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विदेश सचिव मुलाकात: बात कम दिखावा ज्यादा कर रहा है पाकिस्तान

सादिक़ नक़वी | Updated on: 27 April 2016, 20:01 IST
QUICK PILL
  • मंगलवार को नई दिल्ली में भारत और पाकिस्तान के विदेेश सचिवों के बीच वार्ता हुई. ऐसे मामलों में पाकिस्तान से लगातार रूबरू होते रहे पूर्व राजनयिकों का मत है कि इस बातचीत से कुछ हासिल नहीं होने वाला.
  • भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष एजाज अहमद चौधरी के सामने आतंकी मसूद अजहर और कुलभूषण जाधव के मुद्दे को उठाया.

विदेश सचिव एस जयशंकर ने मंगलवार को साउथ ब्लॉक में अपने पाकिस्तानी समकक्ष एजाज अहमद चौधरी से मुलाकात की. इस मुलाकात में उन्होंने आतंकी मसूद अजहर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग रखी, जिसे पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है.

दोनों राजनयिकों के बीच नब्बे मिनट तक बातचीत हुई. इस दौरान आतंकवाद के अलावा द्विपक्षीय महत्व के मुद्दों पर भी चर्चा हुई. इनमें कश्मीर भी शामिल था. हालांकि ऐसे मामलों में पाकिस्तान से लगातार रूबरू होते रहे पूर्व राजनयिकों का मत है कि इस बातचीत से कुछ हासिल नहीं होने वाला.

ज्यादातर पूर्व राजनयिकों की राय है कि यह बैठक सिर्फ यह दिखाने के लिए थी कि दोनों देशों के बीच बातचीत स्थगित नहीं हुई है. पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल कहते हैं, 'मुझे नहीं लगता कि बातचीत थोड़ा भी आगे बढ़ी है. दोनों पक्ष सिर्फ यह दर्शाना चाहते हैं कि बातचीत में अभी भी संभावनाएं बाकी है.'

द्विपक्षीय वार्ता पर आतंकवाद के असर को पाकिस्तान नकार नहीं सकता: एस जयशंकर

इस महीने की शुरुआत में भारतीय मीडिया के साथ बातचीत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने बयान जारी किया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत रद्द हो गई है. उनके इस बयान ने भारतीय पक्ष की त्यौरियां चढ़ा दी थीं. इसके बाद इस विचार को आगे बढ़ाया गया कि बासित का बयान पाकिस्तान की विदेश नीति का प्रतिनिधत्व नहीं था, बल्कि सिर्फ कट्टरपंथियों को संदेश देने के लिए दिया गया बयान था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'विदेश सचिव जयशंकर ने स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है कि द्विपक्षीय वार्ता पर आतंकवाद के असर को पाकिस्तान नकार नहीं सकता. भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादी समूहों को पाकिस्तान में बिना किसी कार्रवाई के संचालित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.'

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प्रवक्ता ने आगे कहा, 'भारत के विदेश सचिव ने पठानकोट आतंकवादी हमले की जांच में तेजी और परिणाम देने वाली प्रगति के साथ-साथ मुंबई हमले की पाकिस्तान में सुनवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति की सूची में शामिल करने का मामला भी उठाया.'

जानकारों के मुताबिक चौधरी की वर्तमान यात्रा को अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के एजेंडे के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए. पाकिस्तानी विदेश सचिव के पास इसके अलावा कोई विकल्प ही नहीं था कि वे हार्ट ऑफ एशिया, इस्तांबुल प्रक्रिया में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भाग लें.

एक पूर्व राजनयिक कहते हैं, 'वे जानना चाहते हैं कि भारत किस हद तक जा सकता है.' पाकिस्तान का पूरी तरह से स्पष्ट है कि वह अफगानिस्तान में भारत की दखलंदाजी नहीं चाहता. इसी कारण पाकिस्तान के विदेश सचिव इस महत्वपूर्ण बैठक से बाहर नहीं रह सकते थे.

कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरियों की इच्छा के तहत सुलझाया जाना चाहिए: पाक

एक अन्य राजनयिक बताते हैं, 'यही सबसे बड़ा कारण है कि चौधरी को भारत आना पड़ा.' उन्होंने यह भी इशारा किया कि इस बैठक में दो वरिष्ठ राजनयिकों द्वारा अपने-अपने मुद्दे उठाने के अलावा कुछ महत्वपूर्ण घटित नहीं हुआ.

