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बाढ़ः असम, बिहार, ओडिशा, चौतरफा जल प्रलय, 92 मौतें

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 August 2016, 15:15 IST
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भारत के पूर्व और पूर्वोत्तर इलाकों से आ रही खबरों और राहत बचाव दलों द्वारा भीतरी इलाकों से भेजी जा रही रिपोर्टों के बाद इन इलाकों में बाढ़ की विभीषिका की असली तस्वीर अब सामने आ रही है.

प्रारम्भिक अनुमानों के अनुसार, बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में 44 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और 51 की मृत्यु हो चुकी है. बहुत सी जगहों पर मुख्य राजमार्ग क्षतिग्रस्त हो गए या बह गए, इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को कई दिन से खाने व पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है.

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ब्रह्मपुत्र, कोसी, बेकी, जिनजीराम आदि नदियों में आई बाढ़ से ये हालात पैदा हुए हैं. शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने असम का हवाई सर्वेक्षण किया. दौरे के बाद सिंह ने कहा, वहां के हालात ‘भयावह’ हैं और गैर सरकारी संगठनों से अपील की कि इन इलाकों में बचाव एवं राहत कार्य चलाने में वे सरकार की मदद करें.

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एक संवाददाता सम्मेलन में राजनाथ ने कहा, 'मैंने असम के कुछ बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है. वहां की स्थिति चिंताजनक है लेकिन मुख्यमंत्री और उनकी टीम हालात पर काबू पाने की दिशा में अच्छा काम कर रही है. साथ ही उन्होंने आपदा का शिकार हुए प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की. हालांकि राजनाथ सिंह ने माना स्थिति अभी इतनी खराब नहीं है कि इसे ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित किया जाए.

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उन्होंने कहा बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करना मात्र ही इस समस्या का समाधान नहीं है. बाढ़ की ऐसी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए एक कार्य योजना बनाने की जरूरत है. हवाई दौरे के वक्त राजनाथ सिंह के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन दल के प्रमुख ओपी सिंह भी थे. यह बल असम और बिहार में बचाव और राहत कार्य चला रहा है.

उन्होंने कैच से कहा, ' शनिवार को बारिश में हुई मामूली कमी हमारी टीमों के लिए राहत लेकर आई. अब पानी उतर रहा है, जो कि हमारे लिए अच्छा संकेत है. असम के 22 जिलों में हमारी 17 टीमें जुटी हुई हैं. हमने करीब 1500 लोगों को मेडिकल सहायता उपलब्ध करवाई है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. जब तक हालात सुधर नहीं जाते रोजाना चौबीसों घंटे बचाव कार्य जारी रहेगा.'

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उन्होंने बताया कई जगहों पर चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं. एक दिन पहले ही एनडीआरएफ बल की टीमों ने जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए जोरहट के माजुली और धुबरी के रेवेन्यू सर्किल में चिकित्सा शिविर लगाए थे. एनडीआरफ के चिकित्सा दलों ने जोरहट में 293 और धुबरी में 252 मरीजों का इलाज किया.

असम में विकट हालात

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हालांकि शनिवार को बारिश कम हो गई थी, लेकिन अब भी बाढ़ के हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं. सभी नदियों में पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर हैं. राज्य के जल संसाधन मंत्री केशब मेहता के अनुसार जो नदियां उफान पर हैं, वे नई जगहों पर बाढ़ का कारण बन रही हैं. असम में इस साल 60 प्रतिशत से भी अधिक बारिश हुई है, जो कि सरकार के अनुसार अनपेक्षित है.

असम में बचाव और राहत कार्य में लगे एक पुलिस अधिकारी ने बताया असम के हालात ज्यादा खराब इसलिए हुए क्योंकि यहां भूटान की अए नदी से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है. एक तरफ हम यहां ब्रह्मपुत्र के पानी से निपटने में लगे हैं तो दूसरी ओर भूटान से आ रहे पानी ने राहत कर्मियों की मुसीबत बढ़ा दी है.

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नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा यह दुखद है हर साल असम में ऐसी ही बाढ़ आती है और इतने सालों में इससे निपटने के तरीकों में बदलाव नहीं किया गया. हालात से निपटने के बेहतर उपाय ढूंढने होंगे. दूसरी जगहों पर बाढ़ के दौरान लोग अपने घरों को छोड़ कर अस्थाई शिविरों में चले जाते हैं. असम में हमें पता है कि बरसात का मौसम कितना खराब रहता है. बार-बार हमारे घर और फसलें बर्बाद होती हैं. और हर बार हमें जीवन की शुरुआत नए सिरे से करनी पड़ती है.

