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Year Ender 2019: अयोध्या विवाद की पूरी कहानी, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 December 2019, 11:46 IST

Year Ender 2019: सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) ने अयोध्या मामले(Ayodhya Dispute) पर 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसला(Historic Verdict) देकर कई सालों से चले आ रहे विवाद पर पूर्णविराम लगा दिया. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित 2.7 एकड़ जमीन को रामजन्मभूमि न्यास(Ram JanmBhoomi Nyas) को सौंपने का फैसला किया. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा.

इसके अलावा कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन देने का फैसला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि न्यास का हक है. फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह देने का आदेश दिया.

राम मंदिर के लिए एक दलित को पुजारी बनाना चाहता है विश्व हिंदू परिषद

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि तीन महीने के अंदर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए. केंद्र सरकार मंदिर से जुड़े नियम बनाए और मंदिर निर्माण की कार्रवाई शुरू की जाए. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने पिछले काफी दशक से देश में चल रहे एक बड़े विवाद को खत्म कर दिया. हालांकि यह इतना आसान नहीं था. आप भी जानिए कहां से शुरू हुआ था अयोध्या विवाद-

1528 : मुगल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बकी ने अयोध्या में मस्जिद बनवाई. इसे बादशाह बाबर के नाम पर बाबरी मस्जिद का नाम दिया गया.

1853 : सबसे पहली बार हिंदुओं ने आंदोलन शुरू किया और आरोप लगाया कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाया गया. इसके बाद पहली बार देश में मंदिर के नाम पर हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़की.

1859 : ब्रिटिश सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए एक बाड़ खड़ी कर विवादित परिसर के अंदरूनी और बाहरी हिस्से में मुस्लिमों और हिंदुओं को अलग-अलग पूजा और इबादत की इजाजत दी थी.

1885: यह पहली बार था जब मंदिर-मस्जिद का मामला कोर्ट-कचेहरी में पहुंचा. अयोध्या के महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में मंदिर निर्माण की इजाजत के लिए अर्जी दाखिल की.

देश आजाद होने के बाद

23 दिसंबर 1949: लगभग 50 हिंदुओं ने कथित रूप से मस्जिद के अंदर भगवान राम की मूर्ति रख दी. मूर्ति की खबर फैलने के बाद हिंदू वहां नियमित रूप से पूजा-पाठ करने लगे. इसके साथ ही मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया.

16 जनवरी 1950: गोपाल सिंह विशारद ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष अनुमति मांगी.

5 दिसंबर 1950: निर्मोही अखाड़ा के महंत परमहंस रामचंद्र दास ने पूजा जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राम की मूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दायर किया. मस्जिद को विवादित ढांचा नाम दिया गया.

17 दिसंबर 1959: विवादित स्थल को निर्मोही अखाड़ा ने हिंदू पक्ष को सौंपने के लिए केस दायर किया.

18 दिसंबर 1961: उत्तर प्रदेश के सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए केस दायर किया.

1984: बाबरी मस्जिद का ताला खोलने और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद ने अभियान शुरू किया. इसके लिए विश्व हिंदू परिषद ने एक समिति बनाई.

1 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला जज ने इस दिन विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा करने की इजाजत दी. इसके बाद विवादित स्थल के ताले दोबारा खोले गए. जिससे नाराज होकर मुस्लिमों ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया. इसे केंद्र की राजीव सरकार के शाह बानो प्रकरण को बैलेंस करने के कदम के रूप में देखा गया.

जून 1989: विश्व हिंदू परिषद को औपचारिक समर्थन देते हुए पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर आंदोलन तेज कर दिया.

1 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान के नाम से पांचवां मुकदमा दाखिल हुआ.

9 नवंबर 1989: देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद के पास विश्व हिंदू परिषद को शिलान्यास की मंजूरी दी.

25 सितंबर 1990: तत्कालीन BJP अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा की शुरूआत की. 

नवंबर 1990: बिहार में मुख्यमंत्री लालू यादव ने लालकृष्ण आडवाणी के रथ को रोक दिया. बिहार पुलिस ने समस्तीपुर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने तत्कालीन केंद्र की वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

2 नवंबर 1990: पहली बार अयोध्‍या में विवादित ढांचे को कारसेवकों ने गिराने की कोशिश की. तब यूपी के तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए कार सेवकों पर फायरिंग करने का आदेश दिया. इस फायरिंग में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 16 लोग मारे गए थे.

अक्टूबर 1991: यूपी में तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार ने तब बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि अधिग्रहीत कर लिया था. 

कारसेवकों ने ढहा दी बाबरी मस्जिद

6 दिसंबर 1992: इस दिन हजारों कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद पर चढ़कर इसे ढहा दिया. बाबरी मस्जिद ढहने के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे होने शुरू हुए.

16 दिसंबर 1992: बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए जिम्मेदार हालातों की जांच के लिए लिब्रहान आयोग बनाया गया.

जनवरी 2002: देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अयोध्या विभाग शुरू किया. इस विभाग का काम काम विवाद सुलझाने के लिए हिंदू-मुसलमानों से बात करना था.

अप्रैल 2002: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के तीन जजों की पीठ ने विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू की.

मार्च-अगस्त 2003: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर अयोध्या में खुदाई शुरू की. एएसआई ने दावा किया कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं.

जुलाई 2009: 17 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट पेश की.

28 सितंबर 2010: विवादित मामले में फैसला देने से हाईकोर्ट को रोकने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की.

30 सितंबर 2010: यह वह दिन था जब इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अयोध्या मामले पर अपना फैसला सुनाया. फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा, एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को देने का फैसला दिया.

9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी, इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लग गया.

20 जुलाई 2016: बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का इस दिन निधन हुआ. वह साल 1949 से बाबरी मस्जिद की पैरवी कर रहे थे.

21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू और मुस्लिम पक्ष को बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर रास्ता नहीं निकलता है तो अदालत मध्यस्थता के लिए तैयार.

9 नवंबर 2019: सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए विवादित जमीन को रामजन्मभूमि न्यास को सौंप दिया, इससे राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया.

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First published: 24 December 2019, 11:10 IST
 
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