दिलचस्प बात है कि इस बार भी बैठक खत्म होने से पहले ही पाकिस्तानियों ने एक बयान जारी कर दिया. बयान में कहा गया कि बैठक में कश्मीर मसले पर बातचीत हुई और चौधरी ने दोहराया है कि इस मसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरियों की इच्छा के तहत सुलझाया जाना चाहिए.

तालिबान से बातचीत में पाकिस्तान की जरूरत नहीं: अशरफ गनी

सिब्बल ध्यान दिलाते हैं कि पाकिस्तान में सेना प्रमुख ही है जिसके इशारे पर सारे खेल चल रहे हैं. वास्तव में खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संघ, इंटरनेशनल कंसॉर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट द्वारा मोजेक फोंसेका प्रकरण में हुए खुलासे के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का राजनीतिक जीवन मुश्किल में घिर गया है.

मोजेक फोंसेका खुलासे में पता चला था कि नवाज शरीफ के परिवार ने टैक्स हैवन माने जाने वाले देशों में धन जमा कर रखा है. पनामा पेपर्स के खुलासे के बाद बेनकाब हुए और कमजोर पड़ चुके शरीफ अब सेना को चुनौती देने की हालत में नहीं बचे हैं.

पाकिस्तानियों ने कुलभूषण जाधव तक भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों को पहुंचने की अनुमति तक नहीं दी है

सिब्बल कहते हैं, 'जनरल और आक्रामक हो चुके हैं.' पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष राहील शरीफ ने हाल ही में भ्रष्टाचार के आरोपों में सेना के 12 अधिकारियों को बर्खास्त कर एक संदेश भी दे दिया है कि अगर वे अपने मातहतों के साथ इतना कठोर बर्ताव कर सकते हैं तो फिर वे भ्रष्टाचार में डूबे देश को कैसे साफ करेंगे.

ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लिए यह एक इशारा है कि अब उनके शासन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, और सेना उनके तख्तापलट की योजना बना रही है. सिब्बल कहते हैं, 'यह बात पूरी तरह से साफ है कि नवाज़ शरीफ सुरक्षित नहीं हैं.'

कुछ लोग यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि भारतीय विदेश नीति निर्धारक यह कैसे मान बैठे हैं कि इन सारे घटनाक्रम के पीछे पाकिस्तानी सेना ही है? पाकिस्तानियों ने अब तक नेशनल इंटेलीजेंस एजेंसी यानी एनआईए को पठानकोट आतंकी हमले की जांच के लिए पाकिस्तान आने की अनुमति नहीं दी है. साथ ही वे जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर (भारतीय जांचकर्ताओं के अनुसार पठानकोट आतंकी हमले के पीछे यही आतंकी था) को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काली सूची में डालने की भारत की कोशिश को रोकने में और चीन की मदद पाने में कामयाब रहे हैं.

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इसके अलावा, पाकिस्तानियों ने कुलभूषण जाधव तक भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों को पहुंचने की अनुमति तक नहीं दी है. उनका दावा है कि जाधव रॉ का एजेंट है और पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए ब्लूचिस्तान में अलगाववादियों को भड़काने के काम में लगा था. वे यह भी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने विदेशी सम्पर्क रखने वाले गुर्गों के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिनके तार भारत से जुड़े हैं.

विदेश सचिव एस जयशंकर ने एजाज अहमद चौधरी के साथ अपनी बैठक में फिर दोहराया है कि भारतीय दूतावास को जाधव तक जाने की इजाजत दी जाए. उन्होंने पहली बार कहा कि जाधव एक पूर्व नौसेना अधिकारी हैं जिनका "अपहरण किया गया और पाकिस्तान ले जाया गया.”

सूत्रों के अनुसार उन्होंने यह भी पूछा कि 'कौन-सी खुफिया एजेंसी अपने एजेंट को अपने देश के पासपोर्ट और वैध वीजा के साथ भेजेगी?' पाकिस्तान का दावा है कि जाधव के पास भारतीय पासपोर्ट है और उसके पास ईरान का वैध वीजा भी है.

पूर्व राजनयिक और टिप्पणीकार विवेक काटजू कहते हैं, 'जब भी कोई नीति गलत मान्यताओं और एकतरफा छूट पर आधारित होती है तो विफलता की ओर ही ले जाती है.'

First published: 27 April 2016, 20:01 IST
 
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