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मध्य प्रदेश ने बढ़ाया हाथ, उच्च शिक्षा के लिए खुद बांटेगी एजुकेशन लोन

शैलेंद्र तिवारी | Updated on: 17 September 2016, 7:17 IST

मध्य प्रदेश देश में संभवत: पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जो अब खुद एजुकेशन लोन भी बांटेगा. प्रदेश सरकार एक योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत प्रदेश के मेधावी बच्चों के लिए एजूकेशन लोन देने की तैयारी कर रही है. जो देश की बड़ी परीक्षाओं में पास होकर आईआईटी-आईआईएम या दूसरे ऐसे संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं, जिनमें मेरिट अनिवार्य है.

इस लोन की खासियत यह होगी कि इसके लिए कोई कागजी प्रक्रिया नहीं होगी और न ही कोई बैंक गारंटी. बस अभिभावकों को स्वघोषित प्रमाणपत्र देना होगा कि वह आयकर नहीं भरते (आयकर के दायरे में नहीं आते) हैं और मध्यप्रदेश के निवासी हैं. 

फीस के तौर पर दिया जाने वाला यह लोन बच्चों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के एक साल बाद से सरकार को अगले पांच साल में लौटाना होगा.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अफसरों को इस योजना को अमली जामा पहनाने का काम सौंप दिया है. संभव है कि जल्द ही इसे मूर्त रूप देकर अगले शिक्षा सत्र से शुरू कर दिया जाए.

इसके लिए साफ किया गया है कि लोन देने के लिए किसी भी तरह की शर्त या बैंक गारंटी जैसी चीजों का प्रावधान नहीं किया जाएगा. 

इस लोन के लिए सरकार ने हजार करोड़ रुपए का एक रिवॉल्विंग फंड बनाने की योजना बनाई है. इसमें कुछ हिस्सा सरकार देगी और कुछ बड़ी कंपनियों से सीएसआर के तहत लिया जाएगा.

इस फंड को मैनेज करने का जिम्मा सरकार के अंदर एक एजेंसी बनाकर उसे दिया जाएगा. वही एजेंसी आवेदनों पर लोन देगी और बाद में इसे वापस लाने की औपचारिकताओं पर काम करेगी. 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि हमने सभी जाति-वर्गों के लिए यह योजना बनाने की तैयारी की है. हमारी कोशिश है कि प्रदेश के टैलेंट को पैसे की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े.बैंकों की खानापूर्ति अक्सर लोगों को परेशान करती है.

ऐसे में ज्यादातर बच्चों को लोन मिल नहीं पाता है और कई दफा उन्हें खुद से समझौता करना पड़ता है. इसी को ध्यान में रखकर हम इस योजना को बना रहे हैं. कोशिश है कि अगले शैक्षणिक सत्र से इसे लागू कर दें.

मध्य प्रदेश देश में संभवत: पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जो अब खुद एजुकेशन लोन भी बांटेगा.

ऐसे सभी बच्चे पात्र होंगे जो देश स्तरीय प्रवेश परीक्षाओं की मेरिट में जगह पाते हैं और आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, नेशनल लॉ कॉलेज, प्रदेश के सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज समेत देश के तमाम प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लेते हैं.

सरकार जो सिस्टम विकसित करने जा रही है उसमें तय किया गया है कि देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों को पंजीकृत कर सूचीबद्ध किया जाएगा. यह वह संस्थान होंगे,जहां मेरिट के आधार पर ही चयन होता है. ऐसे में इन संस्थानों में चयन होने पर छात्र सरकार के पोर्टल पर अपने चयन होने की जानकारी देंगे. अपना पता और दूसरी जानकारियां अपडेट करेंगे. 

इसके साथ ही उनके अभिभावक का स्वघोषित घोषणापत्र भी देंगे कि वह आयकरदाता नहीं हैं.ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद सभी का ऑनलाइन वेरिफिकेशन करा लिया जाएगा और उसके बाद पैसा सीधे संस्थान के खाते में जमा होता रहेगा. इतना ही नहीं, इस पैसे की वापसी स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई पूरी करने के एक साल बाद से पांच साल के भीतर वापस करना होगा.

ब्याज पर फैसला नहीं

बच्चों को दिए जाने वाले इस एजूकेशन लोन पर ब्याज लिया जाएगा, या नहीं. इस पर अभी कोई सहमति नहीं बन पाई है. 

मुख्यमंत्री ब्याज लेने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अफसर इस रकम में मामूली ब्याज लगाने के पक्ष में हैं. उनका तर्क है कि इससे स्टूडेंट्स में लोन को वापस करने की गंभीरता रहेगी.

सरकार का मानना है कि एक बार हजार करोड़ का रिवॉल्विंग फंड बना लेने के बाद इसे पांच साल मैनेज करना है, उसके बाद स्टूडेंट्स से पैसे की वापसी शुरू हो जाएगी और उसी से यह खाता मैनेज होता रहेगा.

First published: 17 September 2016, 7:17 IST
 
शैलेंद्र तिवारी @catchhindi

लेखक पत्रिका मध्यप्रदेश के स्टेट ब्यूरो चीफ हैं.

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