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नोटबंदी का एक महीना: प्रधानमंत्रीजी कृपया ये 5 नोट भी निकालें

रंजन क्रास्टा | Updated on: 9 December 2016, 13:56 IST

मित्रों, भारतीय परिवारों की शुचिता पहले ही संकट में है. खुशकिस्मती से हमने एक मुश्किल को टाल दिया है. यह सुनिश्चित करके कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक बलात्कार (प्रेम) बिना शर्त होगा. समलैंगिकता इस राह की सबसे बड़ी चुनौती है.

फिलहाल इन विकृत यौन प्रवृत्तियों को विफल करने के लिए हमारे पास एक कानून (भारतीय दंड संहिता की धारा 377) है. 377 रुपए का नोट ऐसे व्यवहार को प्रतिबंधित करने में सहायक होगा. उसकी अहमियत को बढ़ा-चढ़ा कर नहीं कहा जा सकता, आखिर इन अनैतिक गतिविधियों में बढ़ोतरी से जनसंख्या की दौड़ में चीन से आगे निकलने की हमारी कोशिश विफल हो जाएगी.

प्राचीन काल से ही हमारे मुसलमान भाई नोटों के सीरियल नंबर में अपने पवित्र अंक '786' को बड़ी मेहनत से तलाशते और इकट्ठा करते रहे हैं. कम होने के कारण वे ऐसे नोटों को पूरे बाजार में तलाशते रहते हैं. इससे धन संचय की प्रवृत्ति को भी बढ़ावा मिलता है.

इन सब पर सर्जिकल स्ट्राइक महज 786 का नोट निकालने से हो सकता है. ना केवल इन नोटों की मार्केट में बाढ़ आएगी, जिससे काले धन और 786 वाले नोटों का संचय बंद होगा, बल्कि उनका आदान-प्रदान सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता का भी संदेश होगा. और ऐसे लोगो को कहने का मौका भी नहीं मिलेगा कि भाजपा मुसलमानों का ध्यान नहीं रखती.

खबर है कि हमारी सरकार वापस 1000 के नए नोट ला रही है. लगे हाथ 1008 का भी नोट छाप देना चाहिए. इससे सरकार का मुख्य वोटबैंक हिंदू भी खुश हो जाएगा. उसे यह आरोप लगाने का मौका भी नहीं मिलेगा कि सरकार मुसलमानों का तुष्टिकरण कर रही है. फिर सारी खुशकिस्मती मुसलमानों को ही क्यों मिले?

इस जादुई हिंदू नोट से हम ना केवल हिंदु वोटबैंक को सुनिश्चित करेंगे, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेंगे कि हिंदु मुसलमानों से ज्यादा हैं इसलिए हिंदुओं के नोट की कीमत भी ज्यादा होगी. इससे फायदे ही फायदे हैं.

भ्रष्टाचार हमारी महान भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है, कश्मीर की तरह. इसके उन्मूलन के लिए की गई नोटबंदी की कवायद भी फिलहाल विफल होती दिख रही है. तो यह बात तय रही कि यह हमसे फिलहाल तो जुदा होने वाला नहीं है.

भ्रष्टाचार भारतीय संस्कृति का आइकोनिक हिस्सा है, उसे गले लगाएं और शान से दुनिया को दिखाएं. 420 का नोट निकाल कर भ्रष्टाचार को वैध बनाएं और नियमित करें. 420 की मुद्रा का सबसे मुफीद चेहरा हमारे विजय माल्या ही हो सकते हैं. यह करके लोग आयकर विभाग की जांच से भी बच जाएंगे. इस नोट का उपयोग केवल चोरी-छिपे रिश्वत देने के लिए वालों के लिए होना चाहिए.

हमारे मौजूदा 2000 के नोट एख बदसूरत मजाक हैं. उनमें न तो कोई नया सुरक्षा फीचर है न ही उनका रंग टिकाऊ है. नोट का रंग उड़ने से हमारा वॉलेट खराब होता है सो अलग. जाहिर है, उन्हें हटाना चाहिए. 2000 के नोट की किसे जरूरत है? इससे बेहतर तो 2002 के नोट हैं. 2002 का साल क्या ही खूबसूरत साल था. उस साल रोनाल्डो की कप्तानी में ब्राजील ने वर्ल्ड कप जीता था! उसी साल केली क्लार्कसन ने रियलिटी शो अमेरिकन आइडल जीता. मार्स ओडिसी यान को मंगल ग्रह पर उसी साल पानी मिला था. यह वही साल है, जब पहली आइस एज मूवी रिलीज हुई थी! 2002 में ऐसा क्या नहीं है, जिसे आप ना चाहें.

First published: 9 December 2016, 13:56 IST
 
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