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भारतीय सेना प्रमुखों के तीन विवाद जो बने सुर्खियां

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 December 2016, 11:42 IST
(पीटीआई)

पूर्व वायुसेनाध्यक्ष शशींद्र पाल त्यागी को अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया है. भारतीय सेना प्रमुख का पद वैसे तो निर्विवाद माना जाता है, लेकिन आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं, जब सेना प्रमुखों के विवाद सुर्खियों में रहे. एक नज़र ऐसे तीन मामलों पर:

वाजपेयी सरकार में एडमिरल विष्णु भागवत और रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का विवाद चर्चा में रहा था. (गेट्टी )

एडमिरल विष्णु भागवत

1998 में केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्‍णु भागवत का विवाद काफी चर्चा में रहा था.

विष्णु भागवत आजाद भारत के इकलौते सेनाध्‍यक्ष हैं, जिन्‍हें बर्खास्‍त किया गया था. 30 दिसंबर 1998 को तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने एडमिरल भागवत को नागरिक सत्ता के आदेशों को न मानने के आरोप में बर्खास्त कर दिया था.

भागवत का डीसीएनएस (डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ) की नियुक्ति को लेकर फर्नांडिस के साथ झगड़ा हो गया था. इससे पहले अगस्त 1998 में फर्नांडिस ने सबसे पहले भागवत के खिलाफ देश की सुरक्षा को खतरा बताते हुए शिकायत की. 

30 दिसंबर 1998 को बर्खास्त

नौ दिसंबर 1998 को अप्वाइंटमेंट्स कमेटी ऑफ कैबिनेट (कैबिनेट की नियुक्ति समिति) ने डिप्टी चीफ की नियुक्ति के लिए भेजी एडमिरल भागवत की सिफारिश को खारिज कर दिया. भागवत ने इस आदेश को नेवी एक्ट का उल्लंघन बताते हुए मानने से इनकार कर दिया.

बढ़ते तकरार के बीच 26 दिसंबर को फर्नांडिस ने कैबिनेट की नियुक्ति समिति को भागवत को हटाने के लिए 20 पन्नों का खत लिखा. इसके दो दिन बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने भागवत की बर्खास्तगी पर मुहर लगा दी और आखिरकार 30 दिसंबर 1998 को विष्णु भागवत को बर्खास्त करते हुए सुशील कुमार को नौसेना की कमान सौंपी गई.  

2012 में नौसेना के कार्यक्रम में न्योता

इस बर्खास्तगी के 14 साल बाद 2012 में भागवत को पहली बार किसी नौसैनिक कार्यक्रम में बुलाया गया. वाजपेयी सरकार के समय भागवत का एडमिरल रैंक भी छीन लिया गया था और उनकी पेंशन भी बंद कर दी गई थी. हालांकि, बाद में विष्णु भागवत की पेंशन बहाल हो गई थी. लेकिन नौसेना के किसी समारोह में उन्हें औपचारिक न्योता नहीं मिलता था.

2012 में तत्कालीन रक्षा मंत्री एंटनी ने अपने संबोधन में भागवत को एडमिरल कहकर संबोधित किया था. इस पर रक्षा मंत्री ने कहा था कि सेना में रिटायर होने के बाद भी कोई अधिकारी सैन्य परिवार का हिस्सा बना रहता है.

यूपीए सरकार के कार्यकाल में जनरल वीके सिंह का उम्र विवाद और सेना कूच मामला सुर्खियों में रहा. (फाइल फोटो)

जनरल वीके सिंह

यूपीए के कार्यकाल में थलसेना प्रमुख जनरल विजय कुमार सिंह से जुड़े कई विवाद सामने आए. इसमें उनकी उम्र से जुड़ा विवाद सबसे ज्यादा चर्चित रहा.

रिकॉर्ड के मुकाबिक सेना प्रमुख वी के सिंह का जन्म 1950 में हुआ. इससे उन्हें कोर कमांडर, सेना कमांडर और आखिर में सेना प्रमुख के रूप में तीन अहम प्रमोशन मिले. लेकिन जनरल वीके सिंह चाहते थे कि सरकार उनकी जन्मतिथि 1951 कर दे.

उनकी सबसे बड़ी दलील यह थी कि उनके जन्म प्रमाणपत्र और एसएससी प्रमाणपत्र में उनकी जन्मतिथि 10 मई, 1951 दर्ज है. जनरल की दलील थी कि सेना सचिव का प्रभाग 1971 में उनका एसएससी प्रमाणपत्र मिलने के बाद रिकॉर्ड अपडेट नहीं कर पाया.

