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अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया ने अटल की इन उपलब्धियों को गिनाकर किया उन्हें याद

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 August 2018, 14:01 IST

भारत के सबसे करिश्माई नेताओं में से एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जिन्होंने कई संकटों में राष्ट्र का नेतृत्व किया, के निधन पर दुनियाभर की मीडिया ने प्रमुखता से याद किया. दुनिया के सभी बड़े अख़बारों ने उनके निधन की खबर को प्रमुखता से जगह दी है. न्यूयॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और सीएनएन ने प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिका-भारत संबंधों को सुधारने और परमाणु शक्ति वाले राष्ट्रों के बीच भारत की स्थिति को बढ़ाने के उनके प्रयासों के बारे में उनके उल्लेखनीय प्रयासों के बारे में लिखा है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि 'भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 93 साल में निधन' नाम से हेडलाइन लिखते हुए द न्यूयॉर्क टाइम्स ने वाजपेयी को एक दृढ़ राजनेता के रूप में पेश किया है. अख़बार ने लिखा है ''1998 से 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अटल ने परमाणु हथियार परीक्षणों से दुनिया को चकित कर दिया''.

अखबार आगे लिखता है कि वाजपेयी ने एक युवा के रूप में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ एक पत्रकार और आंदलनकारी के रूप में काम किया. राजनीति में उनके 50 वर्षों के दौरान वह एक हिंदू राष्ट्रवादी नेता रूप में विपक्ष के नेता रहे लेकिन 70 के बाद वाजपेयी दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले लोकतंत्र का चेहरा बने''. अख़बार ने लिखा है ''ऐसा राष्ट्र जहां जातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय संघर्षों ने पाकिस्तान के साथ तीन युद्ध लड़े''.

अमेरिका-भारत संबंधों में वाजपेयी के प्रयासों के बारे में लेख में कहा गया है "शीत युद्ध समाप्त होने के बाद वह अमेरिका के करीब आये और राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को भारत बुलाकर उन्होंने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये. वाशिंगटन पोस्ट ने अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर कहा है कि अटल ने भारत को परमाणु शक्ति बनाया. लेख ने वाजपेयी को भारत को परमाणु हथियार राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए श्रेय दिया है.

लेख में कहा गया है "भारत ने पहली बार 1974 में एक परिक्षण किया लेकिन यह परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए था. नए परीक्षणों ने भारत को एक अतिव्यापी परमाणु हथियार राज्य के रूप में स्थापित किया. परीक्षण के तत्काल बाद राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने परमाणु प्रसार को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहमति को चुनौती देने के लिए भारत की निंदा की लेकिन वाजपेयी ने बंद दरवाजे के पीछे बुद्धिमान कूटनीति का काम किया और क्लिंटन के साथ एक दोस्ताना वार्तालाप स्थापित किया.

साल 2000 क्लिंटन भारत गए, यह दो दशकों में अमेरिका के किसी राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी. लेख में यह भी बताया गया है कि कैसे वाजपेयी ने राष्ट्रवादी बीजेपी को मुख्यधारा में स्वीकृति दिलाने में मदद की और उनके 'व्यक्तिगत करिश्मे को इसका श्रेय दिया.

सीएनएन ने कहा कि वाजपेयी ने भारत के परमाणु परीक्षणों पर आर्थिक प्रतिबंधों के खतरे को खारिज कर दिया. सीएनएन ने लिखा है "वाजपेयी को परमाणु परीक्षण को लेकर देश और विदेशों में भारी आलोचना का सामना करना पड़ा. लेकिन वाजपेयी ने आर्थिक प्रतिबंधों के खतरे को खारिज कर दिया. उन्होंने संसद को बताया कि" हमने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आने के बाद कभी फैसला नहीं लिया है और हम भविष्य में ऐसा कभी नहीं करेंगे.

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First published: 17 August 2018, 13:54 IST
 
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