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नोटबंदी और कैशलेस को सही क़दम साबित करने के लिए स्कूल-कॉलेजों का इस्तेमाल

प्रणेता झा | Updated on: 11 February 2017, 6:42 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • युवा हमारे देश का सबसे बड़ा मानव संसाधन हैं. देश की आधे से ज्यादा आबादी 25 साल या उससे कम उम्र के युवाओं की है और 65 प्रतिशत से अधिक 35 साल तक के युवा हैं.
  • केंद्र सरकार इनमें से स्कूल-कॉलेज जाने वाले युवाओं और बच्चों का इस्तेमाल नोटबंदी के फ़ायदे गिनाने और लोगों को कैशलेस बनाने के ट्रेनर के तौर पर इस्तेमाल करने जा रही है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय नोटबंदी की लड़ाई में ख़ुद को सही साबित करने के लिए देश के युवाओं के ‘इस्तेमाल’ की तैयारी कर रहा है. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने एक दिसम्बर को वित्तीय साक्षरता अभियान की शुरुआत की. इसके तहत सारे सरकारी या सरकार से फंड पाने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों को आम जनता को डिजिटल वित्तीय साक्षरता सिखाने वाले स्वयंसेवकों के तौर पर तैयार किया जाएगा.

युवाओं का इस्तेमाल कितना

अब चूंकि एमएचआरडी ने शिक्षा तंत्र को ही इस जंग का सिपाही बना डाला है तो केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित सारे संस्थानों को पूरी तरह कैशलेस होने का आदेश दे दिया गया है. मगर यहां सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि देश का केवल एक चौथाई युवा ही कॉलेज जाता है. 2014-15 में भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों में एनरोलमेंट प्रतिशत 23.6 प्रतिशत रहा. इसलिए जाहिर है एमएचआरडी सारे युवाओं को इस काम में नहीं लगा सकता.

एचआरडी की तर्ज़ पर ही युवा मामलों और खेल मंत्रालय भी अपने स्तर यह काम कर रहा है. भाजपा की युवा इकाई भाजयुमो हर राज्य में एक अलग अभियान ‘यूथ फॉर डिजिटल पैसा’ चलाए हुए है. वे वर्कशॉप आयोजित कर लोगों के बीच ‘डिजिटल जागरुकता’ लाने का काम कर रहे हैं.

अब बच गए स्कूली बच्चे. हो सकता है उन्हें इस अभियान में लगाए जाने पर एमएचआरडी मंत्रालय पर सवाल उठाए जाएं कि ये बच्चे हैं, इन्हें इस काम में कैसे लगाया जा सकता है? इसीलिए एहतियात बरतते हुए एमएचआरडी 9वीं और 11वीं कक्षा के छात्रों को इस अभियान से जोड़ रहा है. जावडेकर 10वीं और 12वीं के बच्चों को इस काम में नहीं लगा सकते क्योंकि उनकी बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं. 

बाकी का क्या?

हालांकि कैशलेस क्रांति से करोड़ों नागरिकों का नुकसान होना तय है क्योंकि देश की 80 से 93 फीसदी आबादी अनौपचारिक क्षेत्र में काम करती है, जहां सारा लेन-देन ही कैश में होता है. आंकड़ों की मानें तो देश की केवल 27 प्रतिशत आबादी ही इंटरनेट का इस्तेमाल करती है और 43 प्रतिशत बैंक अकाउंट बेकार पड़े हैं.

कैच ने विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों की पड़ताल कर जानकारी जुटाई है कि किस तरह इस कैशलेस क्रांति में युवाओं को शामिल करने की कोशिश की जा रही है. ऐसे पांच उपाय.

1. कैशलेस के प्रति जागरूकता फैलाने वाले महाविद्यालयी छात्रों को अकादमिक क्रेडिट मिलेगा

जावडेकर ने एक दिसम्बर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उच्च शिक्षा संस्थानों के युवाओं से अपील की कि वित्तीय साक्षरता अभियान में स्वयंसेवक के तौर पर जुड़ कर वे इस ‘बदलाव के एजेंट’ बनें. इन छात्रों को अपने आस-पड़ोस में और स्थानीय समुदायों के बीच कैशलेस ट्रांज़ैक्शन के तरीकों के बारे में जन जागरूकता फैलाने का जिम्मा सौंपा गया है. 

बाद में इन छात्रों को कहा गया कि उन्हें 12 दिसम्बर 2016 से 12 जनवरी 2017 के बीच अपने परिवार के अलावा 10 अन्य परिवारों को डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए साक्षर बनाना होगा.

साथ ही इन छात्रों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से जावडेकर ने कहा, कॉलेज के इन स्वयंसेवक यानी ‘विसाका स्वयंसेवकों’ को इस समाज को कैशलेस बनाने की इस सेवा के बदले अकादमिक क्रेडिट मिलेगा. ज्यादातर कॉलेजों की एनएसएस और एनसीसी इकाइयों को आस-पास के बाजारों में जाकर दुकानदारों और विक्रेताओं को डिजिटल लेन-देन की प्रक्रिया समझाने के लिए कहा गया है.

