर सिंह के अपहरण के बाद एनडीए समर्थकों को अपना आरोप सिद्ध करने का मौका हाथ लग गया है

मशहूर खाद व दवा व्यवसायी हरिशंकर सिंह का अपहरण 15 नवंबर को पंचरुखी से किया गया. वह हर दिन की तरह सुबह टहलने के लिए निकले थे.

अपहण की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने घटना के विरोध में नेशनल हाईवे-85 के साथ ही रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया. काफी देर तक रेल और सड़क मार्ग बाधित रहा.

इस घटना के बाद कथित रूप से नरम रवैया अपनाने के कारण स्थानीय थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है. बहरहाल चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस हरिशंकर सिंह का कोई सुराग ढूंढ नहीं पाई है. हालांकि, इस केस में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है.

बीजेपी ने किया नीतीश पर हमला

ऐसा नहीं है कि नीतीश के शासनकाल में बिहार में अपहरण की घटनाएं बंद हो गई थी. हालांकि, कानून-व्यवस्था में थोड़ा सुधार जरूर आया था. यही कारण है कि जब नीतीश और लालू ने हाथ मिलाया तो लोगों में निराशा फैलने की खबरें आई.

विधानसभा चुनाव में मिली अपमानजनक हार के बाद भाजपा अपने घाव को सहला सकती है. अब उसके पास नीतीश को बैकफुट पर धकेलने का एक मौका है

सीवान से बीजेपी सांसद ओमप्रकाश यादव ने कहा है कि यह घटना जंगल राज पार्ट-2 की शुरुआत है. उनका मानना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद अपराधी उत्साहित हैं.

राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कैच से कहा कि यह एक दुखद घटना है. राज्य सरकार दोषियों को दबोचने के लिए प्रतिबद्ध है चाहे वो कितने भी शक्तिशाली क्यों ना हो. जंगलराज पार्ट-2 शब्द पर आपत्ति जताते हुए झा ने कहा, 'क्या ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं अन्य राज्यों में नहीं घट रही है? सिर्फ बिहार के बारे में ऐसा कहना और हालिया विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली पार्टी को दोषी ठहराना, लोगों द्वारा दिए गए जनादेश का अपमान है.' उन्होंने दावा किया कि इस केस में त्वरित कार्रवाई की जाएगी.

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन गंभीरता से प्रयास करते हुए नजर आ रहा है. घटना के बाद सारण रेंज के डीआईजी अजीत कुमार और तिरहुत जोन के आईजी पारस नाथ सीवान में कैंप कर रहे हैं.

हालांकि, ईमानदारी का मात्र प्रदर्शन इस समय पर्याप्त नहीं हो सकता. सत्ता में राजद की वापसी के बाद बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर कई वर्गों में डर साफ झलक रहा है.

अभी ये आकलन करना गलत होगा कि अपहरण की यह घटना महागठबंधन को मिली जीत को बड़ा नुकसान पहुंचाने की स्थिति में है. प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बिहार में जंगलराज की वापसी नहीं होगी. इसके लिए उन्हें सारी ऊर्जा और संसाधनों का इस्तेमाल करना होगा.

First published: 20 November 2015, 7:59 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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