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असम प्रदेश आपदा प्रबंधन अधिकरण के एक अधिकारी के अनुसार बाढ़ से प्रभावित एक लाख से अधिक लोग अब अस्थाई शिविरों में रह रहे हैं. बाढ़ का पानी 3,374 घरों में घुस आया और इससे 2,13,251 भूमि पर खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं.

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कुल मिला कर बाढ़ से असम के 22 जिलों के 3,300 गांवों के करीब 19 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. अब तक करीब 25 लोगों की मौत हो चुकी है. ये बाढ़ प्रभावित जिले हैं-लखीमपुर, गोलघाट, जोरहट, बोंगईगांव, धेमाजी, बारपेटा, गोलपाड़ा, धुबरी, दर्रांग, मोरीगांव, सोनितपुर, नालबाड़ी, शिवसागर, कोकराझार, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, बिस्वनाथ, कामरूप मेट्रोपाॅलिटन, चिरांग, नागांव, कामरूप और दक्षिणी कामरूप.

गुवाहाटी, जोरहट, तेजपुर, गोलपाड़ा और धुबरी में ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

बाढ़ प्रभावित लोगों को वहां से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. एनडीआरएफ, प्रदेश आपदा जवाबदेह बल और सेना मिल कर इस काम को अंजाम देने में जुटे हैं.

बड़े पैमाने पर नुकसान

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ओपी सिंह ने बताया बिहार में, एनडीआरएपफ की आठ टीमों ने गोपालगंज से 365 से अधिक लोगों को बाहर निकाला है. राज्य में 25 लाख लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने और 26 के मारे जाने की खबर है. इनमें से 15 लोग किशनगंज और पूर्णिया में मारे गए. अररिया, दरभंगा, मधेपुरा, भागलपुर, कटिहार, सहरसा, गोपालगंज और सुपौल में हालात लगातार खतरनाक बने हुए हैं. बाढ़ से 1.83 लाख हेक्टेयर इलाका प्रभावित हुआ है.

अरुणाचल प्रदेश में नमसाई और पूर्वी सियांग जिले भी बुरी तरह से बाढ़ से प्रभावित हैं. मेघालय में एक लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और हजारों लोग अस्थाई शिविरों में रह रहे हैं. हालांकि अभी यहां किसी की मौत की खबर नहीं है, लेकिन 23, 559 घरों के ढहने की खबर हैं.

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पश्चिमी गारो हिल्स के जिला मजिस्ट्रेट प्रवीण बख्शी के अनुसार बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है. उम्मीद है आने वाले दिनों में स्थितियां सुधर जाएंगी.

ब्रह्मपुत्र और जिनजीराम नदियों में पानी के तोज बहाव के चलते राज्य के 258 गांवों के 1.2 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. फुलबाड़ी, राजबाला, सिनगिमरी, पहम, भैतबाड़ी और हल्दियागंज कथित तौर पर पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं.

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ओडिशा में आकाशीय बिजली गिरने से 41 लोगों की मौत

ओडिशा के कई इलाकों में पिछले दो दिनों से भारी बारिश और बिगड़े मौसम में आकाशीय बिजली गिरने से कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई.

मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को भी ओडिशा में भारी बारिश हो सकती है. ओडिशा आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष ने कहा कि शनिवार से अभी तक इस राज्य के 10 जिलों में बिजली गिरने से 41 लोगों ने अपनी जानें गंवा दी.

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भद्रक जिले मे इस आकाशीय बिजली ने सबसे ज्यादा जाने ली हैं. यहाँ बिजली गिरने आठ लोगों की मौत हुई है. वहीं बालेश्वर जिले में साथ के मारे जाने की खबर है. खुरदा में पाँच और तीन की लोग मयूरभंज में मारे गए हैं. बाकी लोगों की मौत अन्य जिलों में हुई है.

इन मौतों पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने विशेष राहत आयुक्त को पीड़ितों के परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री ने बिजली गिरने से मरने वाले लोगों के परिवार वालों के 50-50 हजार रुपए की मदद का ऐलान किया है.

First published: 1 August 2016, 15:15 IST
 
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