2. केंद्र द्वारा पोषित उच्च शिक्षा संस्थानों में कैश के इस्तेमाल पर पाबंदी

विसाका अभियान के कुछ दिन पहले ही एमएचआरडी ने सारे उच्च शिक्षण संस्थानों को कैशलेस होने के आदेश दे दिए थे. इसमें इन संस्थानों के ठेके पर काम कर रहे श्रमिकों को दिया जाने वाला भुगतान भी शामिल है. मंत्रालय ने आईआईटी सहित कई उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा यह शिकायत मिलने पर यह फैसला दिया कि कैश निकालने की सीमा तय होने के चलते उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, यहां तक कि रोजमर्रा के रख-रखाव तक में दिक्कत आ रही है.

इसके बाद ही जावडेकर ने अपील की कि सारे संस्थान कैश में कोई भुगतान न लें जैसे फीस, जुर्माना, जमा आदि और न ही कोई भुगतान कैश में करें जैसे मजदूरी, वेतन, वेंडरों को भुगतान वगैरह. इसी प्रकार दुकानों, कैंटीन व अन्य सेवाओं को भी कैशलेस बना कर पूरे परिसर को ही कैशलैस बना लें. यह आदेश सारे केंद्रीय विश्वविद्यालय, कॉलेज, आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर पर लागू होता है. 

एमएचआरडी की ‘अपील’’ पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सारे कॉलेज व यूनिवर्सिटी को निर्देश दिए कि वे कैशलेस हो जाएं. अजीब संयोग है कि एमएचआरडी के इस आदेश के एक साल पहले ही ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म पेटीएम पहले ही प्राइवेट कॉलेजों में छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो चला है. इस वर्ष अप्रैल माह तक कम्पनी 150 कॉलेजों और स्कूलों के साथ अनुबंध कर चुकी थी.

पेटीएम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष किरण वासीरेड्डी के अनुसार, इस साल के अंत तक देश भर के 25,000 शिक्षा संस्थान पेटीएम से लैस होंगे. इन संस्थानों में एडमिशन फॉर्म, फीस और अन्य खर्चे पेटीएम वॉलेट का इस्तेमाल कर, कर सकते हैं. अब मोदी की मदद से पेटीएम और ऐसे ही दूसरे कैशलेस वॉलेट अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं क्योंकि सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों के माध्यम से उनके लिए सफलता के दरवाजे खुल चुके हैं.

3.सीबीएसई ने स्कूलों को कैशलेस होने के निर्देश दिए

केंद्र सरकार के अधीन आने वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ एजुकेशन (सीबीएसई) ने अपने संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने छात्रों से फीस, जुर्माना व अन्य भुगतान कैश लैस माध्यमों से ही लें. आगामी 1 जनवरी से सारे सीबीएसई स्कूल कैश में भुगतान लेना बंद कर देंगे.

10 दिसम्बर को स्कूलों को जारी सर्कुलर जारी कर कहा गया है कि वे अपने सारे भुगतान जैसे खरीद, ठेके पर मजदूरों को मजदूरी भत्ते वगैरह सब बिना कैश के ही करें. स्कूल अभिभावक संघों के साथ होने वाली बैठकों में छात्रों के अभिभावकों को बिना नकद लेन-देन के फायदों के बारे में बता सकते हैं.

कैशलेस ट्रांज़ैक्शन के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से छात्रों को निबंध लेखन, स्लोगन लेखन जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित करने को कहा गया है.

4.कॉलेज न जाने वाले युवाओं को बनाया ‘मोबाइल बैंकिंग प्रशिक्षक

युवा मामलों और खेल राज्य मंत्री विजय गोयल ने 11 दिसम्बर को दिल्ली में मोबाइल व डिजिटल बैंकिंग अभियान की शुरूआत की. युवा मामलों व खेल मंत्रालय की ही एक इकाई नेहरू युवा केंद्र संगठन युवाओं को ‘यूथ फॉर डिजिटल पैसा’ अभियान से जोड़ रहा है. यह अभियान मूलतः भाजपा के युवा प्रकोष्ठ भाजयुमो द्वारा शुरू किया गया है.

एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक दिल्ली और उसके अलावा अन्य बाहरी इलाकों से कुल मिला कर 600 से ज्यादा लोगों ने इसमें भाग लिया. इनमें से 100 युवाओं को नेहरू युवा केंद्र संगठन के साथ काम करने के लिए जोड़ा गया है. ये 100 युवा मोबाइल बैंकिंग प्रशिक्षक 100 परिवारों को प्रशिक्षण देंगे और उन्हें 10,000 रूपए का सम्मान दिया जाएगा.

5.एमसीडी स्कूलों ने अभिभावकों के बीच नोटबंदी को लोकप्रिय बनाया

भाजपा शासित दिल्ली नगरपालिका भी अभिभावकों को नोटबंदी के फायदे समझाने के लिए छात्रों का ही इस्तेमाल कर रही है. 24 नवम्बर को उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने सर्कुलर जारी कर शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी पीटीएम में अभिभावकों के साथ नोटबंदी पर भी चर्चा करें.

ऐसे ही किसी स्कूल के पीटीएम में अभिभावकों को शिक्षकों ने नोटबंदी के फायदों के बारे में बताया. हालांकि जो बच्चे एमसीडी के स्कूलों में पढ़ते हैं, उनके माता-पिता छोटे-मोटे कामगार है. उनकी कमाई इतनी है ही नहीं कि अपने लिए कुछ बचत कर सकें. लेकिन एमसीडी के स्कूल तो अभिभावकों को नोटबंदी के फायदे गिनाने के सरकारी आदेश की पालना कर ही रहे हैं.

First published: 17 December 2016, 7:51 IST
 
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