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जानें आखिर क्यों नेहरू की अस्थियों को हेलीकॉप्टर से खेतों पर छिड़का गया?

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 November 2018, 10:51 IST

आज स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की 129वीं जयंती है. नेहरू का जन्म इलाहाबाद (जिसका नाम बदल कर अब प्रयागराज कर दिया है) में सन 1889 में हुआ था. पंडित नेहरू बच्चों के प्रति असीम प्रेम और स्नेह रखते थे. बच्चों के बीच उस समय के देश के प्रधानमंत्री 'चाचा नेहरू' के नाम से जाने जाते थे. लाल किले पर तिरंगा फहराने वाले चाचा नेहरू भारत के पहले शख्स थे.

पंडित नेहरू ने एक समृद्ध परिवार में जन्म लिया था. नेहरू के पिता का रूतबा उस समय सबसे बड़े वकीलों में से एक था. वे इंडियन नेशनल कांग्रेस के लीडर भी रहे. पंडित नेहरू ने बतौर प्रधानमंत्री देश के लिए कई बड़े फैसले लिए जो कि देश के विकास और वैश्विक पहचान बनाने में मददगार साबित हुए.

 

पंडित नेहरू किस कदर भारत की भूमि से जुड़े थे इसको लेकर सबसे बड़ा उदाहरण उनकी वसीयत है. 27 मई 1964 की सुबह नेहरू की तबीयत खराब हो जाने के कारण उन्होंने इस देश को अलविदा कह दिया. उन्होने अपनी वसीयत में जो लिखा है वो एक देश की मिट्टी से प्यार करने वाला की लिख सकता है.

पंडित नेहरू ने अपनी वसीयत में लिखा था, ''मैं चाहता हूं कि मेरी मुट्ठीभर राख प्रयाग के संगम में बहा दी जाए जो हिन्दुस्तान के दामन को चूमते हुए समंदर में जा मिले, लेकिन मेरी राख का ज्यादा हिस्सा हवाई जहाज से ऊपर ले जाकर खेतों में बिखरा दिया जाए, वो खेत जहां हजारों मेहनतकश इंसान काम में लगे हैं, ताकि मेरे वजूद का हर जर्रा वतन की खाक में मिलकर एक हो जाए.'' वे चाहते थे कि मरने के बाद उनकी अस्थियां और उनके चिता की राख आजाद भारत की मिट्टी में ही विलीन हो जाए.

गौरतलब है की पंडित जवाहरलाल नेहरू देश को आजादी दिलाने की लड़ाई के चलते 9 बार जेल में गए थे. नेहरू को 11 बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया गया. उन्होंने जेल में रहते हुए 146 पत्र बेटी इंदिरा को लिखे. जो उनकी किताब Glimpses of World History का हिस्सा हैं.

First published: 14 November 2018, 10:51 IST
 
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