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विदेश सचिव एस. जयशंकर एनएसजी मुद्दे पर कर चुके हैं चीन की गुप्त यात्रा

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 June 2016, 18:02 IST
(पीटीआई)

न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की सदस्यता पाने के लिए भारत पूरा प्रयास कर रहा है. एनएसजी में सदस्यता पाने के लिए रूस ने भी भारत का समर्थन किया है. इसके साथ ही भारत के प्रयास का विरोध कर रहे चीन को मनाने की पहल शुरू कर दी गई है.

इस संबंध में भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर हाल ही में बीजिंग के दौरे पर गए थे. हालांकि, वैश्विक पटल पर इस बात की किसी को कानोंकान भनक तक नहीं लगी.

जयशंकर के दौरे की पुष्टि करते हुए विदेश विभाग के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने रविवार को कहा कि, ‘हां, मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि विदेश सचिव ने 16-17 जून को अपने चीनी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय विमर्श के लिए बीजिंग की यात्रा की.'

विदेश सचिव ने चीन के अलावा सियोल का भी दौरा किया, जहां उनकी इसी मसले पर दक्षिण कोरियाई नेताओं से भी चर्चा हुई. इस मामले में दक्षिण कोरिया ने भारत के समर्थन का पूरा भरोसा दिया है.

इससे पहले एनएसजी देशों की 20 से 24 जून तक सियोल में होने वाली बैठक से ठीक पहले रूस ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर भारत को समर्थन करेगा. इस महीने भारत को अमरीका, रूस-ब्रिटेन समेत विश्व के पांच बड़े देशों का समर्थन हासिल हो चुका है.

वहीं, भारत के एनएसजी सदस्यता के मामले में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वह सियोल में होने वाली बैठक में भारत की एनएसजी की सदस्यता का मुद्दा उठाएंगे.

पुतिन ने बताया कि हम बैठक में चीन से यह जरूर जानना चाहेंगे कि वह भारत को इस एलीट समूह का सदस्य बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध क्यों कर रहा है?

रूसी राष्ट्रपति ने भारत की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि परमाणु सुरक्षा पर वह सक्रिय भूमिका निभाता रहा है.

भारत और अमरीका के बीच बढ़ती दोस्ती पर पुतिन ने कहा कि इससे रूस और भारत के रिश्तों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. दोनों बहुत पुराने और अच्छे दोस्त हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर कोई परेशानी नहीं है.

First published: 19 June 2016, 18:02 IST
 
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