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ABP न्यूज़ से इस्तीफ़ा देने वाले पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने किये कई चौंकाने वाले खुलासे

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 August 2018, 12:59 IST

देश के बड़े हिंदी न्यूज़ चैनल एबीपी न्यूज़ में प्राइम टाइम शो 'मास्टरस्ट्रोक' के एंकर (पूर्व) और वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने न्यूज़ वेबसाइट 'द वायर' में एक लेख के जरिये अपने इस्तीफे की पूरी कहानी बताई है. इससे पहले संसद में भी एबीपी के पत्रकारों के इस्तीफे का मुद्दा विपक्ष उठ चुका है. लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि चैनल के एक एडिटर और दो एंकरों पर दबाव डाला गया और इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया.

पुण्य प्रसून बाजपेयी अपने लेख में कहा है कि इस्तीफे से पहले 14 जुलाई को उनका आनंद बाज़ार पत्रिका समूह के न्यूज़ चैनल एबीपी न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ से लंबा संवाद हुआ था. प्रसून ने अपने लेख में लिखा है कि उन्हें चैनल की ओर से लगातार यह कहा जा रहा था कि 'वह सरकार की नीतियों में जो भी गड़बड़ी दिखाना चाहते हैं, दिखा सकते है. मंत्रालय के हिसाब से मंत्री का नाम ले सकता हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ज़िक्र कही मत कीजिए''.

अपने लेख में 'मास्टरस्ट्रोक' के एंकर रहे पुण्य प्रसून ने लिखा है कि उनका शो लोकप्रिय हो रहा था, इस बात को चैनल के एडिटर-इन-चीफ भी मानते हैं लेकिन उन्हें चैनल की ओर से फरमान सुनाया गया कि ''प्रधानमंत्री मोदी का नाम अब चैनल की स्क्रीन पर लेना ही नहीं है.' यही नहीं उनके शो के लिए फरमान सुनाया गया कि ‘मास्टरस्ट्रोक’ में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर भी नहीं जानी चाहिए.

पुण्य प्रसून ने अपने लेख में लिखा है कि ''नकात्मक ख़बर करने या फिर तथ्यों के सहारे मोदी सरकार के सच को झूठ क़रार देने पर बीजेपी के प्रवक्ताओं को चैनल में भेजने पर पाबंदी लग जाती है और ऐसा ही एबीपी न्यूज़ के मामले में हुआ. जून के आख़री हफ्ते से ही बीजेपी प्रवक्ताओं ने चैनल पर आना बंद कर दिया. यहां तक कि चैनल को बाईट देना भी बंद कर दिया''.

पुण्य प्रसून ने लिखा है कि बीजेपी प्रवक्ता भले चैनल पर नहीं आ रहे थे लेकिन चैनल की ख़बरों का असर यह था कि चैनल टीआरपी लगातार बढ़ रही थी. विज्ञापन के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाने वाले एबीपी न्यूज़ का शिखर सम्मेलन कार्यक्रम में बीजेपी और मोदी सरकार आने से इंकार कर दिया.

गौरतलब है कि लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बयान दिया था कि चैनल के प्राइम टाइम शो की तैयारी कम हो यही थी लोग उसे देखना नहीं चाहते थे. इसके जवाब में पुण्य प्रसून ने लिखा है कि ''एबीपी के प्राइम टाइम (रात 9-10 बजे) में चलने वाले मास्ट्रस्ट्रोक की औसत टीआरपी जो 12 थी और अडानी पर एक रिपोर्ट दिखाने के दिन तो यह 17 हो गई थी. यहां तक कि मास्टरस्ट्रोक से पहले ‘जन गण मन’नाम से चलने वाले प्राइम टाइम शो की औसत टीआरपी 7 थी, मास्ट्रस्ट्रोक की औसत टीआरपी 12 हो गई.''

अपने लेख में पुण्य प्रसून ने लिखा है कि उनके शो मास्टरस्ट्रोक के सिग्नल लगातार रोके जा रहे थे. जिससे कुछ विज्ञापनदाताओं ने विज्ञापन हटा लिए या कहें रोक लिए. सिर्फ एबीपी का राष्ट्रीय हिंदी न्यूज़ चैनल ही नहीं बल्कि चार क्षेत्रीय भाषा के चैनल भी डिस्टर्ब होने लगे. प्रसून ने लिखा है कि इन हालातों में काम करना मुश्किल हो गया था. यही कारण था कि उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा.

प्रसून ने खुलासा किया कि  ''इस्तीफ़ा देने के बाद पतजंलि का विज्ञापन भी चैनल को लौट आया. मास्टरस्ट्रोक में भी विज्ञापन बढ़ गया. 15 मिनट का विज्ञापन जो घटते-घटते तीन मिनट पर आ गया था वह बढ़कर 20 मिनट हो गया. दो अगस्त को इस्तीफ़ा हुआ और दो अगस्त की रात सैटेलाइट भी संभल गया''.

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First published: 6 August 2018, 12:25 IST
 
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