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जब 'अंतरात्मा की आवाज' पर राष्ट्रपति बने वीवी गिरि और टूट गई कांग्रेस

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 June 2016, 18:40 IST

शुक्रवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति वराहगिरि वेंकट गिरि की 36वीं पुण्यतिथि है. भारत के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरि का निधन 86 साल की उम्र में 24 जून, 1980 को हुआ था. स्वतंत्रता सेनानी रहे वीवी गिरी का मजदूर नेता से राष्ट्रपति बनने तक सफर रोचक रहा है. गिरि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के काफी करीबी थे और इंदिरा ने उन्हें राष्ट्रपति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ जीता राष्ट्रपति चुनाव

लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद जनवरी, 1966 में इंदिरा गांधी प्रधामंत्री बनी थी. उस समय कांग्रेस में के. कामराज, मोरारजी देसाई, नीलम संजीव रेड्डी, एस निजलिंगप्पा और एसके पाटिल जैसे दिग्गज नेताओं का एक गुट (जिसे सिंडिकेट कहा गया) हावी था. इंदिरा गांधी को 'गूंगी गुड़िया' कहा जाता था उस दौर में.

1969 में पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद उपराष्ट्रपति वीवी गिरि कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका में थे. राजनीतिक जानकारों के अनुसार सिंडिकेट के वर्चस्व वाली कांग्रेस कार्यसमिति ने बगैर इंदिरा को भरोसे में लिए नीलम संजीव रेड्डी का नाम राष्ट्रपति पद के लिए घोषित कर दिया.

इंदिरा गांधी को पार्टी का यह निर्णय पसंद नहीं आया. उन्होंने अपने दल के सांसदों और विधायकों से अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट डालने की अपील कर डाली. वीवी गिरि निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे और इंदिरा की अपील से कांटे के मुकाबले में नीलम संजीव रेड्डी को बेहद कम अंतर से हराने में सफल रहे.

वीवी गिरि 4,20,077 मत प्राप्त कर विजयी रहे, जबकि नीलम संजीव रेड्डी को 4,05,427 मत प्राप्त हुए. इस चुनाव में सीडी देशमुख की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्हें 1,12,769 मत प्राप्त हुए. राष्ट्रपति चुनाव में कुल 15 उम्मीदवार मैदान में थे.

गिरि के राष्ट्रपति बनने के बाद कांग्रेस पार्टी टूट गई थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) के नाम से पार्टी बनाई. उस समय कहा गया कि पार्टी से अलग होने के बाद इंदिरा पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं रह पाएंगी, लेकिन 1971 के लोकसभा चुनावों में इंदिरा दोबारा चुनकर प्रधानमंत्री बनी.

वीवी गिरि का जीवन परिचय

गिरि का जन्म 10 अगस्त, 1894 को बेहरामपुर, ओडिशा में हुआ था. आयरलैंड में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे 1916 में भारत लौट आए और मजदूरों के आंदोलन का हिस्सा बन गए. गिरि अखिल भारतीय रेलवे कर्मचारी संघ और अखिल भारतीय व्यापार संघ (कांग्रेस) के अध्यक्ष भी रहे.

उन्होंने रेलवे कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से 'बंगाल-नागपुर रेलवे एसोसिएशन' की भी स्थापना की थी. भारत रत्न से सम्मानित गिरि उत्तर प्रदेश, केरल और कर्नाटक के राज्यपाल भी रहे. उन्होंने इंडस्ट्रियल रिलेशन्स और लेबर प्रॉब्लम्स इन इंडियन इंडस्ट्री नामक दो किताबें भी लिखी हैं.

First published: 24 June 2016, 18:40 IST
 
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