Home » इंडिया » former chief justice of india p.n.bhagwati passes away
 

जनता को जनहित याचिका की ताक़त देने वाले जस्टिस भगवती नहीं रहे

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 June 2017, 10:11 IST

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पीएन भगवती का गुरुवार को 95 साल की उम्र में दिल्ली में निधन हो गया. जस्टिस भगवती पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. उनके परिवार में पत्नी और तीन पुत्रियां हैं. उनका अंतिम संस्कार 17 जून को किया जाएगा. मशहूर अर्थशास्त्री जगदीश भगवती और न्यूरोसर्जन एन.एन. भगवती उनके भाई हैं.

जस्टिस भगवती भारत के 17वें मुख्य न्यायाधीश थे. उन्होंने जुलाई 1985 से दिसंबर 1986 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला. इससे पहले वो गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे. 1973 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था.

देश के लोगों को दिया जनहित याचिका का अधिकार

जनहित याचिका के साथ भारतीय न्यायिक व्यवस्था में उत्तरदायित्व की शुरुआत करने का श्रेय जस्टिस भगवती को जाता है. उन्होंने आदेश दिया था कि मूलभूत अधिकारों के मुद्दे पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए किसी व्यक्ति को किसी अधिकार की जरूरत नहीं है.

इसके साथ ही उन्होंने अपने एक अहम फ़ैसले में कहा था कि ज़ेल में बंद क़ैदियों के भी मानवाधिकार हैं.

मेनका गांधी पासपोर्ट केस में सुनाया बड़ा फैसला

1978 में मेनका गांधी के पासपोर्ट केस में दिया गया जस्टिस भगवती का फैसला महत्वपूर्ण है. मेनका गांधी पासपोर्ट मामले में अहम फ़ैसला देते हुए उन्होंने जीवन के अधिकार की व्याख्या की और आदेश दिया कि किसी व्यक्ति के आवागमन पर रोक नहीं लगाई जा सकती है. उन्होंने फैसला दिया था कि एक व्यक्ति को पासपोर्ट रखने का पूरा अधिकार है.

क्या था मेनका गांधी पासपोर्ट केस 

दिल्ली के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने 2 जुलाई 1977 को मेनका गांधी को भारतीय पासपोर्ट एक्ट की धारा 10(3) सी के तहत जनहित में एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट जमा कराने के लिए कहा था. इसके बाद मेनका गांधी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर भारत सरकार को चुनौती देते हुए कहा था कि सरकार का अदेश संविधान में अनुच्छेद 21 के तहत मिले मूल अधिकारों का उल्लंघन है.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में लगाए गए आपातकाल में वह 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' केस से संबंधित पीठ का हिस्सा थे. इस केस में अपने विवादित फैसले को लेकर भी जस्टिस भगवती खासे चर्चा में रहे. हालांकि 1976 के इस फैसले को 30 साल बाद उन्होंने 'कमजोर कृत्य' बताया था.

First published: 16 June 2017, 10:11 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी