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मोदी सरकार के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा, 4 साल में आएगा पहला अविश्वास प्रस्ताव

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 March 2018, 10:51 IST

मोदी सरकार की पहली अग्निपरीक्षा का आज बड़ा दिन है. वाईएसआर कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कवायद में जुटी हुई हैं. दोनों दल अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार कराने और जरूरी 50 सांसदों का समर्थन जुटाने में लगे हैं.

वाईएसआर कांग्रेस के वाईवी सुब्बा रेड्डी ने सोमवार की कार्यवाही के संशोधित कार्यक्रम में अविश्वास प्रस्ताव के अपने नोटिस को शामिल किए जाने के लिए कहा है. इसके लिए रेड्डी ने लोकसभा सचिवालय को पत्र लिखा है. टीडीपी ने भी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे रखा है.

 

वहीं संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि इसके लिए अभी तक लोकसभा प्रशासन का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि सोमवार को भी अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर कोई फैसला होने की उम्मीद कम है. साल 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी दलों की गोलबंदी तेज हो गई है. मोदी सरकार को पटखनी देने के लिए लगभग सभी विपक्षी दल एकजुट होकर तीसरे मोर्चे की कवायद में जुटे हैं.

कैसे लाया जाएगा अविश्वास प्रस्ताव?
नियमों के मुताबिक, सबसे पहले लोकसभा स्पीकर किसी सांसद को अविश्वास प्रस्ताव पेश करने को कहेगा. जिसके बाद करीब 50 सांसदों को इसका समर्थन करने के लिए खड़ा होना होगा, तभी इसके आगे की प्रक्रिया शुरू होगी. लेकिन ये प्रस्ताव तभी पेश हो सकता है कि जब सदन ऑर्डर में हो, अगर कोई सांसद इस दौरान हंगामा कर देता है तो प्रस्ताव पेश करने में मुश्किल हो सकती है.

वाजपेयी सरकार के खिलाफ कांग्रेस लाई थी अविश्वास प्रस्ताव

गौरतलब है कि साल 2003 में कांग्रेस ने भी वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था. अगस्त 2003 में वाजपेयी सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर कांग्रेस प्रस्ताव लेकर आई थी. कांग्रेस का तर्क था कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय में जॉर्ज फर्नांडिस को फिर से शामिल किया था. उस समय वाजपेयी के समर्थन में वोट ज्यादा थे.

इसके बाद एनडीए ने बहुत ही आराम से विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हुई वोटों की गिनती में हरा दिया. एनडीए को 312 वोट मिले जबकि विपक्ष 186 वोटों पर सिमट गया था. जे जयललिता की एआईडीएमके और फारुक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने खुद को इस वोटिंग से अलग रखा था.

इसके अलावा आज भाजपा की धुर विरोधी बहुजन समाज पार्टी ने वाजपेयी सरकार के पक्ष में वोट दिया था. उस समय विपक्ष की नेता और कांग्रेस अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी ने सदन में चर्चा शुरू की थी. उन्होंने हिंदी में अपना भाषण दिया और वाजपेयी सरकार को कई मोर्चों पर अस्थिर बताया था.

चर्चा में जॉर्ज फर्नांडिस, लालकृष्ण आडवाणी, प्रियदर्शन दासमुंशी, मणिशंकर अय्यर सहित दूसरे नेताओं ने हिस्सा लिया था. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जॉर्ज का पक्ष लेते हुए उन्हें भारत का तब तक का सबसे अच्छा रक्षा मंत्री करार दिया था. वाजपेयी ने अपने जवाब में सोनिया गांधी को ताना मारते हुए कहा था कि चुनावी पारी के लिए मैदान में आइए.

First published: 19 March 2018, 10:53 IST
 
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