फरवरी 2012 में उम्र विवाद का पटाक्षेप

तत्कालीन रक्षा मंत्री एंटनी ने इस नई शिकायत पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि उनका फैसला नहीं बदलेगा. सरकार द्वारा उनकी दलील को ठुकराये जाने के बाद वो इस मामले को लेकर वो सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गए. 

हालांकि 10 फरवरी 2012 को उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली. कोर्ट ने यह माना कि सिंह के जन्मतिथि में कोई विवाद नहीं है, लेकिन अदालत ने इस बात की तहकीकात करनी चाही कि आखिर कैसे इस तारीख को दर्ज किया गया. कोर्ट ने साथ ही यह भी कहा कि सिंह ने तीन मौकों पर गलत जन्मतिथि को स्वीकार किया.

जनवरी 2012 में सेना कूच की खबर

04 अप्रैल 2012 को अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने खुलासा किया कि 16 जनवरी 2012 की देर रात राजधानी की ओर सेना की 2 टुकड़ी बढ़ रही थी.

हालांकि जनरल सिंह ने कहा कि 16-17 जनवरी को सेना की दो इकाइयों का दिल्ली के लिए कूच करना एक नियमित गतिविधि थी और सरकार को इसके बारे सूचित करने की कोई जरूरत नहीं थी. जनरल सिंह ने कहा था, "किसलिए सूचना दी जाती? क्या हो रहा था? हम ऐसा अक्सर करते रहते हैं." जनरल सिंह की सफाई के बाद यह विवाद थम गया.

एसपी त्यागी देश के ऐसे पहले सेना प्रमुख हैं, जिनकी किसी घोटाले के आरोप में गिरफ्तारी हुई है. (फाइल फोटो)

एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी

यूपीए शासनकाल में हुए 3600 करोड़ रुपये के अगस्ता हेलीकॉप्टर डील में कथित घूसखोरी के मामले में सीबीआई ने 9 दिसंबर को पूर्व एयरफोर्स चीफ एसपी त्यागी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया.

12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की खरीद में 450 करोड़ रुपये की घूसखोरी से जुड़े इस मामले में एसपी त्यागी के रिश्तेदार संजीव त्यागी और वकील गौतम खेतान की भी गिरफ्तारी हुई है.

मानकों में बदलाव के लिए रिश्वत!

तत्कालीन एयरफोर्स चीफ एसपी त्यागी पर आरोप है कि वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की ऑपरेशनल क्षमता की मानक ऊंचाई 6 हजार मीटर से घटाकर 4500 मीटर करने के लिए राजी हुए. इन बदलावों की वजह से ब्रिटिश कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड भी वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे की दौड़ में शामिल हो सकी.

जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि आरोपी वेंडर्स ने बिचौलियों और रिश्तेदारों के जरिए घूस दी. यह घूस गैरकानूनी तरीके से पब्लिक सर्वेंट्स पर अपने प्रभाव को इस्तेमाल करने के लिए दी गई.

वहीं एसपी त्यागी आरोपों को खारिज करते हुए कहते रहे हैं कि मानकों में बदलाव एक संयुक्त तौर पर लिया गया फैसला था, जिसमें वायु सेना, एसपीजी और दूसरे विभाग शामिल थे.

3600 करोड़ की वीवीआईपी चॉपर डील

विदेशी रूट से पैसे के लेन-देन को लेकर भी सीबीआई जांच कर रही है. सीबीआई का आरोप है कि वकील खेतान ने कबूल किया कि उन्होंने यूरोप के बिचौलिए ग्यूडो हैश्के और कार्लो गेरोसा से पैसे लिए. हालांकि, खेतान ने यह भी कहा कि ये पैसे डील को प्रभावित करने के लिए घूस के तौर पर नहीं लिए गए.

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, घूस का पैसा बिचौलियों और रिश्तेदारों के जरिए त्यागी तक पहुंचा. 1 जनवरी 2014 को भारत ने यह डील रद्द कर दी थी. सीबीआई ने इस मामले में त्यागी और 18 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

3600 करोड़ रुपये की अगस्ता वेस्टलैंड डील में 450 करोड़ रुपये की घूसखोरी का आरोप है.
First published: 10 December 2016, 11:42 IST